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नियमों पर भारी, कंडम ऑटो रिक्शा की सवारी
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शहर की सड़कों पर दौड़ते ऑटो। संवाद
- फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
भिवानी। एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद शहर की सड़कों पर करीब 900 से अधिक कंडम ऑटो रिक्शा नियमों को धता बता रहे हैं। इनमें लोगों को कराई जा रही सवारी भी नियमों पर भारी पड़ रही हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि नियम तो बने और उन्हें लागू भी कर दिया, लेकिन अभी तक भिवानी जिले में कोई अधिकृत स्क्रैपर नियुक्त नहीं किया, जिसके पास कंडम वाहनों को स्क्रैप किया जा सके।
एनजीटी के नियमों की धरातल पर पड़ताल की तो सामने आया कि नियमों के बारे में अब तक पुलिस प्रशासन भी पुख्ता नहीं है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस दस साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का न चलाने के लिए लोगों में जागरूकता अभियान चला चुकी है। प्रदूषण का पर्याय बन चुके कंडम ऑटो रिक्शा अभी भी धड़ल्ले से शहर की सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं।
शहर में करीब चार हजार ऑटो रिक्शा चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर तो ट्रैफिक नियमों को ही पूरा नहीं करते। वहीं, जबकि एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर क्षेत्र में दस साल पुराने डीजल वाहनों को सड़क पर न लाने की सख्त हिदायतें दी हैं। शहर में करीब 900 से अधिक ऑटो रिक्शा तो ऐसे हैं, जो नियम के अनुसार तो सड़क पर चलने लायक ही नहीं हैं। फिर भी नियमों की परवाह किए बगैर ये ऑटो धड़ल्ले से शहर में एक हिस्से से दूसरे हिस्से में दौड़ लगा रहे हैं। कुछ साल पहले दिल्ली व हिसार के अलावा अन्य शहरों से पुराने ऑटो रिक्शा खदेड़े थे, जिसके बाद ये ऑटो भिवानी शहर में पहुंच गए। कई वाहनों का तो यहां पर रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने नई वाहन निजी को लागू करते हुए पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की नीति भी बनाई। इसके लिए बड़े शहरों में अधिकृत स्क्रैपर भी नियुक्त कर दिए। मगर भिवानी में अब तक न तो कोई स्क्रैपर नियुक्त हुआ है न ही पुराने वाहनों पर कोई लगाम कसी गई है।
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किराये को लेकर भी नहीं थमी ऑटो चालकों की मनमानी
शहर में दौड़ रहे ऑटो रिक्शा चालकों के लिए जिला उपायुक्त व आरटीए कार्यालय की तरफ से 15 रुपये किराया निर्धारित किया हुआ है। इसके बावजूद अब भी ऑटो महज चार कदम दूर जाने पर भी 20 रुपये किराया यात्रियों से वसूल रहे हैं। इस तरह की मनमानी पर रोजाना ही लोगों के साथ किराये को लेकर झगड़ा भी हो रहा है। प्रशासन ने इनकी शिकायतों को लेकर कुछ नंबर भी जारी किए हुए हैं। मगर इन नंबरों पर भी कोई सुध लेने वाला नहीं है।
ट्रैफिक पुलिस ने मांगा आरटीए कार्यालय से पुराने वाहनों का रिकॉर्ड
एनजीटी के आदेशों के बाद ट्रैफिक पुलिस ने आरटीए कार्यालय से पुराने वाहनों का रिकॉर्ड मांगा है। अधिकतर कॉमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन आरटीए कार्यालय से होता है, जबकि पर्सनल वाहनों का रजिस्ट्रेशन एसडीएम कार्यालय से किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस पुराने वाहनों के संबंध में अभी आंकड़ा जुटाने में लगी है, ताकि नियमों के अनुसार मियाद खत्म हो चुके वाहनों को सड़क पर दौड़ने से रोका जा सके। (संवाद)
चेकिंग के दौरान करेंगे वाहनों को जब्त
ट्रैफिक पुलिस एनजीटी के आदेशों के अनुसार पुराने वाहनों को न चलाने के लिए लोगों को जागरूक कर चुकी है। शहर में करीब चार हजार ऑटो चल रहे हैं, इनमें से जो ऑटो नियम पूरा नहीं करते हैं, उन्हें चेकिंग के दौरान जब्त किया जाएगा। आरटीए ऑफिस से भी पुराने वाहनों का रिकॉर्ड मांगा है। अब तक जिले में कोई भी अधिकृत स्क्रैपर नहीं है। इस बारे में भी मार्गदर्शन लेने संबंधी पत्र लिखा है।
