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Bhiwani News: कैसे होगा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, चिकित्सकों में 135 पद खाली, 104 के कंधों पर ही मरीजों का भार
Fri, 05 Jul 2024 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 05 Jul 2024 02:03 AM IST
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नागरिक अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़।
भिवानी। भिवानी जिले में चिकित्सकों के 239 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 104 चिकित्सक ही तैनात हैं। जबकि 135 चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं। उमस भरे मौसम में चर्म रोगियों के मर्ज भी अब बढ़ गए हैं, ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल में ही लंबे अर्से से चर्म रोग, ईएनटी का डॉक्टर नहीं है।
मरीज भी प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। सबसे अहम बात तो ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं। जबकि भिवानी में बिना चिकित्सक पीजीआई स्तर की सुविधाएं कैसे मिलेंगी। भिवानी में मेडिकल कॉलेज भी बनकर तैयार हो चुका है। लेकिन इसमें कोई बाहर से चिकित्सक नहीं आएगा, जबकि जिले में तैनात चिकित्सकों को ही डेपुटेशन पर यहां तैनात किया जाएगा। इससे तो जिला में ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के और अधिक बुरे हालात होने वाले हैं।
भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल में कई चिकित्सकों के कक्ष तो पिछले छह माह से खोले तक नहीं गए हैं,क्योंकि इनके बाहर चिकित्सक तैनात नहीं है कि सूचना स्थायी तौर पर लगा दी गई है। ऐसे में मरीज भी कक्ष तक तो आते हैं, मगर मैसेज देखकर निराश ही लौट जाते हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के काफी पद खाली पड़े हैं, जिनका असर सीधे तौर पर ओपीडी पर भी पड़ रहा है। क्योंकि सभी बीमारियों का उपचार नागरिक अस्पताल की ओपीडी में नहीं मिल रहा है।
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भिवानी जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 239 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 104 चिकित्सक ही तैनात हैं, जबकि 135 चिकित्सकों के पद लंबे अर्से से खाली पड़े हैं। इन खाली पदों को लेकर भी मुख्यालय से काफी बार पत्राचार हो चुका है। वहीं उच्चाधिकारियों के दौरे के दौरान भी ये मसला उठ चुका है। बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं है।
ओपीडी में दिन प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं, जबकि चिकित्सक लगातार सिमट रहे हैं। नए चिकित्सकों के आने की आस इसलिए भी नहीं है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में भी उन्हीं चिकित्सकों को डेपुटेशन पर दिया है, जो फिलहाल जिले में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में ये चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन पर जाते हैं तो जहां ये सेवाएं दे रहे हैं वहां चिकित्सक नहीं रहेंगे। ऐसे में मरीजों की परेशानी ही बढ़ेगी। उन्हें चेकअप के लिए भी जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ेगी।
भिवानी जिले में चिकित्सकों के स्वीकृत पदों के मुकाबले चिकित्सकों के आधे से भी अधिक पद खाली पड़े हैं। जिन पर नियुक्ति के संबंध में लगातार मुख्यालय से संपर्क बना है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द चिकित्सकों की नियुक्ति हो जिससे की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।
-डॉ रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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मरीज भी प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। सबसे अहम बात तो ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं। जबकि भिवानी में बिना चिकित्सक पीजीआई स्तर की सुविधाएं कैसे मिलेंगी। भिवानी में मेडिकल कॉलेज भी बनकर तैयार हो चुका है। लेकिन इसमें कोई बाहर से चिकित्सक नहीं आएगा, जबकि जिले में तैनात चिकित्सकों को ही डेपुटेशन पर यहां तैनात किया जाएगा। इससे तो जिला में ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के और अधिक बुरे हालात होने वाले हैं।
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भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल में कई चिकित्सकों के कक्ष तो पिछले छह माह से खोले तक नहीं गए हैं,क्योंकि इनके बाहर चिकित्सक तैनात नहीं है कि सूचना स्थायी तौर पर लगा दी गई है। ऐसे में मरीज भी कक्ष तक तो आते हैं, मगर मैसेज देखकर निराश ही लौट जाते हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के काफी पद खाली पड़े हैं, जिनका असर सीधे तौर पर ओपीडी पर भी पड़ रहा है। क्योंकि सभी बीमारियों का उपचार नागरिक अस्पताल की ओपीडी में नहीं मिल रहा है।
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भिवानी जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 239 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 104 चिकित्सक ही तैनात हैं, जबकि 135 चिकित्सकों के पद लंबे अर्से से खाली पड़े हैं। इन खाली पदों को लेकर भी मुख्यालय से काफी बार पत्राचार हो चुका है। वहीं उच्चाधिकारियों के दौरे के दौरान भी ये मसला उठ चुका है। बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं है।
ओपीडी में दिन प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं, जबकि चिकित्सक लगातार सिमट रहे हैं। नए चिकित्सकों के आने की आस इसलिए भी नहीं है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में भी उन्हीं चिकित्सकों को डेपुटेशन पर दिया है, जो फिलहाल जिले में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में ये चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन पर जाते हैं तो जहां ये सेवाएं दे रहे हैं वहां चिकित्सक नहीं रहेंगे। ऐसे में मरीजों की परेशानी ही बढ़ेगी। उन्हें चेकअप के लिए भी जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ेगी।
भिवानी जिले में चिकित्सकों के स्वीकृत पदों के मुकाबले चिकित्सकों के आधे से भी अधिक पद खाली पड़े हैं। जिन पर नियुक्ति के संबंध में लगातार मुख्यालय से संपर्क बना है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द चिकित्सकों की नियुक्ति हो जिससे की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाया जा सके।
-डॉ रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।