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Bhiwani News: भावांतर के भंवर में फंसी बाजरा की खरीद से निजी जगहों पर भंडारण, सरकारी गोदाम खाली

Sun, 28 Sep 2025 07:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 28 Sep 2025 07:16 AM IST
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Millet procurement caught in the vortex of price difference leads to storage at private places, government warehouses empty
अनाज मंडी में बाजरे को एकत्रित करती महिलाएं। 
भिवानी। बाजरा की सरकारी खरीद भावांतर के भंवर में फंसकर रह गई है। प्राइवेट गोदामों में बाजरे का भंडारण हो रहा है जबकि सरकारी गोदाम अभी खाली पड़े हैं। 23 सितंबर से ही बाजरा की सरकारी खरीद आरंभ हो चुकी है। किसान भी मंडियों में गेट पास कटवाकर सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है।
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बाजरे का रंग फीका बताकर खरीद से किनारा किया जा रहा है। वहीं किसानों का कहना है कि पहले मौसम की अब सरकार की बाजरा खरीद मानकों की दोहरी मार पड़ रही है। सरकारी खरीद एजेंसियों के पास करीब 10 लाख कट्टों का भंडारण भी मौजूद है, लेकिन इनके अंदर भराई कराने के लिए बाजरे का एक दाना तक नहीं खरीद हुआ है।
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भिवानी जिले में अब तक एक लाख 15 हजार 287 किसानों की छह लाख 16 हजार 239 एकड़ भूमि मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकृत हो चुका है। जिले में करीब 92 हजार एकड़ से अधिक भूमि जलभराव से प्रभावित हो चुकी है। जिस पर खड़ी फसल भी तबाह हो गई है। मंडियों में जो किसान अपना बाजरा लेकर पहुंचे हैं, उनका बाजरा भी बेमौसम बारिश की मार झेल चुका है। जिससे खरीद करने में सरकारी एजेंसी के अधिकारी रंग फीका बताकर किनारा कर रहे हैं। जिला मुख्यालय की मंडी में ही 80 हजार क्विंटल से अधिक बाजरा आवक हो चुका है। भिवानी जिले की नौ मंडियों में हैफेड और एचएसडब्ल्यूसी द्वारा बाजरा की सरकारी खरीद का शेड्यूल 23 सितंबर से जारी हो चुका है। मंडियां भी खरीद एजेंसियों को अलॉट हो चुकी हैं। पिछले सीजन 60 लाख 40 हजार क्विंटल बाजरा की सरकारी खरीद हुई थी। लेकिन इस बार खरीद आरंभ होने के बाद बाजरे का एक दाना तक एजेंसी ने नहीं खरीदा है।
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भावांतर योजना में बेच रहे किसान बाजरा, 625 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान का इंतजार
जिले के अधिकांश किसान तो सरकारी एजेंसियों को बाजरा बेचने के लिए टोकन कटवाकर मंडियों में अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन कुछ किसानों ने अपना बाजरा भावांतर योजना के तहत प्राइवेट बेच दिया है। जिसके बाद उन्हें 625 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान का इंतजार बना है। बाजरा की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। ऐसे में असमंजस यह भी बना है कि सरकार इस बार बाजरा न खरीद किसानों को केवल भावांतर ही देगी। ऐसे में मंडियों के अंदर बाजरा की आवक और किसानों की तादाद भी लगातार बढ़ रही है। खरीद शुरू नहीं होने से आढ़तियों में भी तनाव का माहौल बना है, जबकि किसान बाजरा खरीद नहीं होने की बेबसी से मंडियों में मायूस बैठा है।

प्राइवेट गोदामों में भंडारित हो चुका हजारों क्विंटल बाजरा
पिछले 20 दिनों से मंडियों में बाजरा की प्राइवेट बोली लगाई जा रही है। रोजाना ही करीब साढ़े तीन से चार हजार क्विंटल बाजरा प्राइवेट बोली में खप रहा है। जिसका व्यापारी अपने निजी गोदामों में भंडारण भी करा रहे हैं। प्राइवेट गोदामों का बाजरा पशु चारा व मुर्गी फार्मों में फीड के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। जबकि सरकार अगर बाजरा खरीद करती है तो उसकी आपूर्ति राशन डिपो पर गरीबों को की जाएगी।

जिले के 73 हजार किसानों की 4 लाख 72 हजार एकड़ में फसल खराब
क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जिले के 73 हजार किसानों की चार लाख 72 हजार एकड़ भूमि पर फसल खराब का पंजीकरण हुआ है। हरियाणा के 6400 गांवों में 31 लाख एकड़ भूमि में फसल खराबा क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज हो चुका है। 16 सितंबर से 25 सितंबर तक किसानों की फसल खराबा का राजस्व विभाग के पटवारियों द्वारा वेफिकिशन का काम किया गया है। वेरिफिकेशन की अवधि बढ़ाए जाने के संबंध में भी दी रेवन्यू पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन ने मुख्यालय मांग भेजी है।

डेढ़ महीने से जमा है खेत में पानी, किसान झेल रहे फसल की हानि
पिछले डेढ़ माह से खेतों में बरसाती जलभराव बना है। किसान भी खरीफ फसल की हानि झेल रहे हैं। क्षति पूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण तो करा दिया है, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। रबी फसल की बिजाई की भी कोई उम्मीद नहीं बची है। ऐसे में सरकार को बाढ़ पीड़ितों की तर्ज पर विशेष पैकेज देना चाहिए।
-पवन कुमार बवानीखेड़ा

मंडी में बाजरा की फसल करीब 15 दिनों से खरीद के इंतजार में पड़ी है। अधिकारी ढेरी देख आगे बढ़ जाते हैं, खरीद कब तक शुरू होगी कोई कुछ नहीं बता रहा है। मंडी में आढ़ती भी कितने दिन तक फसल की रखवाली करेगा। अगर खरीद नहीं करनी है तो फिर भावांतर में बेच दें। पहले मौसम ने मारा अब खरीद मानकों के नाम पर किसानों से खिलवाड़ हो रहा है।
-दीवान सिंह बवानीखेड़ा

एचएसडब्ल्यूसी ने तीन किसानों का 680 क्विंटल बाजरा खरीद किया है। बाजरा की खरीद लगातार की जाएगी। एजेंसी सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के हिसाब से ही बाजरा खरीद रही है। जिन किसानों के बाजरे का रंग फीका है, वे भावांतर में अपनी फसल बेच सकते हैं, जिसका 625 रुपये प्रति क्विंटल सरकार अलग से खाता में भुगतान देगी। आढ़तियों से भी अनुरोध है कि वे किसानों को भावांतर के प्रति भी जागरूक करें।

-दिलबाग सिंह, जिला प्रबंधक एचएसडब्ल्यूसी भिवानी।

हरियाणा के लगभग 6500 गांवों में 1500 पटवारी कार्यरत हैं और अब प्रशिक्षण ले रहे 2600 पटवारियों की ततीमा अपडेट कार्य में निदेशालय से ड्यूटी संबंधी पत्र जारी होने के कारण गिरदावरी कार्य प्रभावित हो रहा है। सभी पटवारी दिन-रात लगे हुए हैं ताकि किसान को खराब हुई फसल का मुआवजा समय से मिल सके और निदेशक भू-अभिलेख हरियाणा को समय बढ़ाने का पत्र भी लिख दिया है।

-विकास राठी, राज्य उपप्रधान दी रेवन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन।
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