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Bhiwani News: मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए 30 तक चलेगा खेत बचाओ अभियान
Sat, 06 Jun 2026 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 06 Jun 2026 10:45 PM IST
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भिवानी। रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाइयों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र ने सरकार के निर्देशानुसार खेत बचाओ अभियान शुरू किया है। एक जून से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून तक पूरे हरियाणा में चलाया जाएगा जिसके तहत किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. आरएस ढिल्लो और कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. ममता फोगाट ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की ताकत को बचाना और खेती की लागत को कम करना है। इसके लिए ब्लॉक स्तर के अलावा जिला मुख्यालय स्तर पर भी दो टीमों का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) और हरी खाद के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा किसानों को असली और नकली कीटनाशक दवाइयों की पहचान करने के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे बाजार में ठगी का शिकार होने से बच सकें।
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उन्होंने बताया कि किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा जिससे उन्हें बाजार से महंगी खाद और दवाइयां खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि विज्ञान केंद्र की टीमों द्वारा गांव बामला, बोहल, बलियाली, मिताथल, नाथुवास और कालुवास सहित विभिन्न गांवों में विशेष शिविर आयोजित कर किसानों को जागरूक किया जा चुका है और यह अभियान लगातार जारी है।
डॉ. ढिल्लो और डॉ. ममता फोगाट ने बताया कि पूरे जून माह में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ स्वयं गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेंगे। इस दौरान चौपाल बैठकों का आयोजन किया जाएगा, खेतों में प्रदर्शन के माध्यम से आधुनिक और वैकल्पिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी तथा जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनके मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खेतों में उचित मात्रा में खाद डालने की सलाह दी जाएगी। साथ ही किसानों से अपील की गई कि वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर इस निशुल्क प्रशिक्षण का लाभ उठाएं ताकि उनकी खेती सुरक्षित, टिकाऊ और अधिक मुनाफे वाली बन सके।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. आरएस ढिल्लो और कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. ममता फोगाट ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की ताकत को बचाना और खेती की लागत को कम करना है। इसके लिए ब्लॉक स्तर के अलावा जिला मुख्यालय स्तर पर भी दो टीमों का गठन किया गया है।
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उन्होंने बताया कि किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) और हरी खाद के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा किसानों को असली और नकली कीटनाशक दवाइयों की पहचान करने के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे बाजार में ठगी का शिकार होने से बच सकें।
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उन्होंने बताया कि किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा जिससे उन्हें बाजार से महंगी खाद और दवाइयां खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि विज्ञान केंद्र की टीमों द्वारा गांव बामला, बोहल, बलियाली, मिताथल, नाथुवास और कालुवास सहित विभिन्न गांवों में विशेष शिविर आयोजित कर किसानों को जागरूक किया जा चुका है और यह अभियान लगातार जारी है।
डॉ. ढिल्लो और डॉ. ममता फोगाट ने बताया कि पूरे जून माह में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ स्वयं गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेंगे। इस दौरान चौपाल बैठकों का आयोजन किया जाएगा, खेतों में प्रदर्शन के माध्यम से आधुनिक और वैकल्पिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी तथा जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनके मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार ही खेतों में उचित मात्रा में खाद डालने की सलाह दी जाएगी। साथ ही किसानों से अपील की गई कि वे अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर इस निशुल्क प्रशिक्षण का लाभ उठाएं ताकि उनकी खेती सुरक्षित, टिकाऊ और अधिक मुनाफे वाली बन सके।