-विक्रांत सिंह, एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस थाना भिवानी।
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भिवानी। एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद शहर की सड़कों पर करीब 900 से अधिक कंडम ऑटो रिक्शा नियमों को धता बता रहे हैं। इनमें लोगों को कराई जा रही सवारी भी नियमों पर भारी पड़ रही हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि नियम तो बने और उन्हें लागू भी कर दिया, लेकिन अभी तक भिवानी जिले में कोई अधिकृत स्क्रैपर नियुक्त नहीं किया, जिसके पास कंडम वाहनों को स्क्रैप किया जा सके।
एनजीटी के नियमों की धरातल पर पड़ताल की तो सामने आया कि नियमों के बारे में अब तक पुलिस प्रशासन भी पुख्ता नहीं है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस दस साल पुराने डीजल वाहनों और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का न चलाने के लिए लोगों में जागरूकता अभियान चला चुकी है। प्रदूषण का पर्याय बन चुके कंडम ऑटो रिक्शा अभी भी धड़ल्ले से शहर की सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं।
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शहर में करीब चार हजार ऑटो रिक्शा चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर तो ट्रैफिक नियमों को ही पूरा नहीं करते। वहीं, जबकि एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर क्षेत्र में दस साल पुराने डीजल वाहनों को सड़क पर न लाने की सख्त हिदायतें दी हैं। शहर में करीब 900 से अधिक ऑटो रिक्शा तो ऐसे हैं, जो नियम के अनुसार तो सड़क पर चलने लायक ही नहीं हैं। फिर भी नियमों की परवाह किए बगैर ये ऑटो धड़ल्ले से शहर में एक हिस्से से दूसरे हिस्से में दौड़ लगा रहे हैं। कुछ साल पहले दिल्ली व हिसार के अलावा अन्य शहरों से पुराने ऑटो रिक्शा खदेड़े थे, जिसके बाद ये ऑटो भिवानी शहर में पहुंच गए। कई वाहनों का तो यहां पर रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने नई वाहन निजी को लागू करते हुए पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की नीति भी बनाई। इसके लिए बड़े शहरों में अधिकृत स्क्रैपर भी नियुक्त कर दिए। मगर भिवानी में अब तक न तो कोई स्क्रैपर नियुक्त हुआ है न ही पुराने वाहनों पर कोई लगाम कसी गई है।
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किराये को लेकर भी नहीं थमी ऑटो चालकों की मनमानी
शहर में दौड़ रहे ऑटो रिक्शा चालकों के लिए जिला उपायुक्त व आरटीए कार्यालय की तरफ से 15 रुपये किराया निर्धारित किया हुआ है। इसके बावजूद अब भी ऑटो महज चार कदम दूर जाने पर भी 20 रुपये किराया यात्रियों से वसूल रहे हैं। इस तरह की मनमानी पर रोजाना ही लोगों के साथ किराये को लेकर झगड़ा भी हो रहा है। प्रशासन ने इनकी शिकायतों को लेकर कुछ नंबर भी जारी किए हुए हैं। मगर इन नंबरों पर भी कोई सुध लेने वाला नहीं है।
ट्रैफिक पुलिस ने मांगा आरटीए कार्यालय से पुराने वाहनों का रिकॉर्ड
एनजीटी के आदेशों के बाद ट्रैफिक पुलिस ने आरटीए कार्यालय से पुराने वाहनों का रिकॉर्ड मांगा है। अधिकतर कॉमर्शियल वाहनों का रजिस्ट्रेशन आरटीए कार्यालय से होता है, जबकि पर्सनल वाहनों का रजिस्ट्रेशन एसडीएम कार्यालय से किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस पुराने वाहनों के संबंध में अभी आंकड़ा जुटाने में लगी है, ताकि नियमों के अनुसार मियाद खत्म हो चुके वाहनों को सड़क पर दौड़ने से रोका जा सके। (संवाद)
चेकिंग के दौरान करेंगे वाहनों को जब्त
ट्रैफिक पुलिस एनजीटी के आदेशों के अनुसार पुराने वाहनों को न चलाने के लिए लोगों को जागरूक कर चुकी है। शहर में करीब चार हजार ऑटो चल रहे हैं, इनमें से जो ऑटो नियम पूरा नहीं करते हैं, उन्हें चेकिंग के दौरान जब्त किया जाएगा। आरटीए ऑफिस से भी पुराने वाहनों का रिकॉर्ड मांगा है। अब तक जिले में कोई भी अधिकृत स्क्रैपर नहीं है। इस बारे में भी मार्गदर्शन लेने संबंधी पत्र लिखा है।
-विक्रांत सिंह, एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस थाना भिवानी।