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Bhiwani News: हरियाणवी साहित्यकार वीएम बेचैन को मिलेगा पंडित लख्मीचंद सम्मान
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भिवानी। हरियाणवी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक तथा चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में कार्यरत वीएम बेचैन को वर्ष 2021 के लिए पंडित लख्मीचंद सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 23 जुलाई को रोहतक स्थित पंडित लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हाथों प्रदान किया जाएगा।
गौरतलब है कि साहित्यकारों को दिए जाने वाले ये सम्मान पिछले पांच वर्षों से लंबित थे। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने ई-मेल और फोन के माध्यम से वीएम बेचैन को विशेष रूप से समारोह में आमंत्रित किया है। अकादमी ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रोहतक स्थित पंडित लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।
वीएम बेचैन प्रदेश के वरिष्ठ हरियाणवी साहित्यकारों में शामिल हैं। उनकी अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे पांच भाषाओं की कृतियों का हरियाणवी में अनुवाद कर चुके हैं तथा हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने के लिए पिछले तीन दशकों से संघर्षरत हैं।
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हरियाणवी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने बड़े पर्दे की हरियाणवी फिल्म ''बिन तेरे बेचैन'' का निर्माण भी किया है। इसके अलावा भागलपुर (बिहार) स्थित विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की ओर से उन्हें विधावाचस्पति की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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गौरतलब है कि साहित्यकारों को दिए जाने वाले ये सम्मान पिछले पांच वर्षों से लंबित थे। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने ई-मेल और फोन के माध्यम से वीएम बेचैन को विशेष रूप से समारोह में आमंत्रित किया है। अकादमी ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रोहतक स्थित पंडित लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।
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वीएम बेचैन प्रदेश के वरिष्ठ हरियाणवी साहित्यकारों में शामिल हैं। उनकी अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे पांच भाषाओं की कृतियों का हरियाणवी में अनुवाद कर चुके हैं तथा हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने के लिए पिछले तीन दशकों से संघर्षरत हैं।
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हरियाणवी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने बड़े पर्दे की हरियाणवी फिल्म ''बिन तेरे बेचैन'' का निर्माण भी किया है। इसके अलावा भागलपुर (बिहार) स्थित विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की ओर से उन्हें विधावाचस्पति की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है।