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Bhiwani News: अब महाग्राम योजना में भूमि की वजह से अटका काम, अधिकांश गांवों की पंचायती भूमि पर हो चुके हैं अवैध कब्जे

Sat, 27 Jul 2024 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 27 Jul 2024 11:08 PM IST
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Now the work in Mahagram Yojana is stuck due to land, Panchayat land of most of the villages has been illegally encroached upon.
भिवानी। अब महाग्राम योजना में भूमि की वजह से कई गांवों में काम अटक गया है। जबकि गांव बापोड़ा और धनाना में महाग्राम योजना के तहत पानी और सीवर की नई लाइनें डालने का रास्ता भी साफ हो गया है। इसके लिए सरकार से अब बजट की डिमांड भेजी गई है। जबकि अधिकांश गांवों में पंचायती भूमि पर अवैध कब्जों की वजह से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को अभी तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण व पानी निकासी की व्यवस्था कराने के लिए जगह तक नहीं मुहैया कराई गई है।
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जिले में दस हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को हरियाणा सरकार ने महाग्राम योजना में शामिल किया है। जिन गांवों के अंदर ग्रामीणों को शहरी तर्ज पर पानी और सीवर लाइन की सुविधा मिलेगी। इसके लिए सरकार ने इन गांवों में करोड़ों के बजट खर्च का भी प्रावधान किया है। भिवानी जिले में लगभग बड़े गांवों को महाग्राम योजना में शामिल किया जा चुका है। जिसमें तोशाम, बहल की बड़ी ग्राम पंचायतें भी शामिल हैं। इसके अलावा गांव बापोड़ा, देवसर,दिनोद, धनाना, तिगड़ाना, चांग, खरककलां, बामला, कलिंगा को भी महाग्राम योजना में शामिल किया जा चुका है।
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जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने इन गांवों की ग्राम पंचायतों से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण व पानी के टैंक बनाए जाने सहित नई सीवर लाइन और पाइप लाइन डालने के लिए जगह का मसौदा मांगा हुआ है। इन गांवों में अधिकांश ग्राम पंचायतों की तरफ से भूमि का सहमति प्रस्ताव जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के समक्ष भेजा जा चुका है। लेकिन जब सर्वेक्षण के बाद धरातल पर स्थिति जांची गई तो अधिकांश जगहों पर तो अवैध कब्जे लोगों ने जमा रखे हैं। जबकि कई गांवों के पास तो खुद की पंचायत भूमि ही नहीं हैं। इनमें इकलौता गांव देवसर है। इसके पास अभी तक कोई पंचायती भूमि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सौंपी गई है। जबकि गांव धनाना और बापोड़ा के पहले से बने जलघरों के पास ग्राम पंचायत की पर्याप्त भूमि हैं, जहां पर महाग्राम योजना में अधिकारी काम शुरू करा सकते हैं।
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वहीं गांव कलिंगा में भी पंचायती भूमि को लेकर संकट बना है। गांव कलिंगा भी तीन पंचायतों का बड़ा गांव हैं, मगर अभी तक जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पास महाग्राम योजना में भूमि नहीं दी गई है। कलिंगा बरसाती जलभराव झेलने वाला गांव भी है, जहां हर साल आबादी का इलाका और खेत बारिश के पानी में डूब जाते हैं। हालांकि यहां सिंचाई विभाग अलग से बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था कराने की योजना पर काम कर रहे हैं, मगर गांव की आबादी से गंदे पानी की निकासी और इसके ट्रीटमेंट के लिए अलग से प्लांट तैयार किए जाने का मसौदा अभी प्रस्तावित है।

जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को कहीं पांच तो कहीं दस एकड़ भूमि की दरकार
महाग्राम योजना में शामिल होने वाले गांवों में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को कहीं पांच एकड़ तो कहीं पर दस एकड़ भूमि की दरकार बनी है। विभागीय अधिकारियों को महाग्राम योजना में शामिल गांवों में जलघर के अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करना है फिर इस गंदे पानी की निकासी भी खेतों में सिंचाई के लिए करानी है। ऐसे में जिन गांवों में पहले से ही जलघर मात्र दो से तीन एकड़ की भूमि पर बने हैं, वहां अब भूमि का संकट पैदा हो गया है। जबकि कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां पहले से ही काफी भूमि जलघर के पास मौजूद हैं। इनमें गांव बापोड़ा शामिल हैं, जहां करीब 26 एकड़ से अधिक भूमि में जलघर परिसर फैला है।
महाग्राम योजना में हमारी डिविजन के तीन गांव शामिल हैं, जिनमें बापोड़ा, देवसर और दिनोद है। बापोड़ा में महाग्राम योजना के तहत पर्याप्त जगह मुहैया है जबकि गांव देवसर और दिनोद की तरफ से अभी भूमि को लेकर मामला अटका हुआ है। हमारा प्रयास है कि इन दोनों ग्राम पंचायतों की ओर से पर्याप्त भूमि मुहैया कराए जाने के बाद सरकार के समक्ष बजट की डिमांड भेज दी जाएगी। जैसे ही मंजूरी मिलेगी काम शुरू करा देंगे।

- सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवान।
मेरी डिविजन में छह गांव महाग्राम योजना में शामिल किए गए हैं। इनमें धनाना, तिगड़ाना, चांग, खरककलां, बामला, कलिंगा शामिल है। धनाना में महाग्राम योजना के तहत सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसके बाद मुख्यालय से बजट की डिमांड भेजी गई है। अन्य गांवों में भी महाग्राम योजना के तहत अभी प्रक्रिया चल रही है। इन सभी गांवों में सर्वेक्षण का काम हो चुका है।
-सुर्यकांत, कार्यकारी अभियंता, शहरी पेयजल शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भिवानी।
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