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Bhiwani News: अब ते में फसल बिक्री की राशि आते ही किसान होंगे बीपीएल सूची से बाहर
Fri, 17 Apr 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:55 AM IST
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भिवानी की अनाज मंडी में खुले आसमान के निचे रखे गेहूं के ढेर।
भिवानी। अब धरतीपुत्र पर परिवार पहचान पत्र में साझा की गई जानकारी भारी पड़ने वाली है। अगर किसान के खाते में फसल बिक्री की एक लाख 80 हजार से अधिक की राशि डाली गई तो बीपीएल सूची से नाम बाहर हो जाएगा। दरअसल कई किसानों की आमदनी परिवार पहचान पत्र में एक लाख से भी कम दिखाई गई है, ऐसे किसानों को बीपीएल की श्रेणी में रखा गया है। मगर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के हिसाब से दर्ज कराई गई फसल मंडी में लाकर बेचने पर भुगतान बैंक खाता में हुआ तो बीपीएल सूची से बाहर होना निश्चित है।
इसी चिंता में कई किसानों ने अपनी सरसों भी सरकार को नहीं बेची क्योंकि इसका भुगतान खाता में किया जाना था। प्राइवेट बोली पर आढ़तियों ने किसानों की सरसों बेची और उसका नगद भुगतान भी हाथों-हाथ करा डाला। जिसका बैंक खाता में कोई जिक्र या रिकॉर्ड तक दर्ज नहीं हुआ।
परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से सभी परिवारों को जोड़कर उनकी सालाना आमदनी सत्यापित की जा रही है। ऐसे में किसान इनदिनों मंडियों में अपनी फसल बिक्री की चिंता में हैं। किसान को इस बात की चिंता भी सता रही है कि अगर सरकार को उसने अपनी फसल बेची तो खाता में राशि भुगतान होते ही बीपीएल कार्ड पर संकट आ जाएगा। दरअसल भिवानी जिले में 75 हजार से अधिक पंजीकृत किसान हैं। जिनका मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का रकबा भी दर्ज किया हुआ है। ये किसान रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं, सरसों लेकर ही मंडी आ रहे हैं। एमएसपी के हिसाब से किसानों को उनकी फसलों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाता में ही दिया जा रहा है। हालांकि कुछ किसान आढ़तियों के माध्यम से प्राइवेट बोली पर फसल बेच रहे हैं उन्हें नकद भुगतान भी हो रहा है। संवाद
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परिवार पहचान पत्र की समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय पर काट रहे लोग चक्कर
परिवार पहचान पत्र में आमदनी से जुड़े अधिकांश मामलों को लेकर रोजाना ही लोग जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं। मानव सूचना एवं संसाधन विभाग के पास रोजाना करीब 700 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं इनमें ज्यादातर परिवार की आमदनी को लेकर दी जा रही हैं। हालांकि सत्यापन के बावजूद इन परिवारों को राहत नहीं दी जा रही है। अधिकारी कभी आधार कार्ड तो कभी किसी परिवार सदस्य की आमदनी को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि परिवार के छोटे बच्चों की आमदनी भी दर्शायी जा रही है जो अभी ठीक से स्कूल जाना भी शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में परिवार पहचान पत्र की गलतियों की भरमार है और लोगों की परेशानी का कोई ठिकाना नहीं है।
सभी परिवारों का परिवार पहचान पत्र से जुड़ा डाटा अन्य विभागों से अपडेट किया जा रहा है। इसमें किसान भी शामिल हैं। अगर किसान मंडी में अपनी फसल की बिक्री कर खाता में एक लाख 80 हजार तक राशि का भुगतान कराता है तो उसका बीपीएल सूची से नाम बाहर हो जाएगा। परिवार पहचान पत्र से जुड़ी त्रुटियों को क्रीड की तरफ से दुरुस्त किया जा रहा है। कोई भी परिवार की अगर अपनी परिवार पहचान पत्र में गलती है तो उसे ठीक करा सकता है।
-साजिद, जिला समन्वयक, मानव सूचना एवं संसाधन विभाग, भिवानी।
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इसी चिंता में कई किसानों ने अपनी सरसों भी सरकार को नहीं बेची क्योंकि इसका भुगतान खाता में किया जाना था। प्राइवेट बोली पर आढ़तियों ने किसानों की सरसों बेची और उसका नगद भुगतान भी हाथों-हाथ करा डाला। जिसका बैंक खाता में कोई जिक्र या रिकॉर्ड तक दर्ज नहीं हुआ।
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परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से सभी परिवारों को जोड़कर उनकी सालाना आमदनी सत्यापित की जा रही है। ऐसे में किसान इनदिनों मंडियों में अपनी फसल बिक्री की चिंता में हैं। किसान को इस बात की चिंता भी सता रही है कि अगर सरकार को उसने अपनी फसल बेची तो खाता में राशि भुगतान होते ही बीपीएल कार्ड पर संकट आ जाएगा। दरअसल भिवानी जिले में 75 हजार से अधिक पंजीकृत किसान हैं। जिनका मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का रकबा भी दर्ज किया हुआ है। ये किसान रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं, सरसों लेकर ही मंडी आ रहे हैं। एमएसपी के हिसाब से किसानों को उनकी फसलों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाता में ही दिया जा रहा है। हालांकि कुछ किसान आढ़तियों के माध्यम से प्राइवेट बोली पर फसल बेच रहे हैं उन्हें नकद भुगतान भी हो रहा है। संवाद
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परिवार पहचान पत्र की समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय पर काट रहे लोग चक्कर
परिवार पहचान पत्र में आमदनी से जुड़े अधिकांश मामलों को लेकर रोजाना ही लोग जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं। मानव सूचना एवं संसाधन विभाग के पास रोजाना करीब 700 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं इनमें ज्यादातर परिवार की आमदनी को लेकर दी जा रही हैं। हालांकि सत्यापन के बावजूद इन परिवारों को राहत नहीं दी जा रही है। अधिकारी कभी आधार कार्ड तो कभी किसी परिवार सदस्य की आमदनी को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि परिवार के छोटे बच्चों की आमदनी भी दर्शायी जा रही है जो अभी ठीक से स्कूल जाना भी शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में परिवार पहचान पत्र की गलतियों की भरमार है और लोगों की परेशानी का कोई ठिकाना नहीं है।
सभी परिवारों का परिवार पहचान पत्र से जुड़ा डाटा अन्य विभागों से अपडेट किया जा रहा है। इसमें किसान भी शामिल हैं। अगर किसान मंडी में अपनी फसल की बिक्री कर खाता में एक लाख 80 हजार तक राशि का भुगतान कराता है तो उसका बीपीएल सूची से नाम बाहर हो जाएगा। परिवार पहचान पत्र से जुड़ी त्रुटियों को क्रीड की तरफ से दुरुस्त किया जा रहा है। कोई भी परिवार की अगर अपनी परिवार पहचान पत्र में गलती है तो उसे ठीक करा सकता है।
-साजिद, जिला समन्वयक, मानव सूचना एवं संसाधन विभाग, भिवानी।