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Bhiwani News: सीबीआई अधिकारी और जज बनकर 43.5 लाख की ठगी, महिला को 18 घंटे ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा
Wed, 02 Jul 2025 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 02 Jul 2025 12:50 AM IST
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साइबर थाना
भिवानी। शहर के पॉश इलाके सेक्टर-13 निवासी एक महिला से साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और फिर जज बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 43 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर डाली। महिला को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर करीब 18 घंटे तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अलग-अलग तारीखों में आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई गई। बेटी से बात होने के बाद ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद पीड़िता ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई अफसर बनकर धमकाया, फिर कोर्ट सीन दिखाकर डराया
पीड़िता ने बताया कि 2003 में उसका पति एक सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हो चुका है और दो बेटे विदेश में रहते हैं। 15 जून को उसे एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई जिसमें एक शख्स पुलिस की वर्दी में था और उसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने कहा कि महिला के आधार कार्ड से जारी सिम का इस्तेमाल अवैध लेन-देन और ब्लैक मनी में हुआ है, और उसके खिलाफ 26 केस दर्ज हैं। अगली कॉल पर एक कोर्ट जैसा माहौल दिखाया गया जिसमें खुद को जज बताकर आरोपी ने डराया और कहा कि फैसला उसी दिन सुनाया जाएगा।
किस्तों में भिजवाए लाखों रुपये, अंत में बेटी से बात कर खुला राज
ठगों ने पहली बार 3.5 लाख रुपये मांगे गए जो महिला ने 16 जून को आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। 17 जून को फिर कॉल आई और 18 घंटे तक उसे डिजिटल अरेस्ट रखा गया। 18 जून को दस लाख, 20 जून को फिर दस लाख और 25 जून को पांच लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इसके बाद भी रुपये ट्रांसफर करवाए। जब पैसे खत्म होने लगे, तब महिला ने यह बात अपनी बेटी से साझा की, जिससे पता चला कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है।
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सेक्टर-13 निवासी एक महिला से साइबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 43.5 लाख रुपये की ठगी की गई है। सभी नागरिकों से अपील है कि यदि किसी अनजान नंबर से वीडियो कॉल आकर किसी अपराध में लिप्त होने का भय दिखाकर पैसे मांगे जाएं तो तुरंत नजदीकी थाना या साइबर थाना में शिकायत करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।
-सुमित कुमार, एसएचओ, साइबर क्राइम थाना, भिवानी।
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सीबीआई अफसर बनकर धमकाया, फिर कोर्ट सीन दिखाकर डराया
पीड़िता ने बताया कि 2003 में उसका पति एक सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हो चुका है और दो बेटे विदेश में रहते हैं। 15 जून को उसे एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई जिसमें एक शख्स पुलिस की वर्दी में था और उसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने कहा कि महिला के आधार कार्ड से जारी सिम का इस्तेमाल अवैध लेन-देन और ब्लैक मनी में हुआ है, और उसके खिलाफ 26 केस दर्ज हैं। अगली कॉल पर एक कोर्ट जैसा माहौल दिखाया गया जिसमें खुद को जज बताकर आरोपी ने डराया और कहा कि फैसला उसी दिन सुनाया जाएगा।
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किस्तों में भिजवाए लाखों रुपये, अंत में बेटी से बात कर खुला राज
ठगों ने पहली बार 3.5 लाख रुपये मांगे गए जो महिला ने 16 जून को आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर कर दिए। 17 जून को फिर कॉल आई और 18 घंटे तक उसे डिजिटल अरेस्ट रखा गया। 18 जून को दस लाख, 20 जून को फिर दस लाख और 25 जून को पांच लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इसके बाद भी रुपये ट्रांसफर करवाए। जब पैसे खत्म होने लगे, तब महिला ने यह बात अपनी बेटी से साझा की, जिससे पता चला कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है।
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सेक्टर-13 निवासी एक महिला से साइबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 43.5 लाख रुपये की ठगी की गई है। सभी नागरिकों से अपील है कि यदि किसी अनजान नंबर से वीडियो कॉल आकर किसी अपराध में लिप्त होने का भय दिखाकर पैसे मांगे जाएं तो तुरंत नजदीकी थाना या साइबर थाना में शिकायत करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।
-सुमित कुमार, एसएचओ, साइबर क्राइम थाना, भिवानी।