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उपायुक्त ने भिवानी तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को भेजी अनुशंसा
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भिवानी। बैप्टिस्ट चर्च भूमि विवाद मामले में उपायुक्त नरेश नरवाल ने भिवानी तहसीलदार के खिलाफ एडीसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कार्रवाई की अनुशंसा भेजी है। वहीं प्रलेखक जगदीश सचदेवा, नोटरी पब्लिक सज्जन वर्मा और नंबरदार ओमबीर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
हांसी गेट केएम स्कूल के पास करीब 100 करोड़ कीमत की बैप्टिस्ट मिशनरी की विवादित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने की कोशिश की गई थी। इसकी रजिस्ट्री कराने के भी प्रयास किए गए थे। इस मामले में उपायुक्त ने एडीसी राहुल नरवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जिसकी जांच रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त द्वारा तुरंत प्रभाव से तहसीलदार भिवानी के खिलाफ सरकार को विभागीय कार्यवाही करने के लिए अनुशंसा की गई है।
उपायुक्त ने इस मामले में रजिस्ट्री क्लर्क को 21 अक्तूबर को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया। उसके खिलाफ सर्विस रूल-7 के तहत चार्जशीट भी की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित कानूनगो व पटवारी को कलेक्टर भिवानी के न्यायालय से बैप्टिस्ट मिशनरी सोसायटी कारपोरेशन के हक में दिए गए। फैसला 29 अगस्त 2022 पर तथ्यों व दस्तावेजों की बगैर पुष्टि किए व फैसले के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील के प्रावधान को अनदेखा करते हुए इंतकाल को दर्ज किया गया। जिसके आधार पर उपायुक्त ने कानूनगो और पटवारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया है और सर्विस रूल-7 के तहत चार्जशीट किए जाने के आदेश दिए हैं। वहीं गांव देवसर निवासी नंबरदार ओमबीर सिंह को उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं प्रलेखक जगदीश सचदेवा व नोटरी पब्लिक सज्जन वर्मा के संबंध में अतिरिक्त उपायुक्त की जांच रिपोर्ट अनुसार प्रलेखक व नोटरी पब्लिक की कार्यशैली भी संदेहास्पद दर्शायी गई है। इनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। जिस पर उपायुक्त ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडीसी की जांच रिपोर्ट में विवादित भूमि मामले में कुछ अन्य संदिग्ध लोगों की भी गहन जांच कराए जाने की सिफारिश की है। जांच अधिकारी ने इस मामले में गहन जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की भी सिफारिश की है।
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हांसी गेट केएम स्कूल के पास करीब 100 करोड़ कीमत की बैप्टिस्ट मिशनरी की विवादित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने की कोशिश की गई थी। इसकी रजिस्ट्री कराने के भी प्रयास किए गए थे। इस मामले में उपायुक्त ने एडीसी राहुल नरवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। जिसकी जांच रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त द्वारा तुरंत प्रभाव से तहसीलदार भिवानी के खिलाफ सरकार को विभागीय कार्यवाही करने के लिए अनुशंसा की गई है।
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उपायुक्त ने इस मामले में रजिस्ट्री क्लर्क को 21 अक्तूबर को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया। उसके खिलाफ सर्विस रूल-7 के तहत चार्जशीट भी की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित कानूनगो व पटवारी को कलेक्टर भिवानी के न्यायालय से बैप्टिस्ट मिशनरी सोसायटी कारपोरेशन के हक में दिए गए। फैसला 29 अगस्त 2022 पर तथ्यों व दस्तावेजों की बगैर पुष्टि किए व फैसले के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील के प्रावधान को अनदेखा करते हुए इंतकाल को दर्ज किया गया। जिसके आधार पर उपायुक्त ने कानूनगो और पटवारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया है और सर्विस रूल-7 के तहत चार्जशीट किए जाने के आदेश दिए हैं। वहीं गांव देवसर निवासी नंबरदार ओमबीर सिंह को उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं प्रलेखक जगदीश सचदेवा व नोटरी पब्लिक सज्जन वर्मा के संबंध में अतिरिक्त उपायुक्त की जांच रिपोर्ट अनुसार प्रलेखक व नोटरी पब्लिक की कार्यशैली भी संदेहास्पद दर्शायी गई है। इनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। जिस पर उपायुक्त ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एडीसी की जांच रिपोर्ट में विवादित भूमि मामले में कुछ अन्य संदिग्ध लोगों की भी गहन जांच कराए जाने की सिफारिश की है। जांच अधिकारी ने इस मामले में गहन जांच के लिए एसआईटी गठित किए जाने की भी सिफारिश की है।
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