{"_id":"659af9cb93cc2610e3001be7","slug":"sin-is-increasing-in-humans-despite-resources-bhiwani-news-c-125-1-sknl1014-11419-2024-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"संसाधनों के बावजूद मानव में बढ़ता जा रहा पाप : कंवर महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संसाधनों के बावजूद मानव में बढ़ता जा रहा पाप : कंवर महाराज
Mon, 08 Jan 2024 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 08 Jan 2024 12:51 AM IST
विज्ञापन
भिवानी। आज जहां भी दृष्टि डालें, वहां धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग, दरबार, तीर्थ स्थल और अनेक धर्म-कर्म के स्थान जगह-जगह देखे जा सकते हैं। फिर भी इस युग को घोर कलयुग माना जा रहा है। प्रभु भक्ति, संतों का ज्ञान, धार्मिक शिक्षा और उपदेश, सभी डिजिटल, ऑडियो, विजुअल और प्रिंट माध्यमों के जरिये तुरंत सुलभ है। इतने संसाधनों के बावजूद मानव में आज पाप बढ़ता जा रहा है।
यह सत्संग वचन राधा स्वामी दिनोद के संत कंवर महाराज ने गांव दिनाेद स्थित राधा स्वामी आश्रम में एकत्रित हुए श्रद्धालुओं को फरमाया। संत कंवर महाराज ने फरमाया कि भले ही लोग धर्म-कर्म और सत्संगों में दिखाई देते हैं, लेकिन प्रभु भक्ति के लिए सच्चे मन से आने वाले लाखों में कोई एक ही होता है। चार प्रकार के भक्त होते हैं, पहले जो सांसारिक इच्छाओं के साथ आते हैं। दूसरे जो दूसरे का नुकसान या नकारात्मक उद्देश्यों के साथ आते हैं। तीसरे जो दोनों दिशाओं में बंटे होते हैं और अंतरात्मा से शुष्क रहते हैं। वे भक्ति करते हुए रोजाना नजर तो आते हैं पर अगर तुम दो मिनट भी बात करोगे तो मिलेगी-संसारिक ही। वो उस पत्थर की भांति है जिसे तुम अगर पानी में डाल दोगे तो बाहर से गीले तो जरूर हो जाते हैं पर वे अंतर से सूखे के सूखे रहते हैं। फिर भी वे अन्य लोगों से तो बहुत अच्छे हैं, जो कम से कम आकर बुरी आदत छोड़ देते हैं और प्रभु के प्रति उनकी आस्था भी होती। दया भाव भी आ जाता है और कुछ नहीं तो वो प्रेम के मार्ग पर अग्रसर हो जाते हैं। पर सबसे श्रेष्ठ चौथे किस्म के भक्त होते हैं जो सांसारिक कामनाओं को त्याग भक्ति के लिए आते हैं। वह अपने पाप कर्मों को नष्ट करने आते हैं ओर अपने मनुष्य जीवन को संवारने के उद्देश्य से आते हैं। आप अपने आपको संवारोगे तो मालिक कहता है कि मैं तेरा हो जाऊंगा।
विज्ञापन
यह सत्संग वचन राधा स्वामी दिनोद के संत कंवर महाराज ने गांव दिनाेद स्थित राधा स्वामी आश्रम में एकत्रित हुए श्रद्धालुओं को फरमाया। संत कंवर महाराज ने फरमाया कि भले ही लोग धर्म-कर्म और सत्संगों में दिखाई देते हैं, लेकिन प्रभु भक्ति के लिए सच्चे मन से आने वाले लाखों में कोई एक ही होता है। चार प्रकार के भक्त होते हैं, पहले जो सांसारिक इच्छाओं के साथ आते हैं। दूसरे जो दूसरे का नुकसान या नकारात्मक उद्देश्यों के साथ आते हैं। तीसरे जो दोनों दिशाओं में बंटे होते हैं और अंतरात्मा से शुष्क रहते हैं। वे भक्ति करते हुए रोजाना नजर तो आते हैं पर अगर तुम दो मिनट भी बात करोगे तो मिलेगी-संसारिक ही। वो उस पत्थर की भांति है जिसे तुम अगर पानी में डाल दोगे तो बाहर से गीले तो जरूर हो जाते हैं पर वे अंतर से सूखे के सूखे रहते हैं। फिर भी वे अन्य लोगों से तो बहुत अच्छे हैं, जो कम से कम आकर बुरी आदत छोड़ देते हैं और प्रभु के प्रति उनकी आस्था भी होती। दया भाव भी आ जाता है और कुछ नहीं तो वो प्रेम के मार्ग पर अग्रसर हो जाते हैं। पर सबसे श्रेष्ठ चौथे किस्म के भक्त होते हैं जो सांसारिक कामनाओं को त्याग भक्ति के लिए आते हैं। वह अपने पाप कर्मों को नष्ट करने आते हैं ओर अपने मनुष्य जीवन को संवारने के उद्देश्य से आते हैं। आप अपने आपको संवारोगे तो मालिक कहता है कि मैं तेरा हो जाऊंगा।
विज्ञापन