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एआई से डरना नहीं, अपने कौशल को निखारना जरूरी : डॉ. कपूर
Thu, 09 Oct 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 09 Oct 2025 01:19 AM IST
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भिवानी। चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी के दिशा-निर्देशन में आयोजित एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला में डॉ. निमिष कपूर ने विद्यार्थियों को एआई से डरने के बजाय अपने कौशल को निखारने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि किस प्रकार एआई में दक्षता हासिल करके विद्यार्थी विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
डॉ. कपूर ने कई एआई टूल्स की जानकारी दी जो न केवल वीडियो निर्माण में बल्कि शोध कार्य में भी सहायक हैं। उन्होंने चैट जीपीटी, जैमिनी और परप्लेक्सिटी को शोध कार्य के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवा में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है लेकिन यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि एआई नौकरियां छीन लेगा। इसलिए विद्यार्थियों को एआई-पावर्ड भविष्य के लिए स्वयं को स्किल्ड बनाना और इसे सहायक के रूप में अपनाना चाहिए।
कार्यशाला की अध्यक्षता डीन अकादमिक अफेयर प्रो. दिनेश मदान ने की। उन्होंने कहा कि एआई को अवसर के रूप में देखना चाहिए जिससे विद्यार्थी अपने कौशल बढ़ा सकें और भविष्य में शोध के नए तरीके विकसित कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान और तकनीक मनुष्य द्वारा विकसित किए गए हैं और समय के साथ तकनीक और कौशल दोनों विकसित होते हैं। इसलिए एआई से डरने की नहीं बल्कि अपने कौशल को निखारने की जरूरत है।
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कार्यशाला में अतिथियों का धन्यवाद मीडिया एवं जनसंचार अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्खा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमा साह ने किया। इस अवसर पर डॉ. स्नेह लता शर्मा और अभिषेक चंदेल भी उपस्थित रहे।
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डॉ. कपूर ने कई एआई टूल्स की जानकारी दी जो न केवल वीडियो निर्माण में बल्कि शोध कार्य में भी सहायक हैं। उन्होंने चैट जीपीटी, जैमिनी और परप्लेक्सिटी को शोध कार्य के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवा में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है लेकिन यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि एआई नौकरियां छीन लेगा। इसलिए विद्यार्थियों को एआई-पावर्ड भविष्य के लिए स्वयं को स्किल्ड बनाना और इसे सहायक के रूप में अपनाना चाहिए।
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कार्यशाला की अध्यक्षता डीन अकादमिक अफेयर प्रो. दिनेश मदान ने की। उन्होंने कहा कि एआई को अवसर के रूप में देखना चाहिए जिससे विद्यार्थी अपने कौशल बढ़ा सकें और भविष्य में शोध के नए तरीके विकसित कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान और तकनीक मनुष्य द्वारा विकसित किए गए हैं और समय के साथ तकनीक और कौशल दोनों विकसित होते हैं। इसलिए एआई से डरने की नहीं बल्कि अपने कौशल को निखारने की जरूरत है।
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कार्यशाला में अतिथियों का धन्यवाद मीडिया एवं जनसंचार अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्खा सिंह ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. उमा साह ने किया। इस अवसर पर डॉ. स्नेह लता शर्मा और अभिषेक चंदेल भी उपस्थित रहे।