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कागजों में शुरू हुई सरसों की सरकारी खरीद, मंडियों से गायब खरीद एजेंसियों के कर्मचारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 12:42 AM IST
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Government procurement of mustard started on paper, employees of procurement agencies missing from mandis
नई अनाजमंडी में नमी युक्त सरसों को धूप में सुखाता किसान। संवाद - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। मंडियों में अधिकारिक रूप से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन मंडियों से सरकारी एजेंसियों के कर्मचारी ही गायब हैं। वहीं, सरकार को एक भी सरसों का दाना खरीद के लिए नहीं मिला है।
हालांकि जिले की मुख्य मंडियों में अब तक 25 से 30 हजार क्विंटल तक सरसों की आवक संबंधित मार्केट कमेटी के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है। प्राइवेट बोली में किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल के एमएसपी से कहीं अधिक अच्छे दाम हाथों हाथ भुगतान में मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन किसानों ने फसल सरकार को बेचने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया था, वे भी निजी एजेंसियों को बेच रहे हैं।
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भिवानी जिले में मेरी फसल मेरा पोर्टल पर अब तक करीब 67 हजार किसान अपनी सरसों और गेहूं की फसल का रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। रजिस्टर्ड किसान सरसों लेकर मंडियों में आना भी शुरू हो गए हैं। ये किसान सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों की तलाश में नहीं, बल्कि फसल की मोटी बोली लगाने वालों को ढूंढते हैं। सरसों में तेल की मात्रा की जांच के हिसाब से किसानों की फसल का खुली मार्केट में दाम रोजाना मौके पर तय होती है, जिस किसान की सरसों अच्छी है, उसे साढ़े छह हजार रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं। भुगतान भी नकद हो रहा है। मंडी आए किसानों का कहना है कि सरकार ने इस बार सरसों का एमएसपी मात्र 5050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं, मंडी पहुंचते ही सरसों के बेहतर दाम हाथों हाथ मिल रहे हैं। अगर सरकारी खरीद का इंतजार किया तो कई दिन तो मंडी में फसल सुखानी पड़ेगी, फिर कहीं जाकर फसल एमएसपी पर बिक भी गई तो उन्हें भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इसमें भी कागजी औपचारिकताओं का झंझट और पचड़ा अलग से झेलना पड़ेगा। (संवाद)
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तेल मिलों पर भी बैठा चौबीसों घंटे पहरा
सरसों की आवक के साथ ही मार्केट फीस की चोरी रोकने के लिए हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड अधिकारियों ने तेल मिलों की निगरानी भी बढ़ा दी है। कर्मचारियों का चौबीसों घंटे पहरा लगाया है, जिससे कोई भी तेल मिल सीधे तौर पर सरसों की खरीद नहीं कर सकेगा। अगर खरीद करता भी है तो उस पर मोटा जुर्माना वसूला जाएगा।
मार्केट में भाव ज्यादा
मेरी फसल मेरा पोर्टल पर अब तक करीब 67 हजार किसानों ने अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि करीब 80 हजार किसानों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना था। इस बार मार्केट में सरसों और गेहूं का भाव ज्यादा है। इसलिए किसान भी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का रुझान कम दिखा रहे हैं। 15 से 18 मार्च तक रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल खोला था, फिलहाल बंद है।
- डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है
हेफेड के हिस्से आने वाली संबंधित मंडियों में सरसों खरीद के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हुई है, लेकिन एमएसपी कम होने की वजह से अब तक किसान सरकारी खरीद में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हमारी खरीद के लिए तैयारी पूरी है। अगर कोई किसान एजेंसी को सरसों बेचना चाहता है तो उसका स्वागत है।

-अनुराग गुप्ता, जिला प्रबंधक, हेफेड भिवानी।
मिलों की कर रहे निगरानी
तेल मिलों की निगरानी लगातार की जा रही है। कोई भी तेल मिल मालिक सीधे तौर पर सरसों की खरीद नहीं कर सकता है। मंडी में गेट पास कटने के बाद ही सरसों की प्राइवेट बोली होगी, जिसकी निर्धारित मार्केट फीस सरकारी खजाने में जाएगी।
-योगेश कुमार शर्मा, मंडी सुपरवाइजर, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड भिवानी।
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