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Bhiwani News: जिंदगी की जंग हारते पेड़ों की आवाज बन जगा रहे पर्यावरण संरक्षण की अलख, अंतरराष्ट्रीय कलाकार हरिओम बावा ने लाइव आर्ट से दर्शाया प्रकृति का दर्द
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भिवानी में अपने अंदाज में पर्यावरण बचाओं का संदेश देते हरिओम बाबा। स्वयं
संजय वर्मा
भिवानी। बवानीखेड़ा क्षेत्र के छोटे से गांव जमालपुर निवासी अंतरराष्ट्रीय कलाकार हरिओम बावा अपनी लाइव आर्ट प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दे रहे हैं। उनकी जीवंत कलाकृतियों में प्रकृति का दर्द साफ झलकता है। चित्रों में आंसू बहाते पेड़ मानो स्वयं को बचाने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। बावा ने अपनी कला के माध्यम से पर्यावरण के घुटते दम और सुलगते पेड़ों की पीड़ा को अभिव्यक्त कर लोगों की अंतरात्मा को झकझोरने का प्रयास किया है। बवानीखेड़ा के एक निजी विद्यालय में फाइन आर्ट के अध्यापक हरिओम बावा पिछले 15 वर्षों से कला के जरिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं। वे बच्चों को कला की शिक्षा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम तथा नशा मुक्ति जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी जागरूक करते हैं। हरिओम स्वयं को केवल कलाकार नहीं मानते, बल्कि लाइव प्रस्तुति के दौरान एक मूक कलाकृति के रूप में ढाल लेते हैं जो बिना कुछ कहे समाज और व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर देती है। संवाद
ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण पर जताई चिंता : हरिओम बावा ने कहा कि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन का अस्तित्व रह सकेगा। जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक और पॉलिथीन का बढ़ता उपयोग, जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण के साथ-साथ अंधाधुंध पेड़ों की कटाई मानव जाति के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाना ही वास्तव में अपने भविष्य को सुरक्षित करना है।
हरिओम बावा ने ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पर्यावरण जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जाए ताकि उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित हो सके।
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भिवानी। बवानीखेड़ा क्षेत्र के छोटे से गांव जमालपुर निवासी अंतरराष्ट्रीय कलाकार हरिओम बावा अपनी लाइव आर्ट प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दे रहे हैं। उनकी जीवंत कलाकृतियों में प्रकृति का दर्द साफ झलकता है। चित्रों में आंसू बहाते पेड़ मानो स्वयं को बचाने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। बावा ने अपनी कला के माध्यम से पर्यावरण के घुटते दम और सुलगते पेड़ों की पीड़ा को अभिव्यक्त कर लोगों की अंतरात्मा को झकझोरने का प्रयास किया है। बवानीखेड़ा के एक निजी विद्यालय में फाइन आर्ट के अध्यापक हरिओम बावा पिछले 15 वर्षों से कला के जरिए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं। वे बच्चों को कला की शिक्षा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम तथा नशा मुक्ति जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर भी जागरूक करते हैं। हरिओम स्वयं को केवल कलाकार नहीं मानते, बल्कि लाइव प्रस्तुति के दौरान एक मूक कलाकृति के रूप में ढाल लेते हैं जो बिना कुछ कहे समाज और व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर देती है। संवाद
ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण पर जताई चिंता : हरिओम बावा ने कहा कि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी मानव जीवन का अस्तित्व रह सकेगा। जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक और पॉलिथीन का बढ़ता उपयोग, जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण के साथ-साथ अंधाधुंध पेड़ों की कटाई मानव जाति के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को बचाना ही वास्तव में अपने भविष्य को सुरक्षित करना है।
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हरिओम बावा ने ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से पर्यावरण जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जाए ताकि उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित हो सके।
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