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नौ घंटे की पढ़ाई और गणित से पाई अच्छी रैंकिंग
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Fri, 02 Jun 2017 02:06 AM IST
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तन्मय मित्तल ने उत्तीर्ण की यूपीएससी की परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले के दो होनहारों तन्मय मित्तल और स्वाति सिंह श्योराण ने बुधवार को यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की है। इस परीक्षा में तन्मय मित्तल ने 235वीं और स्वाति सिंह ने 313वीं रैंक हासिल की। इस परीक्षा में 235वीं रैंक प्राप्त करने वाले तन्मय पिछली दफा इंटरव्यू को क्लीयर नहीं कर पाए थे। इसका कारण उन्होंने कम अनुभव बताया। तन्मय मित्तल का गणित विषय फेवरेट रहा है। इस परीक्षा में उन्होंने गणित विषय को प्रमुखता से चुना।
चरखी दादरी शहर के चंपापुरी कालोनी निवासी तन्मय मित्तल ने गीता भवन स्थित श्रीरामस्वरूप ब्रह्मचर्य स्कूल में प्राइमरी तक पढ़ाई करने के बाद एपीजे स्कूल से 12 वीं की परीक्षा पास की। 2013 में बीटेक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए उन्होंने रोजाना करीब नौ घंटे तक पढ़ाई की। तन्मय मित्तल का मानना है कि गणित उनका स्कोरर विषय है। इस परीक्षा में भी उन्होंने गणित विषय को ही चुना था इसी बदौलत ही उन्हें अच्छी रैंकिंग मिली है।
पहली बार सफल न होने पर ली कोचिंग की मदद
पहली बार जब उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी थी तो वे साक्षात्कार में सफल नहीं हो पाए थे। इसमें असफलता का कारण तन्मय मित्तल अनुभव की कमी मानते है। दूसरी बार लिखित व साक्षात्कार दोनो ही परीक्षाओं के लिए उन्होंने कोचिंग ली। तन्मय मित्तल ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। इस अवसर पर नगर व्यापार मंडल संरक्षक एवं पार्षद रविंद्र गुप्ता ने कहा कि तन्मय मित्तल ने चरखी दादरी जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर चरखी दादरी को गर्व है। इस अवसर पर तन्मय मित्तल के दादा विरेंद्र प्रकाश मित्तल, पिता संजीव मित्तल, चाचा नवीन मित्तल, कृष्ण मकड़ानिया, विष्णु गोयल आदि मौजूद थे।
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चरखी दादरी शहर के चंपापुरी कालोनी निवासी तन्मय मित्तल ने गीता भवन स्थित श्रीरामस्वरूप ब्रह्मचर्य स्कूल में प्राइमरी तक पढ़ाई करने के बाद एपीजे स्कूल से 12 वीं की परीक्षा पास की। 2013 में बीटेक करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए उन्होंने रोजाना करीब नौ घंटे तक पढ़ाई की। तन्मय मित्तल का मानना है कि गणित उनका स्कोरर विषय है। इस परीक्षा में भी उन्होंने गणित विषय को ही चुना था इसी बदौलत ही उन्हें अच्छी रैंकिंग मिली है।
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पहली बार सफल न होने पर ली कोचिंग की मदद
पहली बार जब उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी थी तो वे साक्षात्कार में सफल नहीं हो पाए थे। इसमें असफलता का कारण तन्मय मित्तल अनुभव की कमी मानते है। दूसरी बार लिखित व साक्षात्कार दोनो ही परीक्षाओं के लिए उन्होंने कोचिंग ली। तन्मय मित्तल ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। इस अवसर पर नगर व्यापार मंडल संरक्षक एवं पार्षद रविंद्र गुप्ता ने कहा कि तन्मय मित्तल ने चरखी दादरी जिले का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर चरखी दादरी को गर्व है। इस अवसर पर तन्मय मित्तल के दादा विरेंद्र प्रकाश मित्तल, पिता संजीव मित्तल, चाचा नवीन मित्तल, कृष्ण मकड़ानिया, विष्णु गोयल आदि मौजूद थे।
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