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दर्दनाक : नए साल के पहले दिन लोगों पर टूटा दुखों का पहाड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 01:03 AM IST
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Painful : On the first day of the new year, a mountain of sorrows broke on the people
डाडम में हुए हादसे की जगह पहुंचे कमिश्नर पंकज यादव घटना की जानकारी लेते हुए। संवाद - फोटो : Bhiwani
आदेश चौधरी
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भिवानी। नए साल पर हर कोई अपने सगे संबंधियों और चाहने वालों को बधाई संदेश दे रहा था। बधाई संदेशों का यह सिलसिला शुक्रवार शाम से ही शुरू हो गया था, जो सुबह 10 बजे तक जारी रहा। उसके बाद डाडम में पहाड़ खिसकने का समाचार आया और बधाई संदेशों की बजाय लोगों ने इस घटना पर दुख जताना शुरू कर दिया। इसने बड़े हादसे से लोग स्तब्ध थे।
सभी लोग हादसे में मारे गए लोगों की आत्मिक शांति और मलबे में दबे श्रमिकों की सलामती के लिए दुआ कर रहे थे। सोशल मीडिया पर दिनभर यही घटना चर्चा का विषय बनी रही। आमतौर पर कहा जाता है कि साल का पहला दिन अगर अच्छा गुजरे तो फिर पूरे साल अच्छी खबरें ही मिलती हैं। मगर 2022 का पहला दिन क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी दुर्घटना लेकर आया। डाडम में पहाड़ खिसक गया और प्रशासन के अनुसार तीन लोगों की मौत हो गई। हालांकि गृह मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर चार लोगों की मौत की जानकारी दी। तीन लोग घायल हैं और छह से आठ लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है। उनको मलबे से निकालने के लिए प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर प्रयास भी किए जा रहे हैं। अब लोग यह दुआ कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस तरह का कोई समाचार सुनने को न मिले। सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने घटना पर खेद जताया है और इसे दुखद करार दिया है। मृतक और घायलों के परिवारों को मुआवजा और चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मांग की है। वहीं मजदूर संगठनों ने इसमें नियमों की अनदेखी होने का आरोप लगाकर जांच की मांग की है।
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श्रम मंत्रालय करेगा जांच
डाडम का खनन क्षेत्र अरावली की पहाड़ियों में आता है। यहां पहाड़ दरकने की जांच केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइन सेफ्टी करेगा। अरावली पहाड़ियों का हरियाणा और राजस्थान वाला इलाका डीजीएमएस के नॉर्दर्न जोन के तहत आता है। इसका मुख्यालय गाजियाबाद में है। हरियाणा के माइनिंग एंड जियोलाजी डिपार्टमेंट ने डीजीएमएस को हादसे की जानकारी दे दी है।
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गाजियाबाद से आई टीम पता करेगी कैसे खिसका पहाड़
पहाड़ में खनन करने के लिए ब्लास्ट किए जाते हैं। इससे पत्थर टूट जाते हैं। फिर उन पत्थरों को जेसीबी की सहायता से डंपरों में भरकर क्रशर तक लाया जाता है। उसके बाद उनसे रोड़ी और क्रशर बनाया जाता है, जो भवन निर्माण सामग्री में प्रयोग होता है। कई बार खनन करने वाली फर्म ज्यादा पत्थर निकालने के लिए निर्धारित मात्रा से ज्यादा बारूद के साथ और ज्यादा गहराई में ब्लास्ट कर देती हैं। इससे भी पहाड़ खिसकने का खतरा बना रहता है। अब गाजियाबाद से आने वाली विशेष टीम यहां जांच करके पता लगाएगी कि यह पहाड़ अपने आप खिसका या फिर खनन के दौरान अन कंट्रोल्ड ब्लास्ट किया गया, जिसकी वजह से पत्थर गिरे।
गोवर्धन माइंस के पास है 10 साल का ठेका
