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Bhiwani News: गर्मी में नहीं पीने का पानी, बारिश में जलभराव
Mon, 20 May 2024 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 20 May 2024 11:42 PM IST
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तोशाम में चुनावी चर्चा करते बुजुर्ग ।
तोशाम। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल और किरण चौधरी के राजनीतिक गढ़ तोशाम में लोकसभा चुनावों को लेकर माहौल काफी गर्म है। यहां पीने के पानी की बड़ी समस्या है, मगर बारिश में यहां अथाह जलभराव हो जाता है, जिसकी निकासी की यहां कोई व्यवस्था तक नहीं है।
मुंगीपा नगरी तोशाम को पर्यटन स्थल बनाए जाने का बड़ा मुद्दा है। हिरानंद ट्रस्ट के सहयोग से यहां पहाड़ की तलहटी पर बने कुंड का करीब डेढ़ करोड़ के बजट से सुंदरीकरण किए जाने का काम चल रहा है। ऐतिहासिक विरासत को समेटे बाबा मुंगीपा की नगरी तोशाम में राष्ट्रीय स्तर पर कोई स्मारक या पर्यटन स्थल नहीं हैं।
तोशाम की ऐतिहासिक पृष्टभूमि को देखा जाए तो तोशाम के पहाड़ पर पृथ्वीराज चौहान के समय की कचहरी यानी बारादरी है। पृथ्वीराज चौहान का यह सीमांत इलाका था, इसलिए यहां बारूद का सब डिपो भी पहाड़ पर होता था, जबकि हांसी के किले में बारूद का भंडारण था। पहाड़ की तलहटी में ऐतिहासिक कुंड भी है, जो अपने अंदर अनोखा इतिहास समेटे हैं। बावजूद इसके इन ऐतिहासिक और दिलचस्प इतिहास के सबूत आज भी मौजूद हैं। यहां महाभारत काल में पांडवों का भी जिक्र आता है। बावजूद इसके यहां पर्यटन स्थल नहीं है।
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सांसद कोटे से नहीं हुआ कोई बड़ा काम
ग्रामीणों का कहना है कि तोशाम महाग्राम योजना में शामिल है, मगर बारिश में पानी की निकासी तक नहीं है। हालांकि ग्राम पंचायत अब इस बड़ी समस्या का हल निकालने के प्रयासों में जुटी है और इस दिशा में काम भी चल रहा है। सांसद कोटे से यहां कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। न ही यहां कोई बड़ा उद्योग है। खनन यहां के लोगों की मुख्य आजीविका है। क्योंकि तोशाम के खानक और डाडम पहाड़ में पत्थर से भवन निर्माण सामग्री बनती है, जो पूरे देश भर में जाती है। पहाड़ी इलाके पर लगातार पेड़ और पर्यावरण भी घटता जा रहा है, यह भी अब ग्रामीणों की मुख्य मांग और मुद्दे में शामिल है कि यहां पेड़ों को बचाना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार कोई पर्यावरण संजोने की कोई बड़ी परियोजना पर काम कराए। तोशाम कस्बा 35 हजार की आबादी और 11 हजार मतदाताओं का गढ़ है।
तोशाम में पीने के पानी की बहुत कमी है। इसलिए ग्राम पंचायत वार्डों में पानी के टैंकर भेजकर लोगों की पेयजल जरूरतों को भी पूरा कराती है। बारिश में यहां अथाह जलभराव हो जाता है, इस पानी की निकासी की यहां व्यवस्था अभी नहीं है। कस्बा में पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी हैं, मगर पर्यटन स्थल नहीं बना है, जबकि ये मांग लंबे अर्से से उठती आ रही है। पहाड़ की वजह से इलाका काफी गर्म हैं, पर्यावरण की दिशा में भी काफी काम की जरूरत है।
-नंदा पंघाल, पंच प्रतिनिधि तोशाम।
