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Bhiwani News: नागरिक अस्पताल के प्लांट रखरखाव में हर तीन माह में दस लाख का खर्च, सिलिंडर के सहारे चल रही मरीजों की ऑक्सीजन

Sun, 25 Aug 2024 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 25 Aug 2024 01:01 AM IST
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One million rupees spent every three months in plant maintenance of Civil Hospital, oxygen to patients is running with the help of cylinders
भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट के मेंटनेंस यानी रखरखाव पर ही हर तीन माह में स्वास्थ्य विभाग को करीब दस लाख का खर्च झेलना पड़ता है, जबकि बेड पर मरीजों की ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे ही चल रही है। कोविड संक्रमण के दौरान जिला नागरिक अस्पताल में एक हजार लीटर प्रति घंटा क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया था।
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इस प्लांट को अब स्वास्थ्य विभाग आंशिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इसकी वजह यह है कि सिलिंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति प्लांट के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है। इतना ही नहीं जिला नागरिक अस्पताल के सभी दस वार्डों में भी हर बेड तक ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है। अस्पताल के स्पेशल वार्डों में भी सिलिंडर के सहारे ही मरीज को ऑक्सीजन की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
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जिला नागरिक अस्पताल में कोरोना संक्रमण काल बीतने के तीन साल बाद भी ऑक्सीजन प्लांट को सभी वार्डों से पाइप लाइन के जरिए नहीं जोड़ा गया है। इसकी एक वजह तो यह भी है कि प्लांट से ऑक्सीजन पाने में ही स्वास्थ्य विभाग को हर तीन माह में करीब दस लाख रुपये का खर्च रखरखाव में ही झेलना पड़ता है। जबकि ऑक्सीजन सिलिंडरों के सहारे मरीज को ऑक्सीजन मुहैया कराना काफी सस्ता पड़ता है।
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ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी बेवजह के खर्च से बचने के लिए ऑक्सीजन प्लांट को आंशिक रूप से ही इस्तेमाल कर रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा टेंडर कराए गए ठेकेदार की ओर से ही ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति अस्पताल में दी जा रही है। जिन्हें ऑटोमेटिक पैनलों के सहारे पाइप लाइन के जरिये जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में आपूर्ति में प्रयोग किया जा रहा है। आपातकालीन विभाग में ही हर बेड तक ऑक्सीजन की पाइप लाइन है, जबकि वार्डों में अभी तक इसे नहीं जोड़ा गया है। इसके अलावा माइनर ओटी और ऑप्रेशन थियेटर तक भी ऑक्सीजन की पाइप लाइन दी गई है।



जिला नागरिक अस्पताल में कोविड के दौरान ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। इस प्लांट के रखरखाव का खर्च हर तिमाही दस लाख आ रहा है। इस वजह से इसका आंशिक इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि सिलिंडर से ऑक्सीजन मुहैया कराना काफी सस्ता पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन सिलिंडरों की सप्लाई के लिए टेंडर किया हुआ है। अस्पताल में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। जबकि अस्पताल के वार्डों तक ऑक्सीजन की पाइप लाइन डालना अभी प्रस्तावित है।
- डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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