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भगवान की लीलाओं का श्रवण करने से मन शुद्ध होता है : आचार्य
Fri, 08 Aug 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 08 Aug 2025 01:09 AM IST
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श्री लाल महादेव अखाड़े वाले मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में मौजूद महंत
भिवानी। स्थानीय खाकी बाबा मंदिर गली स्थित श्री लाल महादेव अखाड़े वाले मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा अमृत महोत्सव भक्तिभाव और आस्था के वातावरण में निरंतर पांचवें दिन भी प्रवाहित रही। कथा महोत्सव का यह पांचवां दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा, महारास लीला और रुक्मिणी विवाह प्रसंग को समर्पित रहा। जिसमें श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर महंत चरण दास महाराज का विशेष सानिध्य रहा।
कथा व्यास स्वामी गोवर्धन आचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की चमत्कारी लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे भगवान ने बाल रूप में ही पूतना, शकटासुर, त्रिणावर्त जैसे राक्षसों का उद्धार किया और गोकुल वासियों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल चमत्कार नहीं बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा और जीवन दर्शन की प्रेरणा हैं। गोवर्धन पूजा के प्रसंग में उन्होंने बताया कि किस प्रकार श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। महारास लीला के दौरान रास मंडल में श्रीकृष्ण का प्रत्येक गोपी के साथ होना, उनकी अद्वितीय लीलाओं की महिमा को दर्शाता है। रुक्मिणी विवाह प्रसंग में श्रीकृष्ण की बुद्धिमत्ता, पराक्रम और सच्चे प्रेम की गाथा सुनाई गई, जिससे श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
स्वामी गोवर्धन आचार्य महाराज ने कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि भगवान की लीलाओं का श्रवण करने से मन शुद्ध होता है और व्यक्ति को जीवन में धर्म, करुणा, समर्पण और भक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर, सरल और सार्थक बनाने की दिव्य शिक्षा है। उनके सान्निध्य में भक्तों ने मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन और आरती के साथ कथा का रसास्वादन किया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से ओतप्रोत माहौल में उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद उठाया। कथा महोत्सव 10 अगस्त तक प्रतिदिन जारी रहेगा।
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कथा व्यास स्वामी गोवर्धन आचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की चमत्कारी लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे भगवान ने बाल रूप में ही पूतना, शकटासुर, त्रिणावर्त जैसे राक्षसों का उद्धार किया और गोकुल वासियों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल चमत्कार नहीं बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा और जीवन दर्शन की प्रेरणा हैं। गोवर्धन पूजा के प्रसंग में उन्होंने बताया कि किस प्रकार श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। महारास लीला के दौरान रास मंडल में श्रीकृष्ण का प्रत्येक गोपी के साथ होना, उनकी अद्वितीय लीलाओं की महिमा को दर्शाता है। रुक्मिणी विवाह प्रसंग में श्रीकृष्ण की बुद्धिमत्ता, पराक्रम और सच्चे प्रेम की गाथा सुनाई गई, जिससे श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
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स्वामी गोवर्धन आचार्य महाराज ने कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि भगवान की लीलाओं का श्रवण करने से मन शुद्ध होता है और व्यक्ति को जीवन में धर्म, करुणा, समर्पण और भक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सुंदर, सरल और सार्थक बनाने की दिव्य शिक्षा है। उनके सान्निध्य में भक्तों ने मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन और आरती के साथ कथा का रसास्वादन किया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से ओतप्रोत माहौल में उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद उठाया। कथा महोत्सव 10 अगस्त तक प्रतिदिन जारी रहेगा।
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