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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यूडीआईडी जरूरी, बनवाने गए तो रिकॉर्ड में नाम ही नहीं मिला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2022 11:39 PM IST
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UDID required to avail benefits of government schemes, if you go to build it, then the name did not get in the record.
भिवानी। दिव्यांगों के लिए अब पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए यूडीआईडी अनिवार्य कर दी गई है। ऐसे में उनकी यूडीआईडी बनाने के लिए नागरिक अस्पताल में शनिवार से चार दिवसीय कैंप लगाया गया है। जब दिव्यांगजन वहां पर यूडीआईडी बनवाने के लिए पहुंचे तो कइयों के प्रमाण पत्र उस समय रद्दी हो गए जब उनका रिकॉर्ड ही नहीं मिला। ऊपर से कोढ़ में खाज यह कि पहले दिन ही पैनल के चिकित्सक कैंप में नहीं पहुंचे। कैंप में दिव्यांगों के साथ सिर्फ समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी ही पहुंचे। पहले दिन कैंप में करीब 34-40 दिव्यांगजन व उनके परिजन पहुंचे।
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यूडीआईडी यानी कि यूनिक आईडी फॉर पर्संस विद डिसेबलिटीज बनाने का मकसद देशभर में दिव्यांगजनों का डेटाबेस तैयार करना हैं। जिसके बाद प्रत्येक दिव्यांग को एक यूनिक आईडी मिल जाएगी। उस यूनिक आईडी की मदद से दिव्यांगों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आसान हो जाएजा और सरकार के पास भी उनका सही रिकॉर्ड दर्ज होगा। पर इसके उलट यह योजना दिव्यांगों पर भारी पड़ रही है। भिवानी नागरिक अस्पताल से जारी किए दिव्यांगता प्रमाण पत्र उस समय रद्दी हो गए जब उनमें से काफी सारे प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड ही खुद स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं मिला। इसका खुलासा तब हुआ जब कैंप में कई दिव्यांग ऐसे भी पहुंचे, जिनके मूल दिव्यांगता प्रमाण पत्र गुम हो चुका था। जब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से डूप्लीकेट प्रमाण पत्र मांगा तो उनको रिकॉर्ड नहीं होने का जवाब मिला। ये दिव्यांग अब यूडीआईडी बनवाने के लिए भी इधर उधर भटक रहे हैं। अब उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। संवाद
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जिले में 30 हजार दिव्यांगजन, सिर्फ 8600 ले रहे पेंशन
समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता के करीब 30 हजार लोग हैं। इनमें कुछ वो लोग भी शामिल हैं जो चरखी दादरी के जिला बनने से पहले भिवानी में अपना पंजीकरण करवा चुके थे। 30 हजार के करीब दिव्यांगजन में से समाज कल्याण विभाग से सिर्फ 8600 दिव्यांगजन ही पेंशन ले रहे हैं।
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केस नंबर एक :
मेरे पास दिव्यांगता का मूल प्रमाण, सरकारी रिकॉर्ड में कोई जिक्र तक नहीं
चरखी दादरी निवासी राहुल कुमार ने बताया कि उसका भिवानी के नागरिक अस्पताल से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना हुआ है। वह अपने दिव्यांगता के मूल दस्तावेज लेकर भिवानी पहुंचा। जब इसे सत्यापित करवाने लगा तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बोले की हमारे पास रिकॉर्ड नहीं है। यूडीआईडी बनाने का दावा हो रहा है, मगर स्वास्थ्य विभाग के पास रिकॉर्ड तक गायब है। ऐसे में कैसे यूडीआईडी बनेगी। न वेरिफिकेशन हो रही है न कार्ड बन रहा है। चरखी दादरी से उसे यहां नागरिक अस्पताल भेजा गया है, क्योंकि वहां बोला गया है कि उसका प्रमाण पत्र भिवानी में बना है। पैर से दिव्यांग हूं, इसे कागजों में साबित करने के लिए मेरे पास प्रमाण पत्र तो है पर सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विभाग की लापरवाही का खामियाजा दिव्यांगों को भुगतना पड़ रहा है।
केस नंबर दो:
मूल प्रमाण दस्तावेजों में लगाकर करा दिया था जमा, अब विभाग के पास भी रिकॉर्ड गायब
गांव लोहानी निवासी दिव्यांग ललिता भी अपने दादा ओमप्रकाश के साथ नागरिक अस्पताल पहुंची। उसके दादा ने बताया कि पोती का दिव्यांग प्रमाण पत्र बना हुआ है। मगर उसका मूल दिव्यांग प्रमाण पत्र किसी कार्य की वजह से दस्तावेजों में साथ लगाकर जमा करवा दिया था, अब उनके पास उसकी फोटोकॉपी है। जब स्वास्थ्य विभाग में पता करवाया तो पोती की दिव्यांगता से जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात स्वास्थ्य अधिकारी कह रहे हैं। इसी वजह से उसका यूडीआईडी भी नहीं बन रहा है। ललिता बीए की पढ़ाई कर रही है, एक हाथ व पांव से अक्षम है। बुढ़ापे में दिव्यांग पोती को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय लेकर घूम रहा हूं, कोई सुनने वाला नहीं है।
यूडीआईडी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग ने संयुक्त रूप से स्पेशल कैंप लगाया है। ये कैंप 26 जुलाई तक चलेगा। जिसमें सुबह नौ से शाम पांच बजे तक स्पेशलिस्ट दिव्यांगजनों की वेरिफिकेशन करेंगे। दिव्यांगजनों को सीएससी के माध्यम से ऑनलाइन ही अप्लाई करना होगा। रिकॉर्ड गुम है तो उसकी मिसिंग रिपोर्ट भी साथ लेकर आनी होगी।

-डॉ सुनील कुमार, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग भिवानी।
40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले सभी दिव्यांगों के लिए अब यूडीआईडी अनिवार्य किया गया है। इसी से दिव्यांगों से जुड़ी सभी योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिलेगा। इसके लिए स्पेशल कैंप में दिव्यांगों की असेसमेंट की जाएगी, उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल तीन जिलों में ये पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। जिसमें रोहतक, भिवानी और पानीपत शामिल हैं।
- सरफराज खान, जिला समाज कल्याण अधिकारी भिवानी।
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