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भिवानी जिले में एक हजार की आबादी पर सिर्फ एक पुलिस कर्मचारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 01:06 AM IST
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In Bhiwani district, only one police employee per thousand population
नगर परिषद की जमीन पर बनी जैन पुलिस चौकी। संवाद - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। एक हजार लोगों पर सिर्फ एक पुलिस कर्मचारी है। ऐसे में लोगों को सुरक्षा का अहसास कैसे होगा। भिवानी जिले में 11 पुलिस थानों और 10 पुलिस चौकियों का दायरा भी सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाने में जुटा है, लेकिन इसके बावजूद आज भी शहरी दायरे में कई चौकियां ऐसी हैं, जिनकी खुद की जगह तक नहीं है। ये चौकियां नगर परिषद की जगह पर बनी हैं।
दरअसल केंद्र सरकार ने पुलिस बल को मजबूत करने के लिए 26275 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की है। इसी के मद्देनजर हमने जिले में पुलिस बल की क्या स्थिति है, इस पर पड़ताल की है। महिला उत्पीड़न और साइबर अपराधियों से निपटने के लिए भी पुलिस ने अपनी रणनीति बदल दी है। जिसके लिए अब जिला पुलिस मुख्यालय पर बने साइबर सेल के अलावा हर पुलिस थाने में भी महिला और साइबर हेल्प डेस्क खोल दिए हैं, जिसके बाद साइबर धोखाधड़ी से निपटने में भी पुलिस अपराधियों के पैंतरों को आसानी से समझ उनके गिरेबान तक पहुंचने में जुटी है। भिवानी में तीन पुलिस थानों में मित्र कक्ष भी चालू हो गए हैं, जिनमें फरियादी पुलिस के रौब और तीखे सवालों का सामना करने से बच अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
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भिवानी जिले की आबादी करीब 12 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। अगर बात अकेले शहर की करें तो ढाई लाख की आबादी के साथ लगातार शहरी दायरा भी बढ़ रहा है। जिसको लेकर पुलिस की चुनौतियां भी बढ़ने लगी हैं। इसी के परिणाम स्वरूप भिवानी शहर में औद्योगिक पुलिस थाना नया खुला है। शहर में आपराधिक गतिविधियों के साथ-साथ ट्रैफिक को संभालना भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना है। अगर बात संसाधनों की करें तो पुलिस कई मायनों में पहले के मुकाबले काफी हाईटेक हो गई है। पुलिस को गच्चा देने के लिए अपराधी भी नए तौर तरीके अपनाने लगे हैं। इसके बावजूद शातिर अपराधियों तक कानून के हाथ आखिरकार पहुंच ही जाते हैं। पिछले पांच सालों में भिवानी में पुलिस कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पुलिस का काम कई गुणा जरूर बढ़ गया है।
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जिले में पुलिस कर्मियों की स्थिति
भिवानी में जिला पुलिस कप्तान की टीम में एक एएसपी, पांच डीएसपी, 23 इंस्पेक्टर, 48 सब इंस्पेक्टर, 153 एएसआई, 146 हेडकांस्टेबल, 810 सिपाही हैं। इन पुलिस कर्मचारियों के कंधों पर पूरे जिले की सुरक्षा का जिम्मा है। ये पुलिस कर्मचारी संबंधित मुकदमों की तफ्तीश कर अपराधियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचा रहे हैं।
एसआईटी के रडार पर साइबर अपराधी
आर्थिक अपराधों के साथ साथ साइबर अपराध भी पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। ये अपराधी सैकड़ों मील दूर बैठे भी पल भर में खाते से हजारों और लाखों की चपत लगा लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए भिवानी में साइबर एसआईटी का भी गठन किया है। इसके अलावा साइबर सेल भी गंभीर अपराधों को सुलझाने में मदद कर रही है, लेकिन ठगी का दायरा अब बढ़ गया है तो मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस को भी अब हर पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क खोल दिए हैं। जिसमें इस तरह की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।
उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की हेल्प के लिए बनी डेस्क
पुलिस थानों में महिला उत्पीड़न के मामलों में महिला फरियादियों की सुविधा के लिए महिला हेल्प डेस्क भी खुली हैं। जिनमें रोजाना ही महिलाओं की करीब 15 से 20 शिकायतें आ रही हैं। डेस्क पर महिला पुलिसकर्मी ही तैनात की हैं।
दो साल से कंडम पड़ी इंटरसेप्टर गाड़ी, नहीं लग रही वाहनों की स्पीड पर लगाम
ट्रैफिक पुलिस के पास ओवर स्पीड वाहनों के चालान काटने वाली इंटरसेप्टर गाड़ी दो साल से कंडम पड़ी है। जिसकी वजह से इस गाड़ी में लगे उपकरण भी कबाड़ हो चुके हैं, जिन्होंने काम करना बंद कर दिया है। जिसकी वजह से ओवर स्पीड़ वाहनों के चालान भी ट्रैफिक पुलिस नहीं कर पा रही है।
पराये भवनों में चल रहीं शहर की पांच पुलिस चौकियां
शहर में चार पुलिस चौकी ऐसी भी हैं, जो कई दशकों से पराये भवनों में ही चल रही हैं। इनमें जैन पुलिस चौकी कमेटी यानी नगर परिषद की जगह पर बनी है। इसी तरह अनाज मंडी पुलिस चौकी और बीटीएम पुलिस चौकी की जगह भी पुलिस विभाग की नहीं है। सब्जी मंडी पुलिस चौकी और दिनोद गेट पुलिस चौकी के पास भी खुद के भवन नहीं हैं। यही वजह है कि पुलिस विभाग भी इन चौकियों के जीर्णोद्धार पर बजट खर्च करने में तकनीकी दिक्कतों से घिरा है। जैन पुलिस चौकी के कमरों की छतों से भी मलबा भी गिरता है, जिससे कई बार पुलिस कर्मी भी चोटिल हो जाते हैं। शहर का औद्योगिक पुलिस थाना भी पराये भवन में ही चल रहा है। (संवाद)

पुलिस ने अपने को मजबूत किया है
नए दौर के साथ ही अपराध के तौर तरीके भी बदल रहे हैं। अपराधी पहले से और अधिक शातिर हो गए हैं, जो हाईटेक पैंतरों को अपनाते हैं। इसी के साथ पुलिस ने भी अपना रुख और मजबूत किया है, ताकि हर अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। हमारा प्रयास है कि पुलिस लोगों को सेवा सुरक्षा और सहयोग का अहसास कराने के साथ अपराधों में कमी लाने के लिए हर मोर्च पर डटी रहे।
- अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक भिवानी।
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