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Bhiwani News: विवाह के 50 साल बाद बुआ मूर्ति देवी का भतीजों ने कराया मुकलावा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:03 AM IST
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Nephews arranged the Muklawa ceremony for their aunt, Murti Devi, fifty years after her marriage.

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बवानीखेड़ा (भिवानी)। बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव औरंगनगर निवासी मूर्ति देवी का राजेंद्र संग विवाह होने के करीब 50 वर्ष बाद उनके भतीजों ने उनका मुकलावा यानी ‘गोना’ कराकर एक अनूठी पारिवारिक परंपरा को जीवंत कर दिया। कलानौर निवासी देवेंद्र, मुकेश, रिंकू और रोहित ने मिलकर अपनी बुआ मूर्ति देवी का मुकलावा करवाया। परिवार के इस आयोजन ने न केवल पुरानी परंपरा की यादें ताजा कर दीं बल्कि रिश्तों की मजबूती और अपनत्व की मिसाल भी पेश की। कार्यक्रम में मूर्ति देवी के भतीजे मुकेश कुमार व मुकेश कुमार की पत्नी कोमल ने अहम भूमिका अदा की।
50 साल बाद हुआ मुकलावा : परिजनों के अनुसार मूर्ति देवी का विवाह करीब 50 वर्ष पहले राजेंद्र के साथ हुआ था। उस समय विवाह के बाद मुकलावा अलग रस्म के रूप में किया जाता था और मुकलावे के बाद ही लड़की ससुराल में स्थायी रूप से रहने जाती थी। वर्तमान समय में विवाह के साथ ही अधिकांश परिवारों में यह रस्म पूरी हो जाती है लेकिन पहले शादी और मुकलावा अलग-अलग समय पर होते थे। मूर्ति देवी ने बताया कि विवाह के समय अपने मायके गांव मोखरा में माता-पिता के साथ रही थीं। बाद में उसका परिवार कलानौर में रहने लगा और वह विवाह के बाद अपने पति संग गांव औरंगनगर रहने लगी समय बीतने के साथ वह अब पौत्र-पौत्रियों और दोहते-दोहती वाली हो चुकी हैं। जब परिवार में इस पुराने रिश्ते और रस्म की चर्चा हुई तो भतीजों ने हंसी-मजाक में अपनी बुआ का मुकलावा कराने का संकल्प लिया। इसके बाद भतीजों ने इस संकल्प को निभाते हुए बाकायदा मुकलावे की रस्म पूरी की।
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सभी में दिखा उत्साह, काटा केक, मनाई खुशी
परिवार के इस आयोजन में रिश्तेदारों और परिचितों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। लंबे समय बाद निभाई गई इस रस्म को लेकर परिवार में खुशी का माहौल रहा।
बच्चों ने कहा ताउम्र याद रहेगी ये खुशी
मूर्ति देवी की संतानों में लेखक, गीतकार, संगीतकार एवं समाजसेवी नवीन औरंगनगरिया, सुनील, सीमा, अनूप और सचिन सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। परिवारजनों ने कहा कि यह मुकलावा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि परिवार के बीच प्रेम, सम्मान और रिश्तों की गर्माहट को दर्शाने वाला अवसर बन गया।
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