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Bhiwani News: सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह प्रकाश पर्व पर हुआ गुरुबाणी कीर्तन और लंगर
Wed, 17 Jan 2024 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 17 Jan 2024 11:37 PM IST
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भिवानी के गुरुद्वारा साहिब में गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व मनाते श्रद्धालु।
भिवानी। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व भिवानी के दोनों गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। देश कौम की खातिर नौ वर्ष की आयु में अपने पिता को कुर्बान करने वाले सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का 357 वें प्रकाश पर्व गुरुद्वारा सिंह सभा घंटा घर व गुरुद्वारा साहिब पुरानी देवसर चुंगी में मनाया गया।
गुरुद्वारा परिसर में लंगर का भी आयोजन भी किया गया। गुरुबाणी कीर्तन के माध्यम से गुरु गोबिंद सिंह के जीवन के बारे में संगतों को विस्तार से गुरमत ज्ञान दिया और गुरु द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने का संदेश दिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार इंदरमोहन सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। अपने चारों पुत्रों को धर्म के लिए कुर्बान कर दिया और पिता गुरु तेग बहादुर ने हिंदू धर्म को बचाने के लिए अपने शिष्य सहित शहीदी प्राप्त की। इस अवसर पर प्रधान प्रेम मुटरेजा, बलदेव सिंह, गगनीश चावला ,सुदेश सिंह, लक्ष्मण सिंह फोरमैन, आराध्या सहित श्रद्धालु मौजूद थे।
गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश उत्सव पर किया कार्यक्रम
भिवानी। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता पालेराम गुर्जर ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। उन्हें विद्वानों का संरक्षक माना जाता है। तोशाम स्थित अपने कार्यालय में गुरु गोबिंद सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके दरबार में 52 कवि और लेखक मौजूद हुआ करते थे। वह संस्कृत के अलावा कई भाषाओं की जानकारी रखते थे। वे मधुर आवाज के भी धनी थे।
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गुरुद्वारा परिसर में लंगर का भी आयोजन भी किया गया। गुरुबाणी कीर्तन के माध्यम से गुरु गोबिंद सिंह के जीवन के बारे में संगतों को विस्तार से गुरमत ज्ञान दिया और गुरु द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने का संदेश दिया। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार इंदरमोहन सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। अपने चारों पुत्रों को धर्म के लिए कुर्बान कर दिया और पिता गुरु तेग बहादुर ने हिंदू धर्म को बचाने के लिए अपने शिष्य सहित शहीदी प्राप्त की। इस अवसर पर प्रधान प्रेम मुटरेजा, बलदेव सिंह, गगनीश चावला ,सुदेश सिंह, लक्ष्मण सिंह फोरमैन, आराध्या सहित श्रद्धालु मौजूद थे।
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गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश उत्सव पर किया कार्यक्रम
भिवानी। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता पालेराम गुर्जर ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। उन्हें विद्वानों का संरक्षक माना जाता है। तोशाम स्थित अपने कार्यालय में गुरु गोबिंद सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके दरबार में 52 कवि और लेखक मौजूद हुआ करते थे। वह संस्कृत के अलावा कई भाषाओं की जानकारी रखते थे। वे मधुर आवाज के भी धनी थे।
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