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Bhiwani News: नवजात की मौत मामले में परिजनों ने दिया धरना, जांच के आदेश पर लिया शव
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जिला नागरिक अस्पताल में जच्चा बच्चा वार्ड के बाहर धरना पर बैठे परिजन व जनसंगठन पदाधिकारी। संवा
भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के मामले में बुधवार को परिजनों और जनसंगठनों ने धरना दिया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिविल सर्जन ने नैक्लीजेंसी बोर्ड से जांच के आदेश दिए जिसके बाद पांच दिन से शव लेने से इन्कार कर रहे परिजनों ने उसे लिया और अंतिम संस्कार किया।
बैंक कॉलोनी निवासी कुलदीप ने बताया कि उनकी पत्नी संतोष देवी को चौथी डिलीवरी के लिए शुक्रवार को नागरिक अस्पताल लाया गया था। शाम करीब चार बजे जच्चा-बच्चा वार्ड के बेड पर ही उन्हें तेज प्रसव पीड़ा हुई। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ ने न तो प्रसव पर ध्यान दिया और न ही महिला को समय रहते लेबर रूम में शिफ्ट किया। ऐसे में बेड पर ही नवजात का जन्म हुआ और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
कुलदीप के अनुसार तीन बेटियों के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशी थी। 21 अक्तूबर को नवजात की छठी का उत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी थी लेकिन इस घटना से परिवार सदमे में है। परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव लेने से इन्कार कर दिया था और दोषियों पर कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी थी। बुधवार को अस्पताल परिसर में धरने के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
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धरने में जनसंघर्ष समिति के संयोजक कामरेड ओमप्रकाश, दलित अधिकार मंच के सुखदेव पालुवास, करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राहुल राणा, पार्षद कर्मबीर और गो रक्षा दल के प्रधान संजय परमार सहित अन्य लोग शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। उन्होंने जिम्मेदार चिकित्सकों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा जच्चा-बच्चा वार्ड की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिविल सर्जन भिवानी ने नवजात की मौत के मामले की नैक्लीजेंसी बोर्ड से जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर शव लिया और उसका विधिवत अंतिम संस्कार किया। जनसंगठनों ने मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग दोहराई।
ये रखीं अस्पताल प्रशासन के सामने मांगें
धरनारत लोगों ने मांग की कि ड्यूटी पर तैनात लापरवाह चिकित्सकों और स्टाफ कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। जच्चा-बच्चा वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए ताकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और व्यवहार पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में रंगीन अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध कराई जाए ताकि गरीब मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों के चक्कर न काटने पड़ें।
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बैंक कॉलोनी निवासी कुलदीप ने बताया कि उनकी पत्नी संतोष देवी को चौथी डिलीवरी के लिए शुक्रवार को नागरिक अस्पताल लाया गया था। शाम करीब चार बजे जच्चा-बच्चा वार्ड के बेड पर ही उन्हें तेज प्रसव पीड़ा हुई। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और स्टाफ ने न तो प्रसव पर ध्यान दिया और न ही महिला को समय रहते लेबर रूम में शिफ्ट किया। ऐसे में बेड पर ही नवजात का जन्म हुआ और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।
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कुलदीप के अनुसार तीन बेटियों के बाद बेटे के जन्म से परिवार में खुशी थी। 21 अक्तूबर को नवजात की छठी का उत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी थी लेकिन इस घटना से परिवार सदमे में है। परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव लेने से इन्कार कर दिया था और दोषियों पर कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी थी। बुधवार को अस्पताल परिसर में धरने के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
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धरने में जनसंघर्ष समिति के संयोजक कामरेड ओमप्रकाश, दलित अधिकार मंच के सुखदेव पालुवास, करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राहुल राणा, पार्षद कर्मबीर और गो रक्षा दल के प्रधान संजय परमार सहित अन्य लोग शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। उन्होंने जिम्मेदार चिकित्सकों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा जच्चा-बच्चा वार्ड की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिविल सर्जन भिवानी ने नवजात की मौत के मामले की नैक्लीजेंसी बोर्ड से जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर शव लिया और उसका विधिवत अंतिम संस्कार किया। जनसंगठनों ने मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग दोहराई।
ये रखीं अस्पताल प्रशासन के सामने मांगें
धरनारत लोगों ने मांग की कि ड्यूटी पर तैनात लापरवाह चिकित्सकों और स्टाफ कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। जच्चा-बच्चा वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए ताकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और व्यवहार पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में रंगीन अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध कराई जाए ताकि गरीब मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों के चक्कर न काटने पड़ें।