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तकनीकी और कंपोजिट टेक्सटाइल को गांव स्तर तक ले जाना होगा : गिरिराज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 01:12 AM IST
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Technology and composite textiles will have to be taken to the village level: Giriraj
टीआईटीएस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करते केंद्रीय मंत्री गिरिराज
भिवानी। केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि तकनीकी और संरचनात्मक कंपोजिट टेक्सटाइल भविष्य की औद्योगिक प्रगति की आधारशिला हैं और इन्हें गांव स्तर तक लोगों के दिलो-दिमाग तक ले जाने की जरूरत है।
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वह शनिवार को स्थानीय टीआईटीएस संस्थान में एडवांस्ड टेक्सटाइल स्ट्रक्चरल कंपोजिट एंड जियो सिंथेटिक्स विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
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केंद्रीय मंत्री ने सम्मेलन का शुभारंभ करने के साथ तकनीकी वस्त्र एवं कंपोजिट प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। सम्मेलन के दौरान टीआईटीएस संस्थान ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए छह देशों के संस्थानों से छह महत्वपूर्ण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ और भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र कौशिक भी मौजूद रहे।
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गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत सरकार की वस्त्र नीति देश को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। पहली बार टेक्सटाइल क्षेत्र में साढ़े दस हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि पीएलआई में और डेढ़ हजार करोड़ रुपये टेक्सटाइल अनुसंधान के लिए दिए गए हैं। कपड़ा उद्योग क्षेत्र में 15 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि लोहे के सरिये के स्थान पर जियो सिंथेटिक मैटीरियल का प्रयोग किया जाएगा जो वजन में हल्का और कीमत में सस्ता होगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भवन निर्माण, हवाई जहाज, एयरक्राफ्ट और विंड टरबाइन निर्माण में कंपोजिट मैटीरियल का उपयोग बढ़ेगा। टैरिफ वार के दौरान भी भारत से छह हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत के कपड़े का निर्यात हुआ। भविष्य में कंपोजिट और जियो सिंथेटिक टेक्सटाइल का निर्यात 200 बिलियन से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की बड़ी भूमिका बताते हुए नवाचार अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप प्रोत्साहन और उद्योग–शिक्षा सहयोग को मजबूत किया जा रहा है।
आज हर क्षेत्र में स्टार्टअप की जरूरत है और टेक्नोलॉजी के बिना हर चीज अधूरी है। एआई तकनीक के जरिए तुरंत डाटा विश्लेषण संभव है और भारत तकनीक में पीछे नहीं रहेगा।
उन्होंने हरियाणा सरकार की औद्योगिक एवं वस्त्र नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आधारभूत संरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के प्रयासों से राज्य में वस्त्र उद्योग को नई गति मिली है। टीआईटीएस का चेक गणराज्य, जर्मनी, जापान, यूक्रेन, स्लोवाकिया और ग्रीस जैसे देशों के साथ शैक्षणिक एवं औद्योगिक सहयोग तकनीकी विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भिवानी तकनीकी वस्त्रों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा।
भारत सरकार के राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के मिशन निदेशक अशोक मल्होत्रा ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान विनिमय, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करते हैं।

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों के दौरान यूक्रेन के खमेलनित्स्की नेशनल यूनिवर्सिटी की ओल्गा परास्का ने टायर निर्माण के लिए सतत उन्नत टेक्सटाइल संरचनात्मक कंपोजिट विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन क्षमता वाली सामग्रियों के विकास पर बल दिया।
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