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Bhiwani News: अब पाठ्यक्रम पुस्तकों की निजी स्कूल अभिभावकों को थमा रहे सूची, एनसीईआरटी की पुस्तक लगाने में नहीं रुचि

Fri, 05 Apr 2024 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 05 Apr 2024 11:05 PM IST
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Now private schools are handing over the list of curriculum books to parents, not interested in including NCERT books.
भिवानी। ये लो सूची, उस दुकान पर किताबें मिलेंगी, कुछ किताबें हम आपके बच्चे को स्कूल के अंदर से ही देंगे, इसका भुगतान आपको करना पड़ेगा। ये बातें अभिभावकों को स्कूल के अंदर पाठ्यक्रम की पुस्तकों की सूची थमाकर बोली जा रही हैं। दरअसल दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पाठ्यक्रम में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की स्कूलों द्वारा लगाई जा रही हैं। जबकि नियम के अनुसार एनसीईआरटी की पुस्तक लगाने की तरफ निजी स्कूलों का रुझान बहुत कम है।
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निजी प्रकाशकों की ये पुस्तकें कमीशन के खेल से जुड़ी हैं, जिसकी वजह से इनके दाम भी एनसीईआरटी पुस्तकों से कई गुना ज्यादा वसूले जा रहे हैं। वहीं निजी स्कूलों की मनमानी के आगे शिक्षा अधिकारी भी अभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से कक्षा पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं और नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ बस्ते का बोझ भी निर्धारित किया हुआ है। इस निर्धारित वजन से अधिक बच्चे की पीठ पर बोझ नहीं लादा जा सकता है।
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इसकी जांच के लिए बाकायदा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई हुई है। इसका काम निजी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर बच्चों के बस्ते के अंदर पढ़ाई जा रही पुस्तकों की जांच करना भी है। अगर निजी प्रकाशकों की स्कूल के अंदर पुस्तकें मिलती है तो इसका स्पष्टीकरण भी उस स्कूल से मांगा जाता है फिर उस पर कार्रवाई भी बनती है। मगर यहां अभिभावक स्कूल द्वारा थमाई सूची लेकर चुनिंदा दुकानों के आगे लगी भीड़ में खड़े होकर अपनी जेब ढीली करा रहे हैं।
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पुस्तक विक्रेताओं से भी हो रही स्कूलों की सांठगांठ
कुछ निजी स्कूलों की पुस्तक विक्रेताओं से भी सांठगांठ हो गई है। इसके बाद बच्चों के अभिभावकों को थमाई गई किताबों की सूची में दर्शायी गई किताबें भी किसी अन्य पुस्तक विक्रेता के पास नहीं मिल रही हैं, मजबूरी में अभिभावक को उसी दुकान से पुस्तकें खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है, जिसका नाम स्कूल ने सुझाया था। ऐसे में कमीशनखोरी और सीना जोरी से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। अभिभावकों को एक कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की सभी पुस्तकें किसी भी पुस्तक विक्रेता से मात्र 600 से 700 रुपये के साधारण मूल्य पर खरीद सकता है, मगर चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की थमाई गई सूची में शामिल निजी प्रकाशकों की किताबें तीन से चार हजार रुपये में दी जा रही हैं।

विरोध जताने पर अभिभावकों को दिया जा रहा ये तर्क
कुछ अभिभावक जब महंगी पुस्तकें खरीद करने पर विरोध जताते हैं तो उन्हें यह तर्क दिया जा रहा है कि ये पुस्तकें आपके बच्चे के लिए फायदेमंद रहेंगी, इन पुस्तकों में कुछ एक्सट्रा और रोचक तथ्य और जानकारी हैं जिन्हें बच्चा आसानी से पढ़ेगा और जल्दी सीखेगा। जबकि एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम पूरे रिसर्च और बच्चों के मनोस्थिति और उनके भविष्य को देखते हुए ही तैयार किया जाता है। निजी प्रकाश इन्हीं पुस्तकों की चीजों को तोड़ मरोड़ कर खुद की पुस्तकें बाजार में उतार कमीशनखोरी का काला धंधा स्कूल से मिलकर चलाते हैं।


ये निर्धारित किया हुआ है शिक्षा विभाग ने बस्ते का बोझ
कक्षा- बस्ते का वजन
पहली से दूसरी डेढ़ किलोग्राम
तीसरी से पांचवीं दो से तीन किलोग्राम
छठी से सातवीं चार किलोग्राम
आठवीं से नौवीं साढ़े चार किलोग्राम
दसवीं- पांच किलोग्राम
सभी प्राइवेट स्कूलों के अंदर सभी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों को पढ़ाए जाने संबंधी सख्त हिदायतें हैं। प्राइवेट स्कूलों का निरीक्षण भी किया जाएगा, अगर इस दौरान किसी बच्चे के बस्ते के अंदर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें मिलती हैं तो संबंधित विद्यालय को नोटिस देकर उससे जवाब तलब होगा। कोई भी निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं लगा सकता है। अगर इस संबंध में कोई शिकायत मिलती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- नरेश महता, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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