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सीवरेज समस्या के स्थायी समाधान पर लगी मंजूरी की मोहर
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:16 AM IST
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सीवरेज समस्या से मिलेगी निजात
- फोटो : फाइल फोटो
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सेक्टर वासियों के लिए परेशानी बना सीवरेज और बरसाती पानी की समस्या के स्थाई समाधान की कवायद शुरू हो गई है। सेक्टरों के पीछे तिगड़ाना गांव के पास 17.79 एकड़ जमीन का भूमि अर्जन अधिकारी ने अवार्ड कर दिया है और स्थानीय अधिकारियों को कब्जा लेने के निर्देश दिए गए है। यहां चार किलोमीटर लंबी ड्रेन बनाई जाएगी। जिसके माध्यम से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और बरसाती पानी को घग्गर ड्रेन में डाला जाएगा।
सेक्टरों को बने करीब 20 साल से अधिक का समय बीत चुका है। मगर अब तक भी यहां सीवरेज समस्या और बरसाती पानी निकासी की कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं। कहने को तो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है मगर गंदा पानी कहां डाला जाए इसकी कोई व्यवस्था नहीं। बरसाती पानी के प्लांट भी बने है मगर कभी चले ही नहीं। फिलहाल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी हुडा की करीब 25 एकड़ जमीन में छोड़ा जा रहा है। साथ ही गोशाला की जमीन में भी गंदा पानी छोड़ा जा रहा है।
अब इस समस्या के स्थायी समाधान की कवायद तेज हो गई है। यहां करीब चार किलोमीटर लंबी ड्रेन बनाई जाएगी। ड्रेन के माध्यम से सारा पानी घग्गर ड्रेन में डाला जाएगा। 29 जुलाई को हुडा अधिकारियों की बैठक में जमीन का अवार्ड किया गया। भूमि अर्जन अधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों को जमीन पर कब्जा लेने के निर्देश दिए। मगर इस जमीन पर फिलहाल किसानों ने फसलों की बिजाई कर रखी है।
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खेतों में भरा गंदा पानी, किसानों ने की सीएम विंडो पर शिकायत
सेक्टरों का गंदा पानी न केवल सेक्टर वासियों बल्कि तिगड़ाना गांव के किसानों के लिए भी परेशानी बना है। दरअसल हुडा विभाग ने फिलहाल सीवरेज का पानी डालने के लिए 25 एकड़ जमीन तय कर रखी है। सिटी स्टेशन लाइन पार बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही हुडा की करीब 25 एकड़ जमीन है। जिसकी चारदीवारी कर पानी इसी में छोड़ा जा रहा है। मगर समस्या यह है कि सेक्टरों से इतना गंदा पानी निकल रहा है कि 25 एकड़ जगह तो तीसरे-चौथे दिन ही भर जाती है। बाकी बचा पानी आसपास के खेतों में जा रहा है। जिससे किसानों की फसल भी प्रभावित हो रही है। हुडा अधिकारी बेशक इस पानी को फसलों के लिए फायदेमंद बताए मगर किसानों की दलील है कि यह पानी केमिकल का है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट किया हुआ है और इससे फसलें खराब हो रही है। दिनेश कुमार व अन्य किसान इसकी शिकायत लेकर पहले हुडा संपदा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। इसके बाद डीसी कार्यालय और सीएम विंडो पर शिकायत की। किसानों ने गंदे पानी में बदबू की भी शिकायत की है। विभाग के पास पानी डालने का एक अन्य विकल्प गोशाला की जमीन है। इस पर भी पानी छोड़ा जा रहा है मगर ज्यादा पानी डालने पर यहां भी आपत्ति जताई जा रही है।
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सेक्टरों को बने करीब 20 साल से अधिक का समय बीत चुका है। मगर अब तक भी यहां सीवरेज समस्या और बरसाती पानी निकासी की कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं। कहने को तो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है मगर गंदा पानी कहां डाला जाए इसकी कोई व्यवस्था नहीं। बरसाती पानी के प्लांट भी बने है मगर कभी चले ही नहीं। फिलहाल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी हुडा की करीब 25 एकड़ जमीन में छोड़ा जा रहा है। साथ ही गोशाला की जमीन में भी गंदा पानी छोड़ा जा रहा है।
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अब इस समस्या के स्थायी समाधान की कवायद तेज हो गई है। यहां करीब चार किलोमीटर लंबी ड्रेन बनाई जाएगी। ड्रेन के माध्यम से सारा पानी घग्गर ड्रेन में डाला जाएगा। 29 जुलाई को हुडा अधिकारियों की बैठक में जमीन का अवार्ड किया गया। भूमि अर्जन अधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों को जमीन पर कब्जा लेने के निर्देश दिए। मगर इस जमीन पर फिलहाल किसानों ने फसलों की बिजाई कर रखी है।
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खेतों में भरा गंदा पानी, किसानों ने की सीएम विंडो पर शिकायत
सेक्टरों का गंदा पानी न केवल सेक्टर वासियों बल्कि तिगड़ाना गांव के किसानों के लिए भी परेशानी बना है। दरअसल हुडा विभाग ने फिलहाल सीवरेज का पानी डालने के लिए 25 एकड़ जमीन तय कर रखी है। सिटी स्टेशन लाइन पार बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही हुडा की करीब 25 एकड़ जमीन है। जिसकी चारदीवारी कर पानी इसी में छोड़ा जा रहा है। मगर समस्या यह है कि सेक्टरों से इतना गंदा पानी निकल रहा है कि 25 एकड़ जगह तो तीसरे-चौथे दिन ही भर जाती है। बाकी बचा पानी आसपास के खेतों में जा रहा है। जिससे किसानों की फसल भी प्रभावित हो रही है। हुडा अधिकारी बेशक इस पानी को फसलों के लिए फायदेमंद बताए मगर किसानों की दलील है कि यह पानी केमिकल का है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट किया हुआ है और इससे फसलें खराब हो रही है। दिनेश कुमार व अन्य किसान इसकी शिकायत लेकर पहले हुडा संपदा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। इसके बाद डीसी कार्यालय और सीएम विंडो पर शिकायत की। किसानों ने गंदे पानी में बदबू की भी शिकायत की है। विभाग के पास पानी डालने का एक अन्य विकल्प गोशाला की जमीन है। इस पर भी पानी छोड़ा जा रहा है मगर ज्यादा पानी डालने पर यहां भी आपत्ति जताई जा रही है।