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महिला स्पेशल बसों के लिए कॉलेजों से मांगी छात्राओं की जानकारी
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रोडवेज की पिंक बस।
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। महिला स्पेशल बसों के संचालन के लिए रोडवेज विभाग ने शहर के कॉलेजों से उनकी जरूरत की जानकारी मांगी है। किस कॉलेज में कितनी छात्राएं रोजाना गांव से शहर में सफर करती हैं, उसी आधार पर रोडवेज विभाग मिनी पिंक बसों का रूट निर्धारित करेगा। फिलहाल कोरोना की वजह से पिंक मिनी बसें लंबे अर्से से बंद पड़ी हैं। कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को कॉलेज पहुंचने में भी परेशानी आ रही है। रोडवेज विभाग महिला स्पेशल बसों के संचालन को लेकर 27 अगस्त को फैसला लेगा।
भिवानी शहर में सरकारी और निजी महाविद्यालयों के अलावा आईटीआई भी हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र से सैकड़ों छात्राएं रोजाना ही शहर में पढ़ाई के लिए आती हैं। इन छात्राओं को रोडवेज बसों में सामान्य यात्रियों के साथ धक्कामुक्की के बीच सफर के लिए मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में बसों का रूट कॉलेज टाइम से निर्धारित नहीं होने की वजह से घर लौटने में भी देरी हो जाती है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने करीब दो साल पहले रोडवेज बेडे़ में पिंक मिनी बसों को शामिल किया था। 38 सीटर ये बसें स्पेशल कॉलेज व स्कूली छात्राओं के लिए ही चलाई गई थीं, जिसमें उन्हें घर से कॉलेज और फिर कॉलेज व स्कूल से घर तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया। भिवानी डिपो में पांच पिंक बसें शामिल हैं। कोरोना की वजह से दो साल से इन पिंक बसों पर ब्रेक लगा रहा। कोरोना की दूसरी लहर में पिंक मिनी बसों को एंबुलेंस में भी बदला गया था, लेकिन बाद में फिर से इन्हें पिंक बस में बदल दिया गया। इसके बावजूद इनका संचालन नहीं हुआ। अब कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के साथ मिनी बसों की जरूरत भी छात्राओं को महसूस होने लगी है।
कल होगा फैसला
महिला स्पेशल बसों का फिलहाल संचालन नहीं हो रहा है। परिवहन महानिदेशालय से पत्र आया है, जिसमें 27 अगस्त को इन बसों के संचालन का फैसला होगा। इस दौरान शहर के कॉलेजों से छात्राओं की जानकारी मांगी है। इसके बाद ही इन बसों का नए सिरे से रूट निर्धारित होगा।
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- सुरेश कुमार, ड्यूटी इंचार्ज, भिवानी बस स्टैंड।
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भिवानी शहर में सरकारी और निजी महाविद्यालयों के अलावा आईटीआई भी हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र से सैकड़ों छात्राएं रोजाना ही शहर में पढ़ाई के लिए आती हैं। इन छात्राओं को रोडवेज बसों में सामान्य यात्रियों के साथ धक्कामुक्की के बीच सफर के लिए मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में बसों का रूट कॉलेज टाइम से निर्धारित नहीं होने की वजह से घर लौटने में भी देरी हो जाती है। ऐसे में हरियाणा सरकार ने करीब दो साल पहले रोडवेज बेडे़ में पिंक मिनी बसों को शामिल किया था। 38 सीटर ये बसें स्पेशल कॉलेज व स्कूली छात्राओं के लिए ही चलाई गई थीं, जिसमें उन्हें घर से कॉलेज और फिर कॉलेज व स्कूल से घर तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया। भिवानी डिपो में पांच पिंक बसें शामिल हैं। कोरोना की वजह से दो साल से इन पिंक बसों पर ब्रेक लगा रहा। कोरोना की दूसरी लहर में पिंक मिनी बसों को एंबुलेंस में भी बदला गया था, लेकिन बाद में फिर से इन्हें पिंक बस में बदल दिया गया। इसके बावजूद इनका संचालन नहीं हुआ। अब कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के साथ मिनी बसों की जरूरत भी छात्राओं को महसूस होने लगी है।
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कल होगा फैसला
महिला स्पेशल बसों का फिलहाल संचालन नहीं हो रहा है। परिवहन महानिदेशालय से पत्र आया है, जिसमें 27 अगस्त को इन बसों के संचालन का फैसला होगा। इस दौरान शहर के कॉलेजों से छात्राओं की जानकारी मांगी है। इसके बाद ही इन बसों का नए सिरे से रूट निर्धारित होगा।
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- सुरेश कुमार, ड्यूटी इंचार्ज, भिवानी बस स्टैंड।