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जिले में नहीं चल रहा कोई फर्जी स्कूल, डीईओ-डीईईओ को देना होगा शपथ पत्र
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प्रदेश भर में चल रहे 1083 गैर मान्यता व 1894 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई को लेकर सेकेंडरी शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त हिदायतें जारी की हैं। इन हिदायतों के अनुसार अब सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को शपथ पत्र देना होगा कि उनके जिले में कोई फर्जी स्कूल नहीं है। इतना ही नहीं शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को शपथ पत्र और सर्टिफिकेट 15 जुलाई तक शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराए जाने की भी सख्त हिदायतें दी हैं। अगर निर्धारित अवधि के दौरान कोई भी शिक्षा अधिकारी इसमें कोताही बरतता है तो फिर उसके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कार्रवाई भी अमल में लाए जाने की चेतावनी पत्र में दी गई है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार व संगठन के महासचिव भारत भूषण बंसल ने अक्तूबर 2017 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली थी। जिसमें प्रदेशभर में चल रहे गैर मान्यता संबंधी निजी स्कूलों पर कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई थी। न्यायालय ने भी अब तक इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार से कई बार स्टेटस रिपोर्ट तलब की गई। अब तक इस मामले के जवाब में न्यायालय के समक्ष 1083 गैर मान्यता प्राप्त व 1894 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को जानकारी उपलब्ध कराते हुए शपथ पत्र दिया हुआ है। हाई कोर्ट ने भी सरकार को इन स्कूलों पर कार्रवाई की सख्त आदेश देते हुए इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट 19 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान तलब की है। अब शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए उनसे अपने जिलों में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराए जाने व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई की रिपोर्ट के संबंध में शपथ पत्र देना होगा। निदेशालय ने इसका फार्मेट भी पत्र के साथ जारी कर दिया है। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी के साथ मौलिक शिक्षा अधिकारी को भी अपने हस्ताक्षर करने होंगे। निदेशालय ने आदेश में यह भी स्पष्ट करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि अगर गलत सूचनाएं उपलब्ध कराई गई तो उनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से शपथ पत्र और सर्टिफिकेट लेने का अहम फैसला लिया है, जो इस मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचा देगा।
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प्रत्येक शिक्षा अधिकारी को देने होंगे पांच शपथ पत्र और सर्टिफिकेट
निदेशालय की ओर से जारी किए गए आदेशों के अनुसार प्रत्येक शिक्षा अधिकारी को पांच शपथ पत्र और सर्टिफिकेट देने होंगे। पहले सर्टिफिकेट व शपथ पत्र में कितने मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं, इनकी जानकारी देनी होगी और किस कक्षा तक चल रहे हैं। इसके अलावा जो स्कूल मान्यता की प्रक्रिया में चल रहे हैं, उनका अलग से सर्टिफिकेट कक्षा वार देना होगा। तीसरा सर्टिफिकेट व शपथ पत्र एग्जिसिटिंग स्कूलों की जानकारी देनी होगी। कितनों ने अब तक स्थायी मान्यता ली है वो उसी कक्षा तक चल रहे हैं या फिर ऊपर की कक्षाएं लगा रहे हैं। जिन एग्जिसिटिंग स्कूलों ने अब तक फाइल नहीं दी है, उनका शपथ पत्र व सर्टिफिकेट अलग से देना होगा। इसके अलावा अस्थायी मान्यता संबंधी स्कूलों का शपथ पत्र व सर्टिफिकेट भी अलग से देना होगा। इसके साथ ही गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के संबंध में भी अलग से हलफनामा व सर्टिफिकेट देना होगा।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार व संगठन के महासचिव भारत भूषण बंसल ने अक्तूबर 2017 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली थी। जिसमें प्रदेशभर में चल रहे गैर मान्यता संबंधी निजी स्कूलों पर कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई थी। न्यायालय ने भी अब तक इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार से कई बार स्टेटस रिपोर्ट तलब की गई। अब तक इस मामले के जवाब में न्यायालय के समक्ष 1083 गैर मान्यता प्राप्त व 1894 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को जानकारी उपलब्ध कराते हुए शपथ पत्र दिया हुआ है। हाई कोर्ट ने भी सरकार को इन स्कूलों पर कार्रवाई की सख्त आदेश देते हुए इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट 19 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान तलब की है। अब शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए उनसे अपने जिलों में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराए जाने व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई की रिपोर्ट के संबंध में शपथ पत्र देना होगा। निदेशालय ने इसका फार्मेट भी पत्र के साथ जारी कर दिया है। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी के साथ मौलिक शिक्षा अधिकारी को भी अपने हस्ताक्षर करने होंगे। निदेशालय ने आदेश में यह भी स्पष्ट करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि अगर गलत सूचनाएं उपलब्ध कराई गई तो उनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से शपथ पत्र और सर्टिफिकेट लेने का अहम फैसला लिया है, जो इस मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचा देगा।
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प्रत्येक शिक्षा अधिकारी को देने होंगे पांच शपथ पत्र और सर्टिफिकेट
निदेशालय की ओर से जारी किए गए आदेशों के अनुसार प्रत्येक शिक्षा अधिकारी को पांच शपथ पत्र और सर्टिफिकेट देने होंगे। पहले सर्टिफिकेट व शपथ पत्र में कितने मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं, इनकी जानकारी देनी होगी और किस कक्षा तक चल रहे हैं। इसके अलावा जो स्कूल मान्यता की प्रक्रिया में चल रहे हैं, उनका अलग से सर्टिफिकेट कक्षा वार देना होगा। तीसरा सर्टिफिकेट व शपथ पत्र एग्जिसिटिंग स्कूलों की जानकारी देनी होगी। कितनों ने अब तक स्थायी मान्यता ली है वो उसी कक्षा तक चल रहे हैं या फिर ऊपर की कक्षाएं लगा रहे हैं। जिन एग्जिसिटिंग स्कूलों ने अब तक फाइल नहीं दी है, उनका शपथ पत्र व सर्टिफिकेट अलग से देना होगा। इसके अलावा अस्थायी मान्यता संबंधी स्कूलों का शपथ पत्र व सर्टिफिकेट भी अलग से देना होगा। इसके साथ ही गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के संबंध में भी अलग से हलफनामा व सर्टिफिकेट देना होगा।