कस्बा तोशाम में ग्राम पंचायत पानी की निकासी के लिए प्रबंध कराने का कार्य कर रही है। वहीं हिरानंद ट्रस्ट के प्रयासों से तोशाम पहाड़ में पुराने तालाब का भी सुंदरीकरण का काम चल रहा है। ग्राम पंचायत डिस्पोजल की प्रक्रिया पर भी काम कर रही है, जिसके बाद यहां के वार्डों में गंदे पानी के साथ बारिश के पानी की निकासी भी होगी।
- राजेश तंवर सरपंच तोशाम।
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मुंगीपा नगरी तोशाम को पर्यटन स्थल बनाए जाने का बड़ा मुद्दा है। हिरानंद ट्रस्ट के सहयोग से यहां पहाड़ की तलहटी पर बने कुंड का करीब डेढ़ करोड़ के बजट से सुंदरीकरण किए जाने का काम चल रहा है। ऐतिहासिक विरासत को समेटे बाबा मुंगीपा की नगरी तोशाम में राष्ट्रीय स्तर पर कोई स्मारक या पर्यटन स्थल नहीं हैं।
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तोशाम की ऐतिहासिक पृष्टभूमि को देखा जाए तो तोशाम के पहाड़ पर पृथ्वीराज चौहान के समय की कचहरी यानी बारादरी है। पृथ्वीराज चौहान का यह सीमांत इलाका था, इसलिए यहां बारूद का सब डिपो भी पहाड़ पर होता था, जबकि हांसी के किले में बारूद का भंडारण था। पहाड़ की तलहटी में ऐतिहासिक कुंड भी है, जो अपने अंदर अनोखा इतिहास समेटे हैं। बावजूद इसके इन ऐतिहासिक और दिलचस्प इतिहास के सबूत आज भी मौजूद हैं। यहां महाभारत काल में पांडवों का भी जिक्र आता है। बावजूद इसके यहां पर्यटन स्थल नहीं है।
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सांसद कोटे से नहीं हुआ कोई बड़ा काम
ग्रामीणों का कहना है कि तोशाम महाग्राम योजना में शामिल है, मगर बारिश में पानी की निकासी तक नहीं है। हालांकि ग्राम पंचायत अब इस बड़ी समस्या का हल निकालने के प्रयासों में जुटी है और इस दिशा में काम भी चल रहा है। सांसद कोटे से यहां कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। न ही यहां कोई बड़ा उद्योग है। खनन यहां के लोगों की मुख्य आजीविका है। क्योंकि तोशाम के खानक और डाडम पहाड़ में पत्थर से भवन निर्माण सामग्री बनती है, जो पूरे देश भर में जाती है। पहाड़ी इलाके पर लगातार पेड़ और पर्यावरण भी घटता जा रहा है, यह भी अब ग्रामीणों की मुख्य मांग और मुद्दे में शामिल है कि यहां पेड़ों को बचाना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार कोई पर्यावरण संजोने की कोई बड़ी परियोजना पर काम कराए। तोशाम कस्बा 35 हजार की आबादी और 11 हजार मतदाताओं का गढ़ है।
तोशाम में पीने के पानी की बहुत कमी है। इसलिए ग्राम पंचायत वार्डों में पानी के टैंकर भेजकर लोगों की पेयजल जरूरतों को भी पूरा कराती है। बारिश में यहां अथाह जलभराव हो जाता है, इस पानी की निकासी की यहां व्यवस्था अभी नहीं है। कस्बा में पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी हैं, मगर पर्यटन स्थल नहीं बना है, जबकि ये मांग लंबे अर्से से उठती आ रही है। पहाड़ की वजह से इलाका काफी गर्म हैं, पर्यावरण की दिशा में भी काफी काम की जरूरत है।
-नंदा पंघाल, पंच प्रतिनिधि तोशाम।
कस्बा तोशाम में ग्राम पंचायत पानी की निकासी के लिए प्रबंध कराने का कार्य कर रही है। वहीं हिरानंद ट्रस्ट के प्रयासों से तोशाम पहाड़ में पुराने तालाब का भी सुंदरीकरण का काम चल रहा है। ग्राम पंचायत डिस्पोजल की प्रक्रिया पर भी काम कर रही है, जिसके बाद यहां के वार्डों में गंदे पानी के साथ बारिश के पानी की निकासी भी होगी।
- राजेश तंवर सरपंच तोशाम।