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बहल के रामलीला मैदान में रामलीला मंचन शुरू
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बहल। कस्बे के रामलीला मैदान में रामलीला मंचन की विधिवत शुरुआत की। लीला मंचन के पहले दिन कस्बे के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पुरानों के अलावा नए कलाकारों ने दर्शकों का अपनी कला व प्रतिभा से खूब मनोरंजन किया। श्याम रामलीला ट्रस्ट द्वारा आयोजित रामलीला मंचन का समाजसेविका मणी देवी व थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ने फीता काटकर शुभारंभ किया।
रविवार रात नौ बजे रामलीला का शुभारंभ में थाना प्रभारी महेंद्र सिंह, मणी देवी, बहल युवा एकता संगठन के प्रधान योगेश शर्मा, कमल पातवानिया सहित अन्य अतिथियों ने गणेश वंदना की। मुख्यातिथि एसएचओ महेंद्र सिंह ने कहा कि रामलीला अपने आप में प्रेम, त्याग, वात्सल्य, कर्तव्यपरायणता, परोपकार और मानवता की रक्षा से जुड़ी एक संस्कार युक्त जीवन जीने की संपूर्ण कहानी है। रामकथा के मंचन से दर्शकों ने किसी एक पात्र की शिक्षाएं भी अपने जीवन में ग्रहण कर ली तो उसके जीवन से अनेक विकार दूर हो सकते हैं।
रामलीला की शुरुआत नारद मोह से हुई, जिसमें भगवान विष्णु की भक्ति करते हुए उसे कामदेव को पराजित किए जाने का घमंड हो जाता है। बाद में भगवान विष्णु ने मायावी नगरी बनाकर नारद को एक तरह से पराजित कर उसके गर्व का नाश किया। इसके अलावा रावण, विभीषण व कुंभकर्ण की शिवभक्ति से तीनों को मिले एक-एक वरदान का मंचन किया और मेघनाथ के जन्म पर खुशियों का मंचन किया।
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इस अवसर पर डॉ. दयानंद, सुशील शर्मा डिशवाला, बहल युवा एकता संगठन प्रधान योगेश शर्मा, शिव गोस्वामी, शिव भगासरा, विनोद जांगड़ा, अशोक साबू, सुभाष महमिया, संजय केडिया, मनोज श्योराण, प्रमोद सैनी उपस्थित रहे। संवाद
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रविवार रात नौ बजे रामलीला का शुभारंभ में थाना प्रभारी महेंद्र सिंह, मणी देवी, बहल युवा एकता संगठन के प्रधान योगेश शर्मा, कमल पातवानिया सहित अन्य अतिथियों ने गणेश वंदना की। मुख्यातिथि एसएचओ महेंद्र सिंह ने कहा कि रामलीला अपने आप में प्रेम, त्याग, वात्सल्य, कर्तव्यपरायणता, परोपकार और मानवता की रक्षा से जुड़ी एक संस्कार युक्त जीवन जीने की संपूर्ण कहानी है। रामकथा के मंचन से दर्शकों ने किसी एक पात्र की शिक्षाएं भी अपने जीवन में ग्रहण कर ली तो उसके जीवन से अनेक विकार दूर हो सकते हैं।
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रामलीला की शुरुआत नारद मोह से हुई, जिसमें भगवान विष्णु की भक्ति करते हुए उसे कामदेव को पराजित किए जाने का घमंड हो जाता है। बाद में भगवान विष्णु ने मायावी नगरी बनाकर नारद को एक तरह से पराजित कर उसके गर्व का नाश किया। इसके अलावा रावण, विभीषण व कुंभकर्ण की शिवभक्ति से तीनों को मिले एक-एक वरदान का मंचन किया और मेघनाथ के जन्म पर खुशियों का मंचन किया।
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इस अवसर पर डॉ. दयानंद, सुशील शर्मा डिशवाला, बहल युवा एकता संगठन प्रधान योगेश शर्मा, शिव गोस्वामी, शिव भगासरा, विनोद जांगड़ा, अशोक साबू, सुभाष महमिया, संजय केडिया, मनोज श्योराण, प्रमोद सैनी उपस्थित रहे। संवाद