भिवानी: बरात विदा होने से पहले ही तीनों दोस्त कर चले दुनिया को अलविदा, तीन दोस्तों की टैंक में डूबने से मौत
युवक गर्मी से राहत पाने के चक्कर में डुबकी लगा रहे थे। तीनों दोस्तों की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा।
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हरियाणा के भिवानी में शादी समारोह में दुल्हन के सात फेरे हो चुके थे और बरात विदा होने की तैयारी थी। इससे पहले ही तीनों दोस्त दुनिया को अलविदा कर गए। गर्मी से राहत पाने के चक्कर में तीनों सुनसान जगह खेत में बने टैंक में नहाने चले गए थे। टैंक में क्या उतरे फिर उसमें अंदर ही समा गए। तीनों दोस्तों की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा।
गर्मी के मौसम में हर साल नादानी में युवा अनमोल जिंदगी गवां रहे हैं। पिछले साल भी टैंक में डूबने से छह हादसे हुए, जिनमें चार तो नाबालिग बच्चे ही थे। जलघर के टैंकों पर केवल चेतावनी बोर्ड पर में क्षेत्र वर्जित है लिखा है। हालांकि टैंकों के आसपास लोगों के घूमने और नहाने पर कोई मनाही नहीं है। ऐसा करने से रोकने वाला भी कोई नहीं है। यही वजह है कि इस तरह से हादसे बढ़ रहे हैं। यदि टैंकों के आसपास सुरक्षा करने वाला कोई होता तो बरात में आए तीन दोस्तों को अपनी जिंदगी से हाथ नहीं धोना पड़ता।
बता दें कि सिंघानी में मंगलवार को हुई दो बहनों की शादी समारोह में बरात में आए तीन युवाओं के साथ अमंगल हो गया। सिंघानी में राजस्थान के चुरू जिले के गांव सादपुरा से बरात आई थी। बरात में राजस्थान के गांव खबरपुरा(सादपुरा) निवासी मनदीप, कृष्ण कुमार और राहुल सिंघानी से झांझड़ा हसनपुरा के रोड स्थित एक खेत में स्थित पानी के टैंक में मंगलवार रात तड़के तीन बजे नहाने चले गए। तीनों को ही तैरना नहीं आता था।
पानी के अंदर एक दूसरे की मदद से उतर तो गए, मगर फिर निकल नहीं पाए। इन तीनों दोस्तों के साथ सिंघानी का भी एक युवक था। इस युवक ने डूबते हुए तीनों को बचाने की कोशिश की। उसने सिंचाई के लिए पड़े पाइप भी पानी में डाले, मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। युवक ने ही खेत मालिक को इस हादसे की जानकारी दी।
बुधवार की सुबह करीब सुबह पांच बजे लोहारू पुलिस को इस हादसे की जानकारी मिली। लोहारू पुलिस ने टैंक के बाहर से इन तीनों के कपड़े और एक युवक का मोबाइल फोन भी बरामद किया। इसी मोबाइल फोन पर मृतक के परिजनों ने बरात लौट आने के बावजूद उनके घर नहीं पहुंचने पर फोन किया था, जिसे एक पुलिस कर्मचारी ने उठाया तो उसने परिजनों को इस हादसे की जानकारी दी। इसके बाद राजस्थान से मृतकों के परिजन यहां पहुंचे।
पलक झपकते ही खुशियां मातम में बदली
राजस्थान के सादपुरा निवासी कृष्ण का गांव में ही सैलून था। मनदीप श्रमिक था। राहुल मंडेला से बीए फाइनल का छात्र था। तीनों ही आपस में गहरे दोस्त थे। दूल्हे के परिवार से इनका कोई सीधा संबंध तो नहीं था, मगर न्योते पर बरात में तीनों आए थे। मंदीप तीन बहनों व दो भाइयों में छोटा और अविवाहित था। कृष्ण भी दो भाइयों व एक बहन में दूसरे नंबर पर था।
इस हादसे की जानकारी परिवार के सदस्यों को गांव में मिलते ही खुशियां मातम में बदल गई। मृतकों के परिजन भी लोहारू अस्पताल पहुंचे। लोहारू थाने के जांच अधिकारी एसएआई प्रदीप कुमार ने एक साथ तीनों का पोस्टमार्टम कराया। मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज कर इस संबंध में इत्तेफाकिया मौत मामले की कार्रवाई की गई। इसके बाद ही तीनों के शवों को लेकर परिजन राजस्थान के लिए रवाना हुए।
टैंक के बदले डिजाइन भी खतरनाक
पब्लिक हेल्थ विभाग और किसान भी अब नए डिजाइन से गहरे पानी के टैंक बनवा रहे हैं। इन टैंकों की बनावट ऐसी हैं, एक बार अगर कोई इसमें उतर जाए तो फिर गहरे पानी में समा जाता है। अच्छे से अच्छे तैराक भी इस पानी के दबाव को नहीं झेल पाते, क्योंकि काफी टैंकों के अंदर तो पानी के अंदर काफी बेलों का जाल फैला रहता है। यही वजह है कि टैंक में उतरने वाले बेलों में उलझने और गहरे पानी में दम घुटने से ही मौत के आगोश में लोग जा रहे हैं।
वर्जित क्षेत्र फिर भी नहीं मान रहे हैं लोग
जलघर के टैंकों को आम लोगों के आवागमन के लिए वर्जित क्षेत्र घोषित किया हुआ है। नहरों में नहाने और पशुओं को नहलाने पर धारा 144 लागू की हुई है। हालांकि प्रशासन के इन आदेशों को केवल बोर्ड पर चेतावनी भर ही समझा जा रहा है, जबकि उनके ठीक आगे ही नहरों में डुबकी लगा बड़े, बच्चे भी गर्मी से राहत पा रहे हैं।
जलघर टैंकों के आसपास कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति नहीं घूम सकता है और न ही इस वर्जित क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। टैंकों की निगरानी के लिए कर्मचारी तो लगे हैं, मगर लोगों की आवाजाही व नहाने से रोकने की कोई व्यवस्था विभाग के पास नहीं है। -प्रवीण जांगड़ा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग