{"_id":"672d2b36dc6708863103b81c","slug":"the-wait-for-the-transfer-of-the-consumer-court-to-the-district-court-premises-is-not-ending-since-last-one-decade-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-125368-2024-11-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: एक दशक से उपभोक्ता अदालत का जिला न्यायालय परिसर में स्थानांतरण का खत्म नहीं हो रहा इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: एक दशक से उपभोक्ता अदालत का जिला न्यायालय परिसर में स्थानांतरण का खत्म नहीं हो रहा इंतजार
विज्ञापन
न्यायालय परिसर का मुख्य गेट।
भिवानी। उपभोक्ता अदालत के जिला न्यायालय परिसर में स्थानांतरण का इंतजार एक दशक बाद भी बरकरार है। उपभोक्ता अदालत को जिला न्यायालय परिसर में लाने के लिए अधिवक्ता काफी बार मांग कर चुके हैं और इस मांग को लेकर आंदोलन भी किए गए हैं। बार एसोसिएशनों ने भी इस मामले की पुरजोर पैरवी की, मगर मामला सिरे नहीं चढ़ा। उपभोक्ता अदालत को लेकर कई बार राजनेताओं ने भी वादे कर चुुके, लेकिन किसी भी नेता ने इसकी ठीक से पैरवी नहीं की। यही वजह है कि लंबे अर्से से चली आ रही अधिवक्ताओं की मांग अब तक पूरी नहीं हुई।
ग्वार फैक्टरी एमसी कॉलोनी लाइनपार क्षेत्र स्थित उपभोक्ता अदालत में किसी भी उपभोक्ता के केस की पैरवी के लिए जिला न्यायालय से करीब पांच किलोमीटर दूर अधिवक्तओं को जाना पड़ता है। ऐसे में अधिवक्ताओं के लिए बड़ी समस्या ये है कि वे उपभोक्ता अदालत में जाते हैं तो पूरा दिन वहां लग जाता है। जिससे अन्य मामलों की पैरवी कर पाना भी मुश्किल होता है। कई बार तो उपभोक्ता को अपने मामलों में कोई वकील भी केस लड़ने के लिए तैयार नहीं होता। इसकी वजह यही है कि पांच किलोमीटर दूर तक आना जाना काफी मुश्किल होता है। जबकि न्यायालय परिसर में अधिवक्ता किसी भी उपभोक्ता के केस की पैरवी आसानी से कर सकते हैं। वहीं उपभोक्ता भी न्यायलय परिसर से पांच किलोमीटर दूर जाने में दिक्कतें महसूस करते हैं, क्योंकि पहले उन्हें अधिवक्ता के लिए न्यायालय परिसर आना पड़ता है फिर उपभोक्ता अदालत में जाना पड़ता है। ऐसे हालातों में उपभोक्ता अदालत और जिला न्यायालय परिसर के बीच की दूरी ने अधिवक्ताओं का उपभोक्ता मामलों के केसों से भी फासला भी बढ़ा दिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
2015 में स्थानांतरित हुई थी उपभोक्ता अदालत
जिला न्यायालय परिसर में स्थित उपभोक्ता अदालत को 2015 में ग्वार फैक्टरी एमसी कॉलोनी में नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया था। तब से लेकर आज तक यहां उपभोक्ता अदालत चल रही है। न्यायालय परिसर से उपभोक्ता अदालत को स्थानांतरित नहीं किए जाने को लेकर 2013-14 में भी अधिवक्ताओं ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया था। जिस वजह से ये मामला रुक गया था। लेकिन 2015 में इसे अचानक शिफ्ट कर दिया गया। तब से लेकर अब तक विरोध जारी है। इस मांग को लेकर अधिवक्ता धरने प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं सरकार के समक्ष भी मांग पत्र भेजे जा चुके हैं।
उपभोक्ता अदालत तक न्यायालय परिसर से नहीं मिलता कोई ऑटो और रिक्शा
उपभोक्ता अदालत तक जाने के लिए जिला न्यायालय परिसर से कोई ऑटो और ई रिक्शा भी नहीं मिलता है। ऐसे में उपभोक्ता के पास अगर खुद का साधन नहीं है तो वह मुश्किल में रहता है। अधिवक्ताओं को भी अपने वाहनों से ही वहां तक आना-जाना पड़ता है। जिसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि रास्ता भी रेलवे लाइनपार का है। यही वक्त जिला न्यायालय में अहम रहता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
जिला न्यायालय परिसर में उपभोक्ता अदालत को लाने का मामला पिछले चार साल से लगातार उठाता आ रहा हूं। सभी अधिवक्ता इस बात पर एकमत हैं कि उपभोक्ता अदालत को जिला न्यायालय परिसर में ही वापस लाया जाए। जहां ये अदालत पहले लगती थी वो जगह आज भी खाली है। इसके अलावा बार उपभोक्ता अदालत के लिए नई जगह मुहैया कराने को भी तैयार है। उपभोक्ता अदालत न्यायालय परिसर में आने से लोगों को त्वरित न्याय मिलने की उम्मीद रहेगी। फिलहाल अधिवक्ता वहां तक जाने में हिचकते हैं, क्योंकि आना जाना ही वहां बड़ी परेशानी भरा होता है।
-एडवोकेट सत्यजीत पिलानिया अध्यक्ष बार एसोसिएशन भिवानी।
विज्ञापन
ग्वार फैक्टरी एमसी कॉलोनी लाइनपार क्षेत्र स्थित उपभोक्ता अदालत में किसी भी उपभोक्ता के केस की पैरवी के लिए जिला न्यायालय से करीब पांच किलोमीटर दूर अधिवक्तओं को जाना पड़ता है। ऐसे में अधिवक्ताओं के लिए बड़ी समस्या ये है कि वे उपभोक्ता अदालत में जाते हैं तो पूरा दिन वहां लग जाता है। जिससे अन्य मामलों की पैरवी कर पाना भी मुश्किल होता है। कई बार तो उपभोक्ता को अपने मामलों में कोई वकील भी केस लड़ने के लिए तैयार नहीं होता। इसकी वजह यही है कि पांच किलोमीटर दूर तक आना जाना काफी मुश्किल होता है। जबकि न्यायालय परिसर में अधिवक्ता किसी भी उपभोक्ता के केस की पैरवी आसानी से कर सकते हैं। वहीं उपभोक्ता भी न्यायलय परिसर से पांच किलोमीटर दूर जाने में दिक्कतें महसूस करते हैं, क्योंकि पहले उन्हें अधिवक्ता के लिए न्यायालय परिसर आना पड़ता है फिर उपभोक्ता अदालत में जाना पड़ता है। ऐसे हालातों में उपभोक्ता अदालत और जिला न्यायालय परिसर के बीच की दूरी ने अधिवक्ताओं का उपभोक्ता मामलों के केसों से भी फासला भी बढ़ा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
2015 में स्थानांतरित हुई थी उपभोक्ता अदालत
जिला न्यायालय परिसर में स्थित उपभोक्ता अदालत को 2015 में ग्वार फैक्टरी एमसी कॉलोनी में नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया था। तब से लेकर आज तक यहां उपभोक्ता अदालत चल रही है। न्यायालय परिसर से उपभोक्ता अदालत को स्थानांतरित नहीं किए जाने को लेकर 2013-14 में भी अधिवक्ताओं ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया था। जिस वजह से ये मामला रुक गया था। लेकिन 2015 में इसे अचानक शिफ्ट कर दिया गया। तब से लेकर अब तक विरोध जारी है। इस मांग को लेकर अधिवक्ता धरने प्रदर्शन कर चुके हैं। वहीं सरकार के समक्ष भी मांग पत्र भेजे जा चुके हैं।
उपभोक्ता अदालत तक न्यायालय परिसर से नहीं मिलता कोई ऑटो और रिक्शा
उपभोक्ता अदालत तक जाने के लिए जिला न्यायालय परिसर से कोई ऑटो और ई रिक्शा भी नहीं मिलता है। ऐसे में उपभोक्ता के पास अगर खुद का साधन नहीं है तो वह मुश्किल में रहता है। अधिवक्ताओं को भी अपने वाहनों से ही वहां तक आना-जाना पड़ता है। जिसमें दो से तीन घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि रास्ता भी रेलवे लाइनपार का है। यही वक्त जिला न्यायालय में अहम रहता है।
जिला न्यायालय परिसर में उपभोक्ता अदालत को लाने का मामला पिछले चार साल से लगातार उठाता आ रहा हूं। सभी अधिवक्ता इस बात पर एकमत हैं कि उपभोक्ता अदालत को जिला न्यायालय परिसर में ही वापस लाया जाए। जहां ये अदालत पहले लगती थी वो जगह आज भी खाली है। इसके अलावा बार उपभोक्ता अदालत के लिए नई जगह मुहैया कराने को भी तैयार है। उपभोक्ता अदालत न्यायालय परिसर में आने से लोगों को त्वरित न्याय मिलने की उम्मीद रहेगी। फिलहाल अधिवक्ता वहां तक जाने में हिचकते हैं, क्योंकि आना जाना ही वहां बड़ी परेशानी भरा होता है।
-एडवोकेट सत्यजीत पिलानिया अध्यक्ष बार एसोसिएशन भिवानी।