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Bhiwani News: लुवास की 13 साल से जिला मुख्यालय पर चल रही पशु रोग जांच प्रयोगशाला के बहल स्थानांतरण की तैयारी
Mon, 07 Aug 2023 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 07 Aug 2023 11:16 PM IST
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भिवानी। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार (लुवास) की पिछले 13 सालों से पशु विज्ञान केंद्र भिवानी में स्थित पशु रोग जांच प्रयोगशाला को बहल स्थानांतरण करने की तैयारी हो चुकी है। कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र लोहारू के कस्बा बहल में हरियाणा पशु चिकित्सा केंद्र की शुरुआत की है।
इस केंद्र में भिवानी जिला मुख्यालय की पशु रोग जांच प्रयोगशाला को स्थानांतरित किए जाने के लुवास ने आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं जिला मुख्यालय से पशु रोग जांच प्रयोगशाला बहल भेजे जाने से भिवानी, चरखी दादरी के अलावा झज्जर जिले के कुछ गांवों के किसानों को दूध, गोबर, मूत्र की जांच और खनिज पदार्थों की खरीद के अलावा मृत पशुओं के पोस्टमार्टम के लिए 60 किलोमीटर दूर तक की दौड़ लगानी होगी। हालांकि कृषि मंत्री की घोषणा के बाद इस केंद्र की शुरुआत पांच अगस्त से गांव के पंचायत ज्ञान केंद्र के अंदर होनी थी, जबकि प्रयोगशाला के लिए खुद का नया भवन भी यहां नहीं बना है।
भिवानी में चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के तहत 1982 में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई थी। इसके बाद लुवास की स्थापना के बाद भिवानी में 2010 में लुवास के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर के अंदर ही पशु विज्ञान केंद्र की स्थापना हुई और इसी परिसर में लुवास की पशु रोग जांच प्रयोगशाला भी चल रही है। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला में हर साल भिवानी और चरखी दादरी जिलों से दूध की जांच के करीब एक हजार से अधिक सैंपल आते हैं, जबकि गोबर और मूत्र के भी करीब ढाई सौ सैंपल हर साल जांच होते हैं।
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इसके अलावा पशुओं के खून के नमूनों की जांच भी लैब में हो रही है। पशु रोग प्रयोगशाला में सुअर, मुर्गा, भेड़-बकरी के पोस्टमार्टम की सुविधा भी पशुपालकों के लिए यहां है। पशु विज्ञान केंद्र में हर महीने करीब 70 हजार रुपये के खनिज मिश्रण बिक्री भी किए जाते हैं। ये सुविधा सिर्फ भिवानी जिला मुख्यालय पर ही है, अन्यथा किसानों को लुवास हिसार से पहले ये खनिज मिश्रण लाने पड़ते थे।
मगर अब जिला मुख्यालय के पशु विज्ञान केंद्र की प्रयोगशाला पर ही संकट आ गया है। क्योंकि लुवास ने पशु प्रयोगशाला को बहल स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद प्रयोगशाला के सभी उपकरण और यहां तैनात सभी कर्मचारियों को बहल भेजा जाएगा। इसके बाद जिला मुख्यालय पर पशु पालकों को प्रयोगशाला से जुड़ी कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
इन गांवों के किसानों के आते हैं सबसे अधिक जांच के सैंपल
भिवानी पशु रोग जांच प्रयोगशाला में तिगड़ाना, तालू, धनाना, मिताथल, दिनोद, बीरन, कितलाना, चांग, नाथुवास, प्रहलादगढ़, बवानीखेड़ा क्षेत्र के कुंगड़, भैणी, सोरखी, तोशाम क्षेत्र के गांव सागवान, जाटूलुहारी से सैंपल जांच के लिए यहां आते हैं। इसके अलावा चरखी दादरी जिले के सभी गांवों में पशुओं से जुड़ी जांच इसी प्रयोगशाला में होती है। कुछ झज्जर के गांव के लोग भी यहां नजदीकी लैब होने की वजह से आते हैं।
सालभर बेरोजगार युवा व युवतियां लेते हैं पशु पालन से जुड़े प्रशिक्षण
लुवास के इस केंद्र में सालभर बेरोजगार युवा व युवतियों को पशु पालन में डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, सुअर पालन से जुड़े प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के बाद ये युवा पशु पालन से जुड़े व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाते हैं। इसके लिए लुवास की तरफ से इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाता है और खनिज मिश्रण भी मिलते हैं।
लुवास का बहल में हरियाणा पशु चिकित्सा केंद्र खुलने जा रहा है। इसमें किसानों को पशुओं से जुड़ी बीमारियों के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ेगा। ये केंद्र बहल क्षेत्र के पशुपालकों की सुविधा के लिए है। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला को यहां स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। अगर यूनिवर्सिटी ने किसी असमंजस में ऐसा आदेश किया है तो इस संबंध में बात करेंगे। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला वहीं पर रहेगी।
- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार।
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इस केंद्र में भिवानी जिला मुख्यालय की पशु रोग जांच प्रयोगशाला को स्थानांतरित किए जाने के लुवास ने आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं जिला मुख्यालय से पशु रोग जांच प्रयोगशाला बहल भेजे जाने से भिवानी, चरखी दादरी के अलावा झज्जर जिले के कुछ गांवों के किसानों को दूध, गोबर, मूत्र की जांच और खनिज पदार्थों की खरीद के अलावा मृत पशुओं के पोस्टमार्टम के लिए 60 किलोमीटर दूर तक की दौड़ लगानी होगी। हालांकि कृषि मंत्री की घोषणा के बाद इस केंद्र की शुरुआत पांच अगस्त से गांव के पंचायत ज्ञान केंद्र के अंदर होनी थी, जबकि प्रयोगशाला के लिए खुद का नया भवन भी यहां नहीं बना है।
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भिवानी में चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के तहत 1982 में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई थी। इसके बाद लुवास की स्थापना के बाद भिवानी में 2010 में लुवास के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर के अंदर ही पशु विज्ञान केंद्र की स्थापना हुई और इसी परिसर में लुवास की पशु रोग जांच प्रयोगशाला भी चल रही है। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला में हर साल भिवानी और चरखी दादरी जिलों से दूध की जांच के करीब एक हजार से अधिक सैंपल आते हैं, जबकि गोबर और मूत्र के भी करीब ढाई सौ सैंपल हर साल जांच होते हैं।
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इसके अलावा पशुओं के खून के नमूनों की जांच भी लैब में हो रही है। पशु रोग प्रयोगशाला में सुअर, मुर्गा, भेड़-बकरी के पोस्टमार्टम की सुविधा भी पशुपालकों के लिए यहां है। पशु विज्ञान केंद्र में हर महीने करीब 70 हजार रुपये के खनिज मिश्रण बिक्री भी किए जाते हैं। ये सुविधा सिर्फ भिवानी जिला मुख्यालय पर ही है, अन्यथा किसानों को लुवास हिसार से पहले ये खनिज मिश्रण लाने पड़ते थे।
मगर अब जिला मुख्यालय के पशु विज्ञान केंद्र की प्रयोगशाला पर ही संकट आ गया है। क्योंकि लुवास ने पशु प्रयोगशाला को बहल स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद प्रयोगशाला के सभी उपकरण और यहां तैनात सभी कर्मचारियों को बहल भेजा जाएगा। इसके बाद जिला मुख्यालय पर पशु पालकों को प्रयोगशाला से जुड़ी कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
इन गांवों के किसानों के आते हैं सबसे अधिक जांच के सैंपल
भिवानी पशु रोग जांच प्रयोगशाला में तिगड़ाना, तालू, धनाना, मिताथल, दिनोद, बीरन, कितलाना, चांग, नाथुवास, प्रहलादगढ़, बवानीखेड़ा क्षेत्र के कुंगड़, भैणी, सोरखी, तोशाम क्षेत्र के गांव सागवान, जाटूलुहारी से सैंपल जांच के लिए यहां आते हैं। इसके अलावा चरखी दादरी जिले के सभी गांवों में पशुओं से जुड़ी जांच इसी प्रयोगशाला में होती है। कुछ झज्जर के गांव के लोग भी यहां नजदीकी लैब होने की वजह से आते हैं।
सालभर बेरोजगार युवा व युवतियां लेते हैं पशु पालन से जुड़े प्रशिक्षण
लुवास के इस केंद्र में सालभर बेरोजगार युवा व युवतियों को पशु पालन में डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, सुअर पालन से जुड़े प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के बाद ये युवा पशु पालन से जुड़े व्यवसाय अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाते हैं। इसके लिए लुवास की तरफ से इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाता है और खनिज मिश्रण भी मिलते हैं।
लुवास का बहल में हरियाणा पशु चिकित्सा केंद्र खुलने जा रहा है। इसमें किसानों को पशुओं से जुड़ी बीमारियों के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ेगा। ये केंद्र बहल क्षेत्र के पशुपालकों की सुविधा के लिए है। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला को यहां स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। अगर यूनिवर्सिटी ने किसी असमंजस में ऐसा आदेश किया है तो इस संबंध में बात करेंगे। भिवानी की पशु रोग जांच प्रयोगशाला वहीं पर रहेगी।
- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार।