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Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Due to setting of Jupiter and Venus, Shehnai will not be played in May-June, Saav will remain cool in the heat of May-June.

Bhiwani News: गुरु और शुक्र अस्त होने के कारण मई-जून में नहीं बजेंगी शहनाई, मई-जून की गर्मी में सावे रहेंगे ठंडे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jan 2024 09:38 PM IST
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Due to setting of Jupiter and Venus, Shehnai will not be played in May-June, Saav will remain cool in the heat of May-June.
तोशाम। हर साल मई और जून में शादियों के मुहूर्त भरपूर मुहूर्त होते हैं। लेकिन इस बार 2024 में गुरु और शुक्र अस्त होने से मई और जून में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है। इसके बाद चातुर्मास होने से चार माह कोई विवाह मुहूर्त नहीं है। मात्र दो दिन आखातीज और देवउठनी एकादशी पर सावों का अबूझ मुहूर्त होने से शादियां हो सकेंगी।
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पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि 21 अप्रैल 2024 से 30 जून तक शुक्र अस्त रहेगा और इसी बीच 3 मई से 5 जून तक गुरु अस्त दोष भी रहेगा। 17 जुलाई से 12 नवंबर तक देवशयन काल रहेगा। इसलिए गुरु और शुक्र अस्त होने से विवाह समेत मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। लेकिन वैशाख शुक्ल तृतीया आखातीज 10 मई 2024 को अबूझ मुहूर्त होने से विवाह करने में कोई दोष नहीं रहेगा। अक्षय तृतीया को सूर्य और चन्द्रमा उच्च के होते हैं। यानी सूर्य मेष राशि में और चन्द्रमा वृषभ राशि में होते हैं। इससे आखातीज को किसी प्रकार का दोष नहीं लगता।
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उन्होंने कहा कि इसी प्रकार आषाढ़ शुक्ल एकादशी 17 जुलाई 2024 को देवशयनी एकादशी है। कार्तिक शुक्ला एकादशी 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इन चार माह के देवशयन काल होने से विवाह समेत मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। ऐसे में अप्रैल से लगाकर नवंबर के बीच आखातीज और देवउठनी एकादशी पर विवाह के अबूझ मुहूर्त रहेंगे। मलमास के बाद 16 जनवरी से शहनाई गूंजेगी। इसके बाद 20, 22, 30, 31 जनवरी को भी शादी के मुहूर्त हैं। फरवरी में 4, 6, 12, 18 तक और मार्च में 4, 5, 6, 7 को मांगलिक एवं धार्मिक आयोजन हो सकेंगे। इसके बाद फिर मार्च मध्य से अप्रैल के मध्य तक मलमास रहेगा। अप्रैल में 18, 19, जुलाई में 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15 को विवाह के मुहूर्त रहेंगे। उसके बाद 17 जुलाई से 12 नवंबर तक भगवान विष्णु शयन मुद्रा में रहने से चतुर्मास देवशयन काल रहेगा।
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श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि देव उठनी एकादशी को 12 नवंबर से तुलसी विवाह के साथ ही पुन विवाह मंगल कार्य प्रारंभ होंगे। नवंबर में 12, 14,17, 18, 22, 23, 24, 25, 26, 27 दिसंबर में 5, 6, 7, 11 के विवाह शुभप्रद रहेंगे।
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