मैसर्स गोवर्धन माइंस एंड मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने भिवानी जिले के डाडम एरिया में अरावली की पहाड़ियों में खनन का ठेका लिया हुआ है। कंपनी ने यह ठेका 2018 में 10 साल के लिए लिया था। भिवानी के माइनिंग अफसर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि लगभग दो महीने पहले प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर एनजीटी के आदेश पर माइनिंग और क्रशर को बंद कर दिया गया था। प्रदूषण के स्तर में कमी आने पर शुक्रवार 31 दिसंबर से एनजीटी ने क्रशर चलाने की अनुमति फिर से दे दी थी। क्रशर शुरू होने के दूसरे ही दिन यह हादसा हो गया।
लोगों को नहीं जाने दिया जाता अंदर
जैसे ही लोगों को पहाड़ खिसकने से हादसा होने का पता चला तो काफी संख्या में लोग डाडम खनन क्षेत्र की तरफ दौड़ पड़े। मगर खनन क्षेत्र जहां शुरू होता है, वहां पर फर्म के सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जिन्होंने लोगों को अंदर नहीं जाने दिया। लोगों का कहना था कि इतना बड़ा हादसा हो गया है, मगर सुरक्षाकर्मी उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहे। अगर वे लोग अंदर जाएंगे तो राहत कार्यों में मदद भी कर पाएंगे।
राजनेताओं ने जताया हादसे पर शोक
सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने डाडम की घटना पर शोक व्यक्त किया है। देश के गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी नेता किरण चौधरी, पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी सहित अन्य कई नेताओं ने घटना पर दुख एवं गहरी संवेदनाएं जाहिर की हैं।
सरकार पर आरोपों के साथ ही राजनीति भी हुई शुरू
विपक्ष ने घटना पर दुख जाहिर करने के साथ ही सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए जांच की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रोहतक में पत्रकार वार्ता कर खानक और डाडम में हजारों करोड़ का घोटाला होने का अरोप लगाया है। वहीं दीपेंद्र हुड्डा ने भी मामले की जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग उठाई है। वहीं, किरण चौधरी ने कहा कि वह चार साल से खानक के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहीं हैं, मगर आज तक कोई जांच नहीं की गई।
राहत कार्य प्राथमिकता, जांच कराई जाएगी : जेपी दलाल
प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने डाडम में पहुंचकर हालात का जायजा लिया और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता वहां फंसे लोगों को रेस्क्यू करने की है। हादसा होने के कारणों की जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि अगर राहत कार्य में किसी भी प्रकार की आवश्यकता होती है तो वे उपलब्ध कराएंगे।
मलबा हटाने में लग सकते हैं दो दिन
पहाड़ गिरने के कारण बहुत ज्यादा पत्थर गिर गए हैं और वाहन मलबे में दब गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को इसके लिए तैनात किया गया है। मगर मलबा इतना ज्यादा है कि इसको पूरी तरह हटाने में दो दिन भी लग सकते हैं।
डीसी और एसपी लेते रहे हर मिनट की अपडेट
उपायुक्त रिपुदमन सिंह और पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह देर रात तक डाडम में ही डटे रहे। अधिकारियों से बचाव और राहत कार्यों की हर एक मिनट की अपडेट लगातार लेते रहे। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की कोई कमी न रहे। (संवाद)

हर पहलू पर होगी जांच
जिला प्रशासन पूरी तरह से बचाव कार्य में लगा हुआ है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आर्मी और स्थानीय प्रशासन की टीमें युद्ध स्तर पर मलबा हटाने में लगी हुई हैं। उम्मीद है कि जल्द ही मलबा हटा दिया जाएगा। साथ ही यह उम्मीद भी करते हैं कि मलबे मे अगर कोई दबा है तो वह सकुशल बाहर निकाला जाए। मामले की हर पहलू से जांच की जाए। मगर फिलहाल हमारी प्राथमिकता बचाव कार्य है।
- अजीत सिंह शेखावत, एसपी भिवानी।

डाडम पहाड़ में भारी पत्थर को तोड़कर नीचे दबे लोगों को निकालने का काम शुरू करते हुए कर्मचारी। संवा

डाडम पहाड़ में भारी पत्थर को तोड़कर नीचे दबे लोगों को निकालने का काम शुरू करते हुए कर्मचारी। संवा- फोटो : Bhiwani

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