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Bhiwani News: गरीब एकल और अनाथ बच्चों की पढ़ाई के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता राशि
Wed, 19 Feb 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:04 AM IST
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भिवानी। गरीब एकल और अनाथ बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से स्पॉन्सरशिप स्कीम चलाई जा रही है।
उपायुक्त महावीर कौशिक ने बताया कि इस योजना के तहत पात्र बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पात्र परिवार में केवल दो बच्चों को ही इस योजना का लाभ दिया जा सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए शर्तें निर्धारित की गई है। शर्तों के अनुसार बच्चे अनाथ हो और आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। ऐसे बच्चे जिनकी माता विधवा, तलाकशुदा अथवा परिवार ने छोड़ दिया हो।
बच्चे बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी या शादीशुदा बहन के पास रहते हों। शर्त के अनुसार माता-पिता दुर्घटना के कारण असहाय बन गए हो और वित्तीय व शारीरिक दोनों रूप से बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ हों, तो ऐसे बच्चों को योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
जिन बच्चों के माता-पिता किसी भयानक बीमारी जैसे एड्स या कैंसर से पीड़ित हो तो भी वे योजना के दायरे में आएंगे। इसके लिए यह शर्त भी लगाई गई है कि पात्र बच्चा किसी अन्य विभाग से आर्थिक सहायता ले रहा हो। इसके साथ ही बच्चा जिसके पास रह रहा हो वह सरकारी नौकरी या सरकारी पेंशन नहीं ले रहा हो। उन्होंने बताया कि पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन स्कीम के लाभार्थी भी योजना के तहत आते हैं।
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इस योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज होने भी आवश्यक है। इन दस्तावेजों में स्कूल से बच्चों के बारे में प्रमाणपत्र होना चाहिए। मृतक माता-पिता के मृत्यु का प्रमाणपत्र की फोटो प्रति आवेदन के साथ लगानी होगी। बच्चा जिसके पास रहता है उसके परिवार पहचान पत्र की फोटो प्रति होना जरूरी है।
बच्चा जिसके पास रहता है उसके आधार कार्ड की फोटो कॉपी व बच्चों के साथ उसकी फोटो होना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि परिवार की सालाना आय ग्रामीण क्षेत्र में 72,000 रुपये और शहरी क्षेत्र में 96,000 रुपये का आय प्रमाणपत्र साथ लगाना होगा। आवेदन के साथ बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र व आधार कार्ड की फोटो प्रति लगानी होगी।
ग्राम सरपंच, वार्ड मेंबर, आंगनबाड़ी से बच्चे व उसके परिवार के बारे में प्रमाणपत्र लेना होगा। बच्चा जिसके पास रह रहा है उसे यह शपथ पत्र देना होगा कि बच्चा किसी अन्य विभाग से आर्थिक सहायता नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी दस्तावेजों को पूरा करने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। योजना की अधिक जानकारी के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर सकते हैं।
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उपायुक्त महावीर कौशिक ने बताया कि इस योजना के तहत पात्र बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पात्र परिवार में केवल दो बच्चों को ही इस योजना का लाभ दिया जा सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए शर्तें निर्धारित की गई है। शर्तों के अनुसार बच्चे अनाथ हो और आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। ऐसे बच्चे जिनकी माता विधवा, तलाकशुदा अथवा परिवार ने छोड़ दिया हो।
बच्चे बुआ-फूफा, नाना-नानी, मामा-मामी या शादीशुदा बहन के पास रहते हों। शर्त के अनुसार माता-पिता दुर्घटना के कारण असहाय बन गए हो और वित्तीय व शारीरिक दोनों रूप से बच्चों की देखभाल करने में असमर्थ हों, तो ऐसे बच्चों को योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
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जिन बच्चों के माता-पिता किसी भयानक बीमारी जैसे एड्स या कैंसर से पीड़ित हो तो भी वे योजना के दायरे में आएंगे। इसके लिए यह शर्त भी लगाई गई है कि पात्र बच्चा किसी अन्य विभाग से आर्थिक सहायता ले रहा हो। इसके साथ ही बच्चा जिसके पास रह रहा हो वह सरकारी नौकरी या सरकारी पेंशन नहीं ले रहा हो। उन्होंने बताया कि पीएम केयर फॉर चिल्ड्रन स्कीम के लाभार्थी भी योजना के तहत आते हैं।
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इस योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज होने भी आवश्यक है। इन दस्तावेजों में स्कूल से बच्चों के बारे में प्रमाणपत्र होना चाहिए। मृतक माता-पिता के मृत्यु का प्रमाणपत्र की फोटो प्रति आवेदन के साथ लगानी होगी। बच्चा जिसके पास रहता है उसके परिवार पहचान पत्र की फोटो प्रति होना जरूरी है।
बच्चा जिसके पास रहता है उसके आधार कार्ड की फोटो कॉपी व बच्चों के साथ उसकी फोटो होना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि परिवार की सालाना आय ग्रामीण क्षेत्र में 72,000 रुपये और शहरी क्षेत्र में 96,000 रुपये का आय प्रमाणपत्र साथ लगाना होगा। आवेदन के साथ बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र व आधार कार्ड की फोटो प्रति लगानी होगी।
ग्राम सरपंच, वार्ड मेंबर, आंगनबाड़ी से बच्चे व उसके परिवार के बारे में प्रमाणपत्र लेना होगा। बच्चा जिसके पास रह रहा है उसे यह शपथ पत्र देना होगा कि बच्चा किसी अन्य विभाग से आर्थिक सहायता नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी दस्तावेजों को पूरा करने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। योजना की अधिक जानकारी के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर सकते हैं।