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42 सर्जन के भरोसे जिले के 4.42 लाख पशुओं का स्वास्थ्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 12:30 AM IST
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Health of 4.42 lakh animals of the district with the help of 42 surgeons
भिवानी। जिले में अव्यवस्था के कारण पशु चिकित्सालय में पशुपालक पशुओं का उपचार करवाने के लिए तरस रहे हैं। जिले में करीब 4.42 लाख पशु हैं। इन पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल और उपचार करने के लिए महज 42 सर्जन तैनात हैं। जिले में पशुओं के उपचार के लिए 59 अस्पताल हैं। इनमें से 17 अस्पताल ऐसे हैं, जिनमें कोई चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में पशु पालन विभाग ने अन्य सर्जन की अतिरिक्त ड्यूटी इन अस्पताल में लगाई हुई है। चिकित्सकों की कमी की वजह से पशुपालक के घर में बीमार पशु तक चिकित्सक नहीं पहुंच पा रहे हैं। साथ ही अगर पशु चलने की हालत में नहीं है तो पशुपालक को ऊंची दाम देकर निजी पशु चिकित्सकों से उपचार कराना मजबूरी है। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में पशु बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस समय अधिकतर पशु लू लगने की वजह से चारा न खाना, दूध की मात्रा में कमी और पाचन शक्ति कमजोर होना सहित कई रोग आ रहे है।
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92 डिस्पेंसरियों में हो रहा पशुओं का उपचार
जिले में पशुओं के उपचार के लिए 59 पशु अस्पताल बनाए गए हैं। इसके साथ ही 92 डिस्पेंसरी भी बनाई गई है, जिनमें पशुओं के हल्के रोगों का उपचार किया जाता है। इसके अलावा हांसी रोड पर एक सीमन बैंक है। जिले में एक पशु पॉलिक्लिनिक भी बनाया गया है। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच, ब्लड जांच सहित अन्य जांचों के लिए एक लैब है।
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निजी चिकित्सकों से उपचार कराने को मजबूर पशुपालक
जिलेभर में पशु चिकित्सकों और वीएलडीए की कमी है। इसकी वजह से पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी पशुपालक का पशु बीमार है तो उसे उपचार के लिए नजदीक अस्पताल या फिर डिस्पेंसरी में ही लेकर आना होगा। ऐसे में अगर पशु की हालत गंभीर है और वह चलने की हालत में नहीं है, तो पशुपालक को मजबूरी में निजी पशु चिकित्सकों को घर पर उपचार करवाने के लिए बुलाना पड़ेेगा। इसके लिए उन्हें काफी रुपये चुकाने पड़ते हैं। वहीं, चिकित्सक समय पर न पहुंचने की वजह से अनेक पशु दम तोड़ जाते हैं।
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जिले में 20 हजार पंजीकृत गोवंश, दोगुना घूम रहे लावारिस
जिले में पशु पालन विभाग में 38 गोशाला पंजीकृत हैं, जिनमें 20080 गोवंश पंजीकृत किए हुए हैं। हालांकि जिले में कई गांव ऐसे हैं, जिनमें ग्रामीणों ने अपने स्तर पर गोशालाएं बना रखी है, जिनमें बिना सरकारी सहायता के गोवंशों की सेवा की जा रही है। पंजीकृत गोवंशों के रखरखाव और चारे के लिए गोशाला के साथ ही सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में इनसे दोगुना लावारिस पशु सड़कों व खेतों में घूम रहे हैं। शहरी क्षेत्र में सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु आए दिन सड़क हादसे के कारण बन रहे है।
44 खाली पदों पर 28 वीएलडीए की होगी नियुक्ति
जिले में पशुपालन विभाग में वीएलडीए के कुल 184 स्वीकृत पद है, जिनमें से 140 पर वीएलडीए तैनात हैं। वहीं, खाली 44 पदों पर विभाग की ओर से भर्ती प्रक्रिया जारी की गई है, जिनमें से 28 पदों पर वीएलडीए की नियुक्ति जल्द होने की उम्मीद है। वीएलडीए के खाली पद होने की वजह से तैनात वीएलडीए के कंधों पर ही पशु उपचार का भार आया हुआ है।
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पशु विभाग के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सहित अन्य पदों की स्थिति
पद स्वीकृत पद भरे हुए पद खाली पद
डिप्टी सुपरिंटेंडेंट 03 01 01
सहायक 13 11 02
लिपिक 13 10 03
जेएसएस 01 00 01
स्टेनाटाइपिस्ट 01 01 01
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कोट::
गांव में पशुओं का अस्पताल नहीं है। ऐसे में अगर कोई पशु बीमार हो जाता है तो उसको उपचार के लिए दो किलोमीटर की दूरी तय करके अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। साथ ही गंभीर पशुओं के उपचार के लिए सरकारी चिकित्सक न मिलने पर निजी पशु चिकित्सकों से रुपये देकर उपचार करवाना पड़ता है।
- मनोज कुमार, पशुपालक।
फोटो: 45
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गर्मी के मौसम में पशु कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसकी वजह से पशुपालक को हर पल उनके स्वास्थ्य की चिंता सताती रहती है। ऐसे में गांव में पशु अस्पताल न होने से पशुओं का समय पर उपचार नहीं हो पाता। सरकार से अनुरोध है कि गांव में एक पशु अस्पताल बनवाएं, ताकि पशुओं का समय पर उपचार हो सके।

महाबीर शर्मा, पशुपालक।
वर्जन:::
हमारे यहां पशु चिकित्सकों की कमी है, मगर हमारा प्रयास रहता है कि हरेक पशुपालक को बेहतर चिकित्सा सुविधा दे पाए। स्टाफ की कमी के कारण हरेक घर-घर तक तो जाना संभव नहीं है। पशु अस्पताल में जो पशुपालक अपने पशु लाते हैं, उन्हें बेहतर उपचार दिया जाता है।
डॉ. एसपी वर्मा, उप निदेशक
पशु पालन विभाग।
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