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शादी में कैश के लिए लाइन में लगे परिवार के नौ लोग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:22 AM IST
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एटीएम के बाहर लगी लाइनें।
- फोटो : अमर उजाला
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भिवानी में एक दिन अवकाश के बाद मंगलवार को बैंक खुले तो लोगों की लाइन और दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा लंबी रहीं। गनीमत रही कि आज एटीएम कुछ ज्यादा संख्या में चले, अन्यथा हालात और ज्यादा विकराल हो सकते थे। इसके बावजूद आधे एटीएम बंद रहे। दिनभर लोगों में कैश जमा करवाने तथा निकलवाने के लिए धक्कामुक्की चलती रही। बार-बार हो-हल्ला होता रहा। अलग से लाइन न बनाने की वजह से महिलाओं, बुजुर्ग और दिव्यांगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कतार में खड़े कई ऐसे लोग मिले, जिन्हें कैश के लिए चार-चार पांच-पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। बहल में शादी के लिए कैश जुटाने के लिए एक परिवार के नौ बंदों को लाइन में खड़ा होना पड़ा। इनमें पांच महिलाएं शामिल थीं।
मंगलवार सुबह बैंक खुलने के समय से घंटे-दो घंटे पहले ही लोग कतार में दिखाई दिए। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, यूको बैंक आदि के बाहर सबसे ज्यादा मारामारी रही। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के बाहर लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा हो गई, जिससे यातायात प्रभावित होने लगा। बाद में लोगों की कतार बगल के रास्ते में लगवानी पड़ी। विजया बैंक में दोपहर बाद कैश खत्म होने की आशंका हुई तो लोगों को ढाई हजार के बजाय दो हजार रुपये वितरित किए गए।
एटीएम निसंदेह आज ज्यादा संख्या में चलते मिले। लेकिन, पैसा चाहने वालों की संख्या ज्यादा होने की वजह से दिनभर लंबी-लंबी कतार लगी रहीं।
नोट बंदी के साइड इफेक्ट
नोट बंदी के कारण आम आदमी की मुश्किलें कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। बैंकों के बाहर जहां लंबी-लबी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही है वहीं अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और रोजमर्रा की चीजों के लिए आम आदमी परेशान है। 100-50 के नोट ना होने से लगातार दिक्कतें उत्पन्न हो रही है। वे लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिनके यहां शादी की तारीख तय है, लेकिन कैश नहीं है।
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केस : एक
हाथ में फ्रेक्चर के बाद जिला अस्पताल मेें एक्स-रे कराने पहुंचे सूई गांववासी कुलदीप को पापड़ बेलने पड़े। सामान्य अस्पताल में एक्स-रे कराने को 100 रुपये की सरकारी फीस अदा करनी होती है। कुलदीप ने बताया कि 500 के नोट को देखकर सभी भौंहे सिकोड़ लेते हैं। मेरे पास 120 रुपये खुल्ले थे, तब कहीं पर्ची कटी है। अब मुझे कुछ और चीज चाहिए तो मुझे वो चीज नहीं मिल पाएगी क्योंकि खुल्ले है ही नहीं। नोटबंदी ने आम आदमी को बुरी मार मारी है।
कुलदीप
केस : दो
शहर के जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने आए शक्ति को भी बकाया राशि का त्याग करना पड़ा। बकाया छोड़कर ही जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए पर्ची कटानी पड़ी। शक्ति ने बताया कि 50 रुपये खुले देने के बाद भी बकाया रुपये छोड़कर पर्ची कटाई है। अब आम आदमी कितने और कहां से खुले रुपये लेकर आएगा। नोटबंदी ने आम आदमी को आफत ज्यादा दी है।
शक्ति
केस नंबर : तीन
सुधीवास गांव के राजेंद्र के घर में दो लड़कियों की आठ दिसंबर की शादी है। तीन बार लाइन में सुबह से शाम तक लग चुका हूं। कैश नहीं मिला। किसी सामान की खरीददारी नहीं हो सकी है। घर का एक एक सदस्य शादी की तैयारियों को लेकर टेंशन में है। समझ नहीं आता कि क्या करें और क्या न करें। आज भी सुबह घर से केवल चाय पीकर सात बजे लाइन में लगा था। शाम को चार बजे नंबर आया तो बैंक कर्मचारी बोले कि कैश खत्म हो गया है। कैश नहीं मिला तो शादी की डेट के बारे में फिर से विचार करना पड़ेगा।
राजेन्द्र, सुधीवास।
केस नंबर : चार
देवराला के आजाद सिंह की पत्नी बीमार है। उनकी परेशानी यह है कि पत्नी की देखभाल करें या फिर सुबह से शाम तक बैंक की लाइन में लगे। कुछ समझ नहीं आ रहा है, आखिर कब तक पैसे हाथ आएंगे। आजाद ने बताया कि सुबह से पंजाब नेशनल बैंक की लाइन में लगा हूं। कोई प्रशासनिक कंट्रोल नहीं है। लाइन में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे खड़े रह जाते हैं जबकि जवान लड़के धक्कामुक्की करके आगे चले जाते हैं। टीवी में समाचार होता है कि एक बार में 24000 रुपये की विड्रॉल हो सकती है, पर यहां तो केवल 2000 रुपये की दिए जा रहे हैं।
आजाद सिंह, देवराला।
मंगलवार सुबह बैंक खुलने के समय