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Bhiwani News: दोस्त की जान बचाने के लिए तैरना नहीं आने के बाद भी जलघर के टैंक में कूदा दोस्त
Fri, 03 May 2024 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 03 May 2024 12:22 AM IST
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तोशाम (भिवानी)। जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, यह कहावत बुधवार को गांव पटौदी कलां में चरितार्थ हुई। जब खेलते-खेलते एक बालक जलघर के पानी से भरे टैंक में अपनी चप्पल निकालते समय पैर फिसलने से जा गिरा। जिसको बचाने के लिए उसका दोस्त भी टैंक में कूद गया। टैंक के बाहर खड़े तीसरे बच्चे की रोने की आवाज सुनकर उनको बचाने के लिए गांव के दो युवा अपनी जान पर खेलकर टैंक में कूदे व दोनों को सकुशल निकाल लिया। मासूमों के परिजनों ने दोनों युवकों का धन्यवाद किया।
बुधवार शाम को पटौदी कलां निवासी करीब 12 वर्षीय दीपांशु व योगेश दोनों दोस्त खेलने के बाद जलघर के टैंक में पानी कैसे आता है की खोज कर रहे थे। इस दौरान दीपांशु की चप्पल जलघर में गिर गई। डंडी की सहायता से जब दीपांशु चप्पल निकालने लगा तो उसका पैर फिसल गया। इससे दीपांशु पानी से भरे टैंक में गिर गया। दीपांशु ने बचाने के लिए अपने दोस्त योगेश को आवाज लगाई। बिना तैरना आते हुए भी योगेश ने उसे बचाने के लिए टैंक में छलांग लगा दी। जिसके बाद दोनों मासूम डूबने लगे तो योगेश के भाई हितेश ने रोना शुरू किया। हितेश की रोने की आवाज सुनकर गांव के ही दो युवा अमित व अंकित मौके पर पहुंच गए। ये दोनों टैंक में कूद गए व दोनों मासूमों को बचा लिया।
मासूम योगेश के पिता कुलदीप जटासरा ने दोनों का धन्यवाद किया। कुलदीप ने बताया कि योगेश को तैरना ना आते हुए भी सच्ची दोस्ती को निभाते हुए टैंक में कूद गया। दोनों युवकों के साहस की ग्रामीणों ने खूब सराहना की। इसके बाद दोनों बच्चों को अस्पताल लेकर गए।
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बुधवार शाम को पटौदी कलां निवासी करीब 12 वर्षीय दीपांशु व योगेश दोनों दोस्त खेलने के बाद जलघर के टैंक में पानी कैसे आता है की खोज कर रहे थे। इस दौरान दीपांशु की चप्पल जलघर में गिर गई। डंडी की सहायता से जब दीपांशु चप्पल निकालने लगा तो उसका पैर फिसल गया। इससे दीपांशु पानी से भरे टैंक में गिर गया। दीपांशु ने बचाने के लिए अपने दोस्त योगेश को आवाज लगाई। बिना तैरना आते हुए भी योगेश ने उसे बचाने के लिए टैंक में छलांग लगा दी। जिसके बाद दोनों मासूम डूबने लगे तो योगेश के भाई हितेश ने रोना शुरू किया। हितेश की रोने की आवाज सुनकर गांव के ही दो युवा अमित व अंकित मौके पर पहुंच गए। ये दोनों टैंक में कूद गए व दोनों मासूमों को बचा लिया।
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मासूम योगेश के पिता कुलदीप जटासरा ने दोनों का धन्यवाद किया। कुलदीप ने बताया कि योगेश को तैरना ना आते हुए भी सच्ची दोस्ती को निभाते हुए टैंक में कूद गया। दोनों युवकों के साहस की ग्रामीणों ने खूब सराहना की। इसके बाद दोनों बच्चों को अस्पताल लेकर गए।
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