Haryana: अहीरवाल का दिल जीतने वाला बनेगा किंग, BJP के चुनावी पत्ते खुलने के बाद कांग्रेस तलाश रही मजबूत नेता
हरियाणा में लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने छह सीटों पर अपनी चुनावी पत्ते खोल दिए है। वहीं, कांग्रेस की पहली सूची भी जारी नहीं हुई है। जिसके कारण चुनावी समीकरण लगातार बिगड़ रहे हैं।
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भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा के चुनावी पत्ते खुलने के बाद अब कांग्रेस राव दान सिंह पर दांव खेल सकती है। कांग्रेस की इस रणनीति को अहीरवाल क्षेत्र के मतदाताओं में सेंधमारी के तौर पर देखा जा रहा है। वैसे चौधरी बंसीलाल के गढ़ रहे भिवानी में किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी को छोड़कर दूसरे नामों पर विचार करना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।
जजपा भी इस सीट से चुनाव लड़ सकती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय चौटाला यहां से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। भाजपा-जजपा गठबंधन टूटने का एक कारण भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से जजपा प्रत्याशी के चुनाव लड़ने की जिद भी है। अजय चौटाला ने बंसीलाल के गढ़ तोशाम से प्रचार शुरू कर दिया था। इसके अलावा चरखी दादरी से निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान भी लोकसभा जाने के इच्छुक हैं।
भाजपा से चौधरी धर्मवीर के नाम की घोषणा होने से काफी पहले से श्रुति चौधरी को इस सीट पर कांग्रेस का दावेदार माना जा रहा है, मगर धर्मवीर सिंह के फिर से मैदान में आने के बाद पुराना इतिहास दोहराने का डर भी सता रहा है। ऐसे में कांग्रेस सबसे अहम अहीर यानि राव मतदाताओं को साधने के लिए राव दान सिंह के नाम विचार कर सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खासमखास राव दान सिंह फिलहाल महेंद्रगढ़ से कांग्रेस के विधायक हैं और इलाके में मजबूत पकड़ भी रखते हैं। हालांकि पिछले चुनावों की बात करें तो धर्मवीर सिंह अहीरवाल क्षेत्र में काफी मजबूत रहे थे। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह भी कांग्रेस से टिकट के दावेदार हैं। 2019 में वे कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली से चुनाव लड़ चुके हैं।
पांच बार कांग्रेस और दो बार लगातार भाजपा को जीत मिली
भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट 2009 में अस्तित्व में आई थी। इससे भिवानी संसदीय क्षेत्र था, जो 1977 में अस्तित्व में आया था। तब महेंद्रगढ़ जिला नहीं था। इससे पहले भिवानी का क्षेत्र हिसार लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। 1977 से लेकर अब तक यहां से पांच बार कांग्रेस और दो बार लगातार भाजपा को जीत मिली है।
चौधरी बंसीलाल की पार्टी हरियाणा विकास पार्टी से भी तीन बार यहां से सांसद बने हैं। एक बार ये सीट इनेलो की झोली में भी गई है। जनता पार्टी की लहर में यहां के मतदाताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल को भी हार का स्वाद चखाया और चंद्रावती को संसद भेजा था। अब फिर चुनावी उठापटक शुरू हो गई है। भाजपा के बड़े चेहरे एक मंच पर हर हाल में जीत के लिए जीतोड़ मेहनत में जुट गए हैं। वहीं, विपक्षी खेमे कांग्रेस में अभी टिकट को लेकर ही उधेड़बुन चल रही है।
2019 में दूसरे तो 2014 में तीसरे स्थान पर रही थीं श्रुति
2019 के लोकसभा चुनाव में धर्मवीर सिंह को भाजपा से सात लाख 36 हजार से अधिक वोट से जीत मिली थी। उस समय श्रुति चौधरी दो लाख 92 हजार से अधिक वोट लेकर दूसरे नंबर पर थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी धर्मवीर को चार लाख से अधिक वोट लेकर विजयी हुए थे और श्रुति चौधरी दो लाख 68 हजार से ज्यादा वोट लेने के बाद भी तीसरे नंबर पर रही थीं। दूसरे स्थान पर इनेलो प्रत्याशी राव बहादुर सिंह को दो लाख 75 हजार से अधिक वोट मिले थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में श्रुति चौधरी ने तीन लाख से अधिक वोट लेकर जीत दर्ज की थी। दूसरे नंबर पर रहे इनेलो प्रत्याशी अजय सिंह चौटाला दो लाख 47 हजार से अधिक वोट ही ले पाए थे।
जातीय वोट से बनेंगे जीत के समीकरण
भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में जातीय वोट से ही जीत के समीकरण बनेंगे। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 लाख 73 हजार 412 मतदाता हैं। यहां सामान्य वर्ग के 45 फीसदी मतदाता हैं। इसमें 24 फीसदी जाट हैं। इसके अलावा ब्राह्मण 9.3 फीसदी, राजपूत 6.2 फीसदी, महाजन 3.2 फीसदी, पंजाबी 2.1 फीसदी, आरक्षित मुस्लिम आबादी 0.23 फीसदी है। ओबीसी वर्ग के 36 फीसदी मतदाता हैं। इसमें 17.69 फीसदी अहीर हैं। इसके बाद खाती 3.8, कुम्हार 3.7, गुर्जर 2.7, सैनी 2.6 और नाई 1.7 फीसदी हैं। शेष 3.8 प्रतिशत में ओबीसी की अन्य जातियां हैं। इसी तरह एससी आरक्षित वर्ग में 18.2 फीसदी मतदाता विभिन्न जातियों के हैं। इनके अलावा क्षेत्र में 0.7 फीसदी आबादी अल्पसंख्यक इसाई, अनारक्षित मुस्लिम और दूसरे वर्गों की है।
ये चुने जा चुके सांसद
वर्ष सांसद दल
1977 चंद्रावती जनता पार्टी
1980 चौ. बंसीलाल कांग्रेस
1984 चौ. बंसीलाल कांग्रेस
1987 रामनारायण लोकदल
1989 चौ. बंसीलाल कांग्रेस
1991 चौ. जगबीर सिंह हरियाणा विकास पार्टी
1996 चौ. सुरेंद्र सिंह हरियाणा विकास पार्टी
1998 चौ सुरेंद्र सिंह हरियाणा विकास पार्टी
1999 अजय सिंह चौटाला इनेलो
2004 कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस
2009 श्रुति चौधरी कांग्रेस
2014 चौ. धर्मवीर सिंह भाजपा
2019 चौ. धर्मवीर सिंह भाजपा
नौं में से सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के पास
विधानसभा क्षेत्र विधायक पार्टी
लोहारू जयप्रकाश दलाल भाजपा
तोशाम किरण चौधरी कांग्रेस
भिवानी घनश्याम सर्राफ भाजपा
चरखी दादरी सोमबीर सांगवान निर्दलीय
बाढ़डा नैना चौटाला जजपा
अटेली सीताराम यादव भाजपा
महेंद्रगढ़ राव दान सिंह कांग्रेस
नांगल चौधरी राव अभय सिंह भाजपा
नारनौल ओमप्रकाश भाजपा
सूबे को दिए तीन-तीन मुख्यमंत्री
हरियाणा गठन के अब तक के करीब 58 साल के सियासी इतिहास में 11 नेता 25 बार मुख्यमंत्री बने हैं। खास बात ये है कि भिवानी ने हरियाणा को तीन-तीन मुख्यमंत्री दिए हैं। भिवानी जिले से संबंध रखने वाले चौधरी बंसीलाल चार बार, बनारसी दास गुप्ता दो बार और मास्टर हुकम सिंह एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।
नहरी पानी बड़ा मुद्दा
दक्षिण हरियाणा क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा नहरी पानी रहा है। इसके अलावा इलाके में कोई भी बड़ा उद्योग नहीं है जो ज्यादा रोजगार के अवसर मुहैया करा सके। भिवानी से लोहारू रेल लाइन के दोहरीकरण का मामला भी बड़ा मुद्दा रहा है, हालांकि चुनाव को ये बड़े मुद्दे प्रभावित करें, इसकी उम्मीद बेहद कम है। चुनाव जातिगत और राजनीतिक समीकरणों के इर्द-गिर्द ही रहने की उम्मीद है।
प्रतिक्रिया
भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के कार्यकाल में कराए गए कार्यों का रखरखाव भी भाजपा ठीक से नहीं कर पाई। भिवानी में खेल विश्वविद्यालय की मंजूरी दिलाई गई थी, जिसे करनाल ले जाया गया। इसी तरह मेडिकल कॉलेज भी कांग्रेस की ही देन है। केंद्र सरकार ने भिवानी में कोई बड़ा उद्योग व परियोजना तक नहीं दी। सिर्फ पुरानी परियोजनाओं के नाम बदले हैं। -किरण चौधरी, विधायक तोशाम, कांग्रेस