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Bhiwani News: शहर का एक्यूआई 200 पार, आंखों और सांस के मरीज बरतें सावधानी
Sun, 19 Oct 2025 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 19 Oct 2025 11:12 PM IST
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शहर में शाम के समय छाया धुआं ।
भिवानी। दिवाली से पहले ही शहर की हवा जहरीली होती जा रही है। रविवार को भिवानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 214 दर्ज किया गया जो ‘बहुत अस्वास्थ्यकर’ स्तर में आता है। इससे वातावरण में प्रदूषण की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। इसी कारण कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायतें हो रही हैं। चिकित्सकों ने खासकर आंखों और सांस के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
दिवाली पर पटाखे जलने के बाद प्रदूषण और बढ़ने की संभावना है। सुबह के समय मौसम में हल्की स्मोकी धुंध भी देखी जा रही है। रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में अभी भी तपिश बनी हुई है जबकि सुबह और शाम को हल्की ठंडक महसूस की जा रही है। इन बदलते मौसम के साथ प्रदूषित हवा स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
सुबह सैर पर निकलने वाले लोगों के लिए प्रदूषण भरी हवा नुकसानदायक साबित हो रही है। स्वास्थ्य सुधारने के लिए की जाने वाली सैर फिलहाल खतरा बढ़ा रही है। सांस के मरीजों को पहले से ही परेशानी रहती है लेकिन प्रदूषण बढ़ने के बाद कुछ की स्थिति और बिगड़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे हालात में लोग बाहर निकलते समय मास्क जरूर लगाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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इस तरह करें बचाव
दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें। आंखों को धूल-मिट्टी से बचाकर रखें और ठंडे पानी से धोते रहें। अगर इसके बाद भी आंखों में जलन बनी रहे तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करें। सांस के मरीज खुले में घूमते समय विशेष सावधानी बरतें। जहां पटाखे जल रहे हों या धुआं ज्यादा हो वहां जाने से बचें।
इस तरह समझें एक्यूआई स्तर
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 0 से 50 तक का स्तर ‘अच्छा’, 51 से 100 तक ‘मॉडरेट’, 101 से 150 तक ‘खराब’, 151 से 200 तक ‘अनहेल्दी’ और 201 से 300 तक का स्तर ‘बहुत गंभीर’ माना जाता है। इससे ऊपर का स्तर ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है।
हवा में प्रदूषण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। सांस के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं लेकिन देखभाल और सतर्कता से इनसे बचा जा सकता है। - डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज भिवानी
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दिवाली पर पटाखे जलने के बाद प्रदूषण और बढ़ने की संभावना है। सुबह के समय मौसम में हल्की स्मोकी धुंध भी देखी जा रही है। रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में अभी भी तपिश बनी हुई है जबकि सुबह और शाम को हल्की ठंडक महसूस की जा रही है। इन बदलते मौसम के साथ प्रदूषित हवा स्वास्थ्य पर असर डाल रही है।
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सुबह सैर पर निकलने वाले लोगों के लिए प्रदूषण भरी हवा नुकसानदायक साबित हो रही है। स्वास्थ्य सुधारने के लिए की जाने वाली सैर फिलहाल खतरा बढ़ा रही है। सांस के मरीजों को पहले से ही परेशानी रहती है लेकिन प्रदूषण बढ़ने के बाद कुछ की स्थिति और बिगड़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे हालात में लोग बाहर निकलते समय मास्क जरूर लगाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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इस तरह करें बचाव
दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें। आंखों को धूल-मिट्टी से बचाकर रखें और ठंडे पानी से धोते रहें। अगर इसके बाद भी आंखों में जलन बनी रहे तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करें। सांस के मरीज खुले में घूमते समय विशेष सावधानी बरतें। जहां पटाखे जल रहे हों या धुआं ज्यादा हो वहां जाने से बचें।
इस तरह समझें एक्यूआई स्तर
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में 0 से 50 तक का स्तर ‘अच्छा’, 51 से 100 तक ‘मॉडरेट’, 101 से 150 तक ‘खराब’, 151 से 200 तक ‘अनहेल्दी’ और 201 से 300 तक का स्तर ‘बहुत गंभीर’ माना जाता है। इससे ऊपर का स्तर ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है।
हवा में प्रदूषण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। सांस के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं लेकिन देखभाल और सतर्कता से इनसे बचा जा सकता है। - डॉ. यतिन गुप्ता, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज भिवानी