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अनपढ़ सास ने की किडनी देकर दसवीं पास बहू को दिया जीवन दान
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 26 Jul 2016 12:23 AM IST
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किडनी दान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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परिवारों में सास-बहू की नोकझोंक की घटनाएं तो रोजाना सुनने और देखने को मिलती है लेकिन इन सबसे ऊपर उठकर चरखी दादरी उपमंडल के गांव डुडीवाला किशनपुरा की सास-बहू ने इस रिश्ते की मर्यादा को और गौरवान्वित कर दिया है। दरअसल डुडीवाला किशनपुरा निवासी शकुंतला ने अपनी किडनी देकर अपनी पुत्रवधू पूनम की जान बचाकर समाज के सामने एक नजीर पेश की है। किडनी ट्रांसप्लांटेशन अहमदाबाद के एक अस्पताल में कुछ दिन पहले ही हुआ है और अब दोनों सामान्य जीवन बिता रही हैं।
शकुंतला देवी का पुत्र दिनेश मुंबई की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करता है। करीब तीन साल पहले वह अपनी पत्नी पूनम को भी अपने साथ वहां ले गया था। इस दौरान पूनम की दोनों किडनियों ने पेट के इंफेक्शन के कारण काम करना बंद कर दिया। उसके स्वास्थ्य में गिरावट आई तो चिकित्सक के पास जाने पर दिनेश व पूनम को किडनी खराब होने का पता चला। दोनों के सामने किडनी डोनर ढूंढने के अलावा कोई चारा नहीं था। पूनम के माता-पिता का स्वर्गवास पहले ही हो चुका था। वहीं, एक भाई ने दुर्घटना के चलते तो दूसरे ने कम उम्र के चलते किडनी डोनेट करने पर असमर्थता जता दी। पति दिनेश के ब्लड ग्रुप मैच न होने से मुसीबतें और बढ़ गई। पूनम को करीब एक साल से अधिक समय तक डायलिसिस का भी सहारा लेना पड़ा लेकिन कुछ दिन बाद ही चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट करवाना ही एकमात्र विकल्प बताया। ऐसे में अपनी बहू के जीवन को बचाने के लिए सास शकुंतला आगे आई व बिना किसी हिचक के अपनी एक किडनी पुत्रवधू को देकर उसका जीवन बचाया। शल्य चिकित्सा अहमदाबाद स्थित किडनी ट्रांसप्लांटेशन टावर में की गई। पूनम दसवीं तक पढ़ी है और उसे एक संतान है। वहीं उसकी सास शकुंतला देवी अनपढ़ हैं।
बहू कोन्या मेरी तो बेटी सै
सास शंकुतला का कहना है कि अपनी बहू को भी बेटी के समान समझना चाहिए। बेटियों को बचाने के लिए हर दृष्टि से समाज को आगे आना होगा। उसके लिए पूनम खुद की बेटी से भी बढ़कर है। उन्होंने कहा कि अन्य महिलाओं को भी बेटे की शादी के बाद उसकी पत्नी को पुत्रवधू की बजाय बेटी की नजर से ही देखना चाहिए।
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शकुंतला देवी का पुत्र दिनेश मुंबई की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करता है। करीब तीन साल पहले वह अपनी पत्नी पूनम को भी अपने साथ वहां ले गया था। इस दौरान पूनम की दोनों किडनियों ने पेट के इंफेक्शन के कारण काम करना बंद कर दिया। उसके स्वास्थ्य में गिरावट आई तो चिकित्सक के पास जाने पर दिनेश व पूनम को किडनी खराब होने का पता चला। दोनों के सामने किडनी डोनर ढूंढने के अलावा कोई चारा नहीं था। पूनम के माता-पिता का स्वर्गवास पहले ही हो चुका था। वहीं, एक भाई ने दुर्घटना के चलते तो दूसरे ने कम उम्र के चलते किडनी डोनेट करने पर असमर्थता जता दी। पति दिनेश के ब्लड ग्रुप मैच न होने से मुसीबतें और बढ़ गई। पूनम को करीब एक साल से अधिक समय तक डायलिसिस का भी सहारा लेना पड़ा लेकिन कुछ दिन बाद ही चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट करवाना ही एकमात्र विकल्प बताया। ऐसे में अपनी बहू के जीवन को बचाने के लिए सास शकुंतला आगे आई व बिना किसी हिचक के अपनी एक किडनी पुत्रवधू को देकर उसका जीवन बचाया। शल्य चिकित्सा अहमदाबाद स्थित किडनी ट्रांसप्लांटेशन टावर में की गई। पूनम दसवीं तक पढ़ी है और उसे एक संतान है। वहीं उसकी सास शकुंतला देवी अनपढ़ हैं।
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बहू कोन्या मेरी तो बेटी सै
सास शंकुतला का कहना है कि अपनी बहू को भी बेटी के समान समझना चाहिए। बेटियों को बचाने के लिए हर दृष्टि से समाज को आगे आना होगा। उसके लिए पूनम खुद की बेटी से भी बढ़कर है। उन्होंने कहा कि अन्य महिलाओं को भी बेटे की शादी के बाद उसकी पत्नी को पुत्रवधू की बजाय बेटी की नजर से ही देखना चाहिए।
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