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प्रति क्विंटल सरसों खरीद पर 220 रुपये जीएसटी भरने पर उखड़े आढ़ती
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भिवानी। अनाज मंडी में सरकारी खरीद को लेकर खरीद एजेंसियों और आढ़तियों के बीच जीएसटी का नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र की एजेंसी नैफेड की खरीद पूरी होने के बाद जैसे ही प्रदेश सरकार ने खरीद शुरू की तो यह समस्या आड़े आ गई। सरकारी एजेंसियों ने सरसों खरीद पर जो जीएसटी वेल्यू बनेगी, उसे भरने का जिम्मा आढ़तियों पर छोड़ दिया है। वहीं, आढ़ती इसे गलत बताते हुए इसे भरने से साफ इनकार कर रहे हैं। ऐसी हालत में पिछले तीन दिनों से आढ़तियों ने जे फार्म व आई फार्म जेनरेट नहीं किया है। आढ़तियों की दलील है कि प्रति क्विंटल करीब 220 रुपये बनते हैं। आढ़ती इस राशि को अदा करने में पूरी तरह से असमर्थ हैं।
प्रदेश सरकार ने किसानों की सरसों की खरीद 15 अप्रैल और गेहूं की खरीद 20 अप्रैल से शुरू की थी। सरकारी खरीद पहले केंद्रीय एजेंसी नैफेड ने प्रदेश की एजेंसियों के माध्यम से की थी। नैफेड का लक्ष्य पूरा होने के बाद अब प्रदेश की एजेंसियों ने 29 अप्रैल से खरीद कार्य शुरू किया है। सरसों की खरीद में जैसे ही आढ़तियों ने ई ऑक्शन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो जीएसटी का विवाद खड़ा हो गया। अब आढ़तियों का कहना है कि वे तो कमीशन एजेंट हैं, खरीददार नहीं। जीएसटी खरीददार अदा करेगा। वे तो सर्विस प्रोवाइडर है और अपने कमीशन पर ही जीएसटी का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं।
यह है मामला
खरीद प्रक्रिया से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, जो इस बार हो रहा है। किसान की फसल जैसे ही मंडी में आती है तो मार्केट कमेटी द्वारा उसे टोकन जारी किया जाता है। टोकन के बाद आढ़ती उसकी ऑक्शन दर्ज करता है। बाद में आढ़ती किसान की पेमेंट के लिए जे फार्म दर्ज करता है जिसमें किसान का पूरा ब्योरा होता है और उसी से किसान को भुगतान होता है। आढ़ती अपने आढ़त के क्लेम के लिए आई फार्म जेनरेट करता है। इस बार आई फार्म जेनरेट करने पर किसान की फसल की वेल्यू के साथ आढ़ती के एक प्रतिशत कमीशन के साथ पांच प्रतिशत जीएसटी वेल्यू एड करने का कॉलम दिया है। आई फार्म के अनुसार, आढ़ती को जीएसटी वेल्यू अदा करनी है जो बाद में को-ऑपरेटिव सोसायटी उसे अदा करेगी।
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सिवानी के आढ़तियों ने दिया लिखित में, 29 के बाद नहीं हुए जे फार्म और आई फार्म जेनरेट
जैसे ही प्रदेश सरकार की एजेंसियों ने खरीद शुरू की तो यह समस्या सामने आई है। जीएसटी को लेकर आढ़तियों का कहना है कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है। वे क्यों भरे। इस विवाद में 29 अप्रैल के बाद से अधिकतर आढ़तियों ने जे और आई फार्म जनरेट नहीं किए हैं। अपनी अपनी फर्म में केवल ऑक्शन दिखाकर उसे बाकी छोड़ दिया है। वहीं, सिवानी आढ़ती एसोसिएशन ने डीएम को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वे इस जीएसटी वेल्यू को भरने में असमर्थ है।
बिधनोई मंडी में जीएसटी विवाद में नहीं कटा एक भी गेट पास
शनिवार को बिधनोई अनाज मंडी में 20 किसानों की फसल बिक्री के लिए बहल मार्केट कमेटी ने लिस्ट जारी की थी। लेकिन, मंडी में कोई भी आढ़ती जीएसटी भरने को तैयार नहीं हुआ। इस वजह से संबंधित आढ़तियों ने किसानों को अवगत करा दिया। 20 में से एक भी किसान गेट पास कटवाने के लिए मंडी में नहीं पहुंचा।
सरसों की सरकारी खरीद में आढ़तियों को पांच फीसदी जीएसटी देना होगा, जिसे बाद में हैफेड समितियों के माध्यम से आढ़तियों को लौटाएगी। सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही खरीद की जा रही है। - संतराम, जिला प्रबंधक हैफेड भिवानी।
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प्रदेश सरकार ने किसानों की सरसों की खरीद 15 अप्रैल और गेहूं की खरीद 20 अप्रैल से शुरू की थी। सरकारी खरीद पहले केंद्रीय एजेंसी नैफेड ने प्रदेश की एजेंसियों के माध्यम से की थी। नैफेड का लक्ष्य पूरा होने के बाद अब प्रदेश की एजेंसियों ने 29 अप्रैल से खरीद कार्य शुरू किया है। सरसों की खरीद में जैसे ही आढ़तियों ने ई ऑक्शन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो जीएसटी का विवाद खड़ा हो गया। अब आढ़तियों का कहना है कि वे तो कमीशन एजेंट हैं, खरीददार नहीं। जीएसटी खरीददार अदा करेगा। वे तो सर्विस प्रोवाइडर है और अपने कमीशन पर ही जीएसटी का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं।
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यह है मामला
खरीद प्रक्रिया से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, जो इस बार हो रहा है। किसान की फसल जैसे ही मंडी में आती है तो मार्केट कमेटी द्वारा उसे टोकन जारी किया जाता है। टोकन के बाद आढ़ती उसकी ऑक्शन दर्ज करता है। बाद में आढ़ती किसान की पेमेंट के लिए जे फार्म दर्ज करता है जिसमें किसान का पूरा ब्योरा होता है और उसी से किसान को भुगतान होता है। आढ़ती अपने आढ़त के क्लेम के लिए आई फार्म जेनरेट करता है। इस बार आई फार्म जेनरेट करने पर किसान की फसल की वेल्यू के साथ आढ़ती के एक प्रतिशत कमीशन के साथ पांच प्रतिशत जीएसटी वेल्यू एड करने का कॉलम दिया है। आई फार्म के अनुसार, आढ़ती को जीएसटी वेल्यू अदा करनी है जो बाद में को-ऑपरेटिव सोसायटी उसे अदा करेगी।
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सिवानी के आढ़तियों ने दिया लिखित में, 29 के बाद नहीं हुए जे फार्म और आई फार्म जेनरेट
जैसे ही प्रदेश सरकार की एजेंसियों ने खरीद शुरू की तो यह समस्या सामने आई है। जीएसटी को लेकर आढ़तियों का कहना है कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है। वे क्यों भरे। इस विवाद में 29 अप्रैल के बाद से अधिकतर आढ़तियों ने जे और आई फार्म जनरेट नहीं किए हैं। अपनी अपनी फर्म में केवल ऑक्शन दिखाकर उसे बाकी छोड़ दिया है। वहीं, सिवानी आढ़ती एसोसिएशन ने डीएम को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वे इस जीएसटी वेल्यू को भरने में असमर्थ है।
बिधनोई मंडी में जीएसटी विवाद में नहीं कटा एक भी गेट पास
शनिवार को बिधनोई अनाज मंडी में 20 किसानों की फसल बिक्री के लिए बहल मार्केट कमेटी ने लिस्ट जारी की थी। लेकिन, मंडी में कोई भी आढ़ती जीएसटी भरने को तैयार नहीं हुआ। इस वजह से संबंधित आढ़तियों ने किसानों को अवगत करा दिया। 20 में से एक भी किसान गेट पास कटवाने के लिए मंडी में नहीं पहुंचा।
सरसों की सरकारी खरीद में आढ़तियों को पांच फीसदी जीएसटी देना होगा, जिसे बाद में हैफेड समितियों के माध्यम से आढ़तियों को लौटाएगी। सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही खरीद की जा रही है। - संतराम, जिला प्रबंधक हैफेड भिवानी।