{"_id":"60dcb9ee8ebc3ebf4a338556","slug":"people-trouble-for-property-id-bhiwani-news-rtk6154618108","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहरी दायरे की अधिकृत संपत्ति, फिर भी नप से नहीं मिल रही पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहरी दायरे की अधिकृत संपत्ति, फिर भी नप से नहीं मिल रही पहचान
विज्ञापन
नगर परिषद कार्यालय की पीआईडी व टैक्स ब्रांच में लगी लोगों की भीड़। संवाद
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। शहरी दायरे की अधिकृत संपत्ति को भी नगर परिषद से पॉपर्टी आईडी (पीआईडी) की पहचान नहीं मिल रही है। लोग सुबह से शाम तक चक्कर लगा रहे हैं। कभी अधिकारी तो कभी कोई कर्मचारी नहीं मिलते हैं।
नगर परिषद पीआईडी को लेकर खुद ही नियमों में उलझा हुआ है। पहले नौ अधिकारियों की रिपोर्ट में व्यवस्था गड़बड़ा गई, अब छह अधिकारियों की रिपोर्ट में भी पीआईडी बनाने की गाड़ी पटरी पर नहीं आ रही है। लाखों रुपयों का बजट खर्च कर शहरी दायरे की संपत्ति पहचान के लिए दो बार सर्वेक्षण का कार्य भी कराया जा चुका है। दोनों ही सर्वे कंपनियों की रिपोर्ट भी नप के समक्ष आ चुकी है। फिर भी पीआईडी के लिए शहरवासियों की राह आसान नहीं हुई है।
शहर के सभी 31 वार्डों में हरसत कंपनी ने अक्तूबर 2017 में संपत्ति पहचान के लिए सर्वे किया था। कंपनी ने रिपोर्ट भी नप को सौंप दी थी, जिसमें करीब 75 हजार से अधिक शहरी दायरे की संपत्ति की पहचान हुई थी। मगर शहरी निकाय विभाग ने फरवरी 2020 में यासी कंपनी से फिर प्रॉपर्टी सर्वे कराया। जिसकी रिपोर्ट में शहरी दायरे के अंदर 77560 संपत्तियों की पहचान की गई। मगर इन सभी संपत्ति मालिकों को नगर परिषद से पीआईडी जारी नहीं हो पाई। नप अधिकारियों का कहना है कि पीआईडी खोले जाने के बाद अब तक नगर परिषद के समक्ष 101 आवेदन आए हैं, जिसमें से 48 की रिपोर्ट हो चुकी है। पार्षद भी पीआईडी की व्यवस्था को लेकर नाराज हैं। महिला पार्षद का कहना है कि शहर की सबसे बड़ी बैंक कॉलोनी जो तीन वार्डों में बंटी है, मगर एक भी पीआईडी नहीं बनी है। पीआईडी बनवाने और उसकी त्रुटी को ठीक कराने के लिए लोग भी इधर उधर चक्कर लगा रहे हैं। (संवाद)
विज्ञापन
यह बोले पार्षद और परेशान नागरिक
पीआईडी नहीं बनने से लोगों के जरूरी काम भी अटके हुए हैं। हमारे समक्ष लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं, लेकिन यहां न तो पार्षदों की कोई सुन रहा है न ही जनता के काम हो रहे हैं। हम खुद इस मामले को लेकर डीसी से भी मिल चुके हैं। फिर भी पीआईडी की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
-बलवान सिंह, पार्षद, वार्ड 31
सुबह घर पर उठने से पहले ही लोग पहुंच जाते हैं। उनके साथ पीआईडी बनवाने नप कार्यालय आते हैं। एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच के चक्कर लगाते रहते हैं, मगर काम नहीं होते। पीआईडी बनवाने के लिए सभी दस्तावेज पूरे होने और टैक्स की रसीद होने के बावजूद पीआईडी नहीं बन रही है।
-पवन मस्ता, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड 28
मैं पिछले एक सप्ताह से पीआईडी के लिए चक्कर लगा रहा हूं। मैंने लगभग सभी शाखाओं से रिपोर्ट भी करा ली है, मगर ईओ के हस्ताक्षर नहीं हो रहे हैं। जब तक ईओ हस्ताक्षर नहीं करेंगे, पीआईडी जारी नहीं होगी। मेरा काफी महत्वपूर्ण काम इसी दस्तावेज की वजह से अटका हुआ है, मानसिक परेशानी भी झेल रहा हूं।
-अनिल कुमार, शहरवासी।
नगर परिषद और प्रशासन रोहतक गेट तक ही अधिकृत क्षेत्र मान रहा है, जबकि रोहतक रोड पर बैंक कॉलोनी शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी है। यह तीन वार्डों में बंटी है। मगर इसमें एक भी पीआईडी नहीं बन रही है। यहां के लोग टैक्स भरते हैं और कॉलोनी का दायरा भी अधिकृत है। मैं खुद बैठक और प्रशासन के समक्ष ये मुद्दा उठा चुकी हूं, मगर कोई समाधान नहीं हुआ है।
-रेखा राघव, पार्षद, वार्ड 10
पीआईडी को लेकर व्यवस्था आसान की है। छह अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद जेई की टीम मौका मुआयना करेगी, जिसके बाद ही मेरे हस्ताक्षर होंगे। अगर पीआईडी के दस्तावेज या फिर किसी शाखा से नो ड्यूज नहीं मिला है तो पीआईडी नहीं बनेगी। अधिकृत दायरे में पीआईडी बनाई जा रही हैं।
- संजय यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
पहले नौ शाखाओं की रिपोर्ट पीआईडी के लिए मुख्यालय ने अनिवार्य की थी, मगर हमने छह शाखाओं के नो ड्यूज के बाद ही पीआईडी जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित कराई थी। लाल डोरा के अंदर की पीआईडी बन रही हैं, अगर किसी को कोई दिक्कत आती है तो उसे भी दूर कराएंगे।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी।
विज्ञापन
भिवानी। शहरी दायरे की अधिकृत संपत्ति को भी नगर परिषद से पॉपर्टी आईडी (पीआईडी) की पहचान नहीं मिल रही है। लोग सुबह से शाम तक चक्कर लगा रहे हैं। कभी अधिकारी तो कभी कोई कर्मचारी नहीं मिलते हैं।
नगर परिषद पीआईडी को लेकर खुद ही नियमों में उलझा हुआ है। पहले नौ अधिकारियों की रिपोर्ट में व्यवस्था गड़बड़ा गई, अब छह अधिकारियों की रिपोर्ट में भी पीआईडी बनाने की गाड़ी पटरी पर नहीं आ रही है। लाखों रुपयों का बजट खर्च कर शहरी दायरे की संपत्ति पहचान के लिए दो बार सर्वेक्षण का कार्य भी कराया जा चुका है। दोनों ही सर्वे कंपनियों की रिपोर्ट भी नप के समक्ष आ चुकी है। फिर भी पीआईडी के लिए शहरवासियों की राह आसान नहीं हुई है।
विज्ञापन
शहर के सभी 31 वार्डों में हरसत कंपनी ने अक्तूबर 2017 में संपत्ति पहचान के लिए सर्वे किया था। कंपनी ने रिपोर्ट भी नप को सौंप दी थी, जिसमें करीब 75 हजार से अधिक शहरी दायरे की संपत्ति की पहचान हुई थी। मगर शहरी निकाय विभाग ने फरवरी 2020 में यासी कंपनी से फिर प्रॉपर्टी सर्वे कराया। जिसकी रिपोर्ट में शहरी दायरे के अंदर 77560 संपत्तियों की पहचान की गई। मगर इन सभी संपत्ति मालिकों को नगर परिषद से पीआईडी जारी नहीं हो पाई। नप अधिकारियों का कहना है कि पीआईडी खोले जाने के बाद अब तक नगर परिषद के समक्ष 101 आवेदन आए हैं, जिसमें से 48 की रिपोर्ट हो चुकी है। पार्षद भी पीआईडी की व्यवस्था को लेकर नाराज हैं। महिला पार्षद का कहना है कि शहर की सबसे बड़ी बैंक कॉलोनी जो तीन वार्डों में बंटी है, मगर एक भी पीआईडी नहीं बनी है। पीआईडी बनवाने और उसकी त्रुटी को ठीक कराने के लिए लोग भी इधर उधर चक्कर लगा रहे हैं। (संवाद)
विज्ञापन
यह बोले पार्षद और परेशान नागरिक
पीआईडी नहीं बनने से लोगों के जरूरी काम भी अटके हुए हैं। हमारे समक्ष लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं, लेकिन यहां न तो पार्षदों की कोई सुन रहा है न ही जनता के काम हो रहे हैं। हम खुद इस मामले को लेकर डीसी से भी मिल चुके हैं। फिर भी पीआईडी की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
-बलवान सिंह, पार्षद, वार्ड 31
सुबह घर पर उठने से पहले ही लोग पहुंच जाते हैं। उनके साथ पीआईडी बनवाने नप कार्यालय आते हैं। एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच के चक्कर लगाते रहते हैं, मगर काम नहीं होते। पीआईडी बनवाने के लिए सभी दस्तावेज पूरे होने और टैक्स की रसीद होने के बावजूद पीआईडी नहीं बन रही है।
-पवन मस्ता, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड 28
मैं पिछले एक सप्ताह से पीआईडी के लिए चक्कर लगा रहा हूं। मैंने लगभग सभी शाखाओं से रिपोर्ट भी करा ली है, मगर ईओ के हस्ताक्षर नहीं हो रहे हैं। जब तक ईओ हस्ताक्षर नहीं करेंगे, पीआईडी जारी नहीं होगी। मेरा काफी महत्वपूर्ण काम इसी दस्तावेज की वजह से अटका हुआ है, मानसिक परेशानी भी झेल रहा हूं।
-अनिल कुमार, शहरवासी।
नगर परिषद और प्रशासन रोहतक गेट तक ही अधिकृत क्षेत्र मान रहा है, जबकि रोहतक रोड पर बैंक कॉलोनी शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी है। यह तीन वार्डों में बंटी है। मगर इसमें एक भी पीआईडी नहीं बन रही है। यहां के लोग टैक्स भरते हैं और कॉलोनी का दायरा भी अधिकृत है। मैं खुद बैठक और प्रशासन के समक्ष ये मुद्दा उठा चुकी हूं, मगर कोई समाधान नहीं हुआ है।
-रेखा राघव, पार्षद, वार्ड 10
पीआईडी को लेकर व्यवस्था आसान की है। छह अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद जेई की टीम मौका मुआयना करेगी, जिसके बाद ही मेरे हस्ताक्षर होंगे। अगर पीआईडी के दस्तावेज या फिर किसी शाखा से नो ड्यूज नहीं मिला है तो पीआईडी नहीं बनेगी। अधिकृत दायरे में पीआईडी बनाई जा रही हैं।
- संजय यादव, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
पहले नौ शाखाओं की रिपोर्ट पीआईडी के लिए मुख्यालय ने अनिवार्य की थी, मगर हमने छह शाखाओं के नो ड्यूज के बाद ही पीआईडी जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित कराई थी। लाल डोरा के अंदर की पीआईडी बन रही हैं, अगर किसी को कोई दिक्कत आती है तो उसे भी दूर कराएंगे।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी।