फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Dilemma: Officers entangled in the exchange of eight crores, farmers trapped in the vortex of Bhavantar

दुविधा: आठ करोड़ के फेर में उलझे अधिकारी, भावांतर के भंवर में फंसे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jan 2023 10:54 PM IST
विज्ञापन
Dilemma: Officers entangled in the exchange of eight crores, farmers trapped in the vortex of Bhavantar
अनाज मंडी में लगी बाजरे की ढेरी। संवाद - फोटो : Bhiwani
भिवानी। सरकार से आठ करोड़ के बजट के फेर में अधिकारी उलझे हैं, जिसकी वजह से भावांतर के भंवर से तीन माह बाद भी किसान बाहर नहीं निकल पाए हैं। अधिकतर किसानों को भावांतर का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि भावांतर की एक किस्त जारी भी की जा चुकी है। इसमें कुछ किसानों को ही भुगतान हुआ है। जिन किसानों को भुगतान हुआ है, उनके दाम भी भावांतर में दर्शायी राशि से कम हुआ है। वहीं अधिकारी भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिसकी वजह से किसान भी भुगतान को लेकर भटक रहे हैं।
विज्ञापन

जिले में 11 मंडियों में पिछले साल एक अक्तूबर से बाजरा की सरकारी खरीद शुरू हुई थी। मात्र 11 दिन में हैफेड ने नौ मंडियों में 293 गांवों के 9022 किसानों का 22211 मीट्रिक टन बाजरा खरीद किया था। जिन किसानों का बाजरा हैफेड ने सीधा नहीं खरीदा उन किसानों ने भावांतर के तहत प्राइवेट लोगों को फसल बेच दी। इसे भावांतर के तहत भुगतान सीधा किसानों के खाते में किया जाना था। भावांतर में कम दाम में बाजरा बेचने के बावजूद सरकार से 450 रुपये प्रति क्विंटल का प्रोत्साहन मिलना था, जो अभी तक नहीं मिला है। अधिकारियों ने बजट कम पड़ने पर आठ करोड़ रुपये की डिमांड भेजी है। इन रुपयों के आने के बाद ही किसानों का भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन

किसान दयाकिशन, माईराम, भलेराम, कमल सिंह, भानाराम ने बताया कि अक्तूबर में बाजरे की प्राइवेट बोली 1700 से 1750 रुपये तक लगाई जा रही थी। लेकिन आठ और 10 अक्तूबर को अचानक ही बाजरे का मार्केट भाव 1800 से 1850 रुपये तक पहुंच गया था। इन किसानों ने मार्केट में 1850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से अपना बाजरा बेच दिया और उसका भावांतर योजना का लाभ लेने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पर रजिस्ट्रेशन करा दिया था। इसमें 50 रुपये का अंतर आया तो भुगतान को लेकर संशय बन गया। लेकिन फिर भी कुछ किसानों के खाते में भावांतर का काफी कम पैसा डाला गया। जबकि अधिकतर किसानों को भी भावांतर का तीन माह बाद भी कोई भुगतान नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने 1700 रुपये में अपनी फसल बेची वो पैसा तो उनकी जेब में गया, मगर भावांतर के सरकार द्वारा दिए जाने वाले 450 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान आज तक नहीं हुआ है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सरकार से भावांतर का भुगतान करने के लिए बजट मांगा है, लेकिन अभी तक बजट नहीं आने की वजह से भुगतान भी अटका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक से 11 अक्तूबर तक ये हुई जिले की मंडियों में बाजरा की खरीद
मंडी गांव किसान बाजरा खरीद टन में
बवानीखेड़ा 25 395 703
भिवानी 52 2302 5195
जूईकलां 41 1842 4511
तोशाम 38 1592 3970
कैरू 00 00 00
ईशरवाल 00 00 00
लोहारू 33 699 1789
ढिगावा मंडी 22 224 714
बहल 49 1494 4324
पाजू 00 00 00
सिवानी 33 474 1004
कुल 293 9022 22211
भावांतर योजना के तहत मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों का रजिस्ट्रेशन कृषि विभाग ने करा दिया था। लेकिन इसका भुगतान कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से किसानों को होना है। मैने अपने स्तर पर पता किया तो बताया गया कि आठ करोड़ का बजट सरकार से भावांतर भुगतान के लिए मांगा गया है। बजट आने पर ही भुगतान होगा। काफी किसान भावांतर से वंचित हैं।
- डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक भिवानी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed