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मनीषा मौत मामला: विरोधाभासी रिपोर्टों से उलझी गुत्थी
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भिवानी। सिंघानी की शिक्षिका मनीषा की मौत का रहस्य और गहराता जा रहा है। परिजन जहां इसे हत्या और दुष्कर्म से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं पुलिस की जांच और दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों में आए विरोधाभास ने सवालों को और पेचीदा कर दिया है। एक के बाद एक ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जिनसे गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझती नजर आ रही है।
मनीषा की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मनीषा का धड़ से गर्दन पूरी तरह कटी हुई थी। मात्र पांच इंच मांस के टुकड़े से गर्दन जुड़ी थी।
शव से श्वास नली और भोजन नली के अलावा दोनों आंखें गायब थीं।
शव के शरीर पर काफी मिट्टी लगी हुई थी।
मनीषा का गला किसी तेजधार हथियार से काटे जाने की बात सामने आई थी।
पीजीआई की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मनीषा की मौत जहरीला पदार्थ निगलने से हुई बताई गई।
मनीषा से दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, क्योंकि शरीर पर सीमन नहीं मिला।
मनीषा के चेहरे पर किसी तरह का एसिड नहीं मिला।
मनीषा के शव को कुत्तों व जंगली जानवरों द्वारा नोंचकर खाए जाने की बात कही गई।
अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल
मनीषा का शव बाजरे के खेत में मिला था। परिजनों का कहना है कि अगर कुत्तों ने शव को नोंचा होता तो खेत की गीली और रेतीली जमीन पर पंजों के निशान जरूर मिलते। बारिश के कारण खेत की मिट्टी मुलायम थी, ऐसे में पैरों के निशान न मिलना संदेह पैदा करता है।
मृतका के कपड़े अस्त-व्यस्त अवस्था में मिले, जिससे परिजन दुष्कर्म की आशंका शुरू से ही जता रहे हैं। वहीं गला घोंटकर हत्या किए जाने की संभावना पर भी परिवार सवाल उठा रहा है।
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पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर काफी मिट्टी पाई गई जबकि पुलिस के अनुसार जब शव मिला तो वह कपड़े पहने थी। ऐसे में कपड़े पहने होने के बावजूद शरीर पर इतनी मिट्टी कैसे पहुंची, यह भी जांच का विषय है।
दूसरी रिपोर्ट में मनीषा की मौत जहरीला पदार्थ निगलने से बताई गई लेकिन पुलिस को मौके से न तो जहरीले पदार्थ की शीशी, पाउच या रैपर मिला और न ही पानी की बोतल।
सबसे बड़ा विरोधाभास दोनों रिपोर्टों में है। पहली रिपोर्ट में तेजधार हथियार से गला रेतकर हत्या और आंखें व चेहरे पर एसिड का जिक्र था, जबकि दूसरी रिपोर्ट में मौत जहरीला पदार्थ निगलने से बताई गई और दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। खास बात यह कि पहली रिपोर्ट में जिन अंगों को गायब बताया गया था, वे दूसरी रिपोर्ट में मौजूद दिखाए गए। वहीं, पहली रिपोर्ट में जिन अंगों के नमूने विसरा जांच के लिए सुरक्षित किए जाने की बात कही गई थी, उनका दूसरी रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है।
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मनीषा की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मनीषा का धड़ से गर्दन पूरी तरह कटी हुई थी। मात्र पांच इंच मांस के टुकड़े से गर्दन जुड़ी थी।
शव से श्वास नली और भोजन नली के अलावा दोनों आंखें गायब थीं।
शव के शरीर पर काफी मिट्टी लगी हुई थी।
मनीषा का गला किसी तेजधार हथियार से काटे जाने की बात सामने आई थी।
पीजीआई की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मनीषा की मौत जहरीला पदार्थ निगलने से हुई बताई गई।
मनीषा से दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, क्योंकि शरीर पर सीमन नहीं मिला।
मनीषा के चेहरे पर किसी तरह का एसिड नहीं मिला।
मनीषा के शव को कुत्तों व जंगली जानवरों द्वारा नोंचकर खाए जाने की बात कही गई।
अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल
मनीषा का शव बाजरे के खेत में मिला था। परिजनों का कहना है कि अगर कुत्तों ने शव को नोंचा होता तो खेत की गीली और रेतीली जमीन पर पंजों के निशान जरूर मिलते। बारिश के कारण खेत की मिट्टी मुलायम थी, ऐसे में पैरों के निशान न मिलना संदेह पैदा करता है।
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मृतका के कपड़े अस्त-व्यस्त अवस्था में मिले, जिससे परिजन दुष्कर्म की आशंका शुरू से ही जता रहे हैं। वहीं गला घोंटकर हत्या किए जाने की संभावना पर भी परिवार सवाल उठा रहा है।
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पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर काफी मिट्टी पाई गई जबकि पुलिस के अनुसार जब शव मिला तो वह कपड़े पहने थी। ऐसे में कपड़े पहने होने के बावजूद शरीर पर इतनी मिट्टी कैसे पहुंची, यह भी जांच का विषय है।
दूसरी रिपोर्ट में मनीषा की मौत जहरीला पदार्थ निगलने से बताई गई लेकिन पुलिस को मौके से न तो जहरीले पदार्थ की शीशी, पाउच या रैपर मिला और न ही पानी की बोतल।
सबसे बड़ा विरोधाभास दोनों रिपोर्टों में है। पहली रिपोर्ट में तेजधार हथियार से गला रेतकर हत्या और आंखें व चेहरे पर एसिड का जिक्र था, जबकि दूसरी रिपोर्ट में मौत जहरीला पदार्थ निगलने से बताई गई और दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। खास बात यह कि पहली रिपोर्ट में जिन अंगों को गायब बताया गया था, वे दूसरी रिपोर्ट में मौजूद दिखाए गए। वहीं, पहली रिपोर्ट में जिन अंगों के नमूने विसरा जांच के लिए सुरक्षित किए जाने की बात कही गई थी, उनका दूसरी रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है।