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Bhiwani News: उपभोक्ता न्यायालय ने स्पाइस जेट पर लगाया 66,000 रुपये का जुर्माना
Thu, 25 Jan 2024 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 25 Jan 2024 02:15 AM IST
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भिवानी। भिवानी उपभोक्ता न्यायालय ने अधिवक्ता मुकेश गुलिया की शिकायत पर हवाई जहाज कंपनी स्पाइस जेट पर कार्रवाई की है। बिना बताए यात्रा टिकट कैंसिल करने पर 66,000 रुपये हर्जाने के तौर पर नो प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से देने के आदेश जारी किए हैं।
अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने नौ जून को शिरडी जाने के लिए और 11 जून को शिरडी से वापस आने के लिए अपने परिवार व दो दोस्त वीरेंद्र और सुनील व उनके परिवार के लिए 11 टिकट मांझी टूर द्वारा स्पाइस जेट कंपनी से बुक किए थे। कंपनी ने बिना कोई कारण बताए 11 जून वापसी की टिकट कैंसिल कर दी तथा रुपये भी पूरे वापस नहीं किए और जब वापस आने के लिए टिकट भी 28,000 रुपये महंगी हुई व एक दिन ज्यादा रुकना पड़ा तो होटल और खाने के रुपये भी बढ़ गए।
इस पर अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने उपभोक्ता न्यायालय में याचिका दायर की तथा फोरम ने कंपनी की लापरवाही को मानते हुए हर्जाने के तौर पर 50,502 रुपये मानसिक आघात लगने पर 10,000 रुपये और 5,500 मुकदमा फीस के तौर नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यदि कंपनी 40 दिन के अंदर पैसे नहीं देती तो ब्याज दर 12 प्रतिशत देनी होगी और न देने की सूरत में तीन साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने के देने होंगे।
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अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने नौ जून को शिरडी जाने के लिए और 11 जून को शिरडी से वापस आने के लिए अपने परिवार व दो दोस्त वीरेंद्र और सुनील व उनके परिवार के लिए 11 टिकट मांझी टूर द्वारा स्पाइस जेट कंपनी से बुक किए थे। कंपनी ने बिना कोई कारण बताए 11 जून वापसी की टिकट कैंसिल कर दी तथा रुपये भी पूरे वापस नहीं किए और जब वापस आने के लिए टिकट भी 28,000 रुपये महंगी हुई व एक दिन ज्यादा रुकना पड़ा तो होटल और खाने के रुपये भी बढ़ गए।
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इस पर अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने उपभोक्ता न्यायालय में याचिका दायर की तथा फोरम ने कंपनी की लापरवाही को मानते हुए हर्जाने के तौर पर 50,502 रुपये मानसिक आघात लगने पर 10,000 रुपये और 5,500 मुकदमा फीस के तौर नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यदि कंपनी 40 दिन के अंदर पैसे नहीं देती तो ब्याज दर 12 प्रतिशत देनी होगी और न देने की सूरत में तीन साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने के देने होंगे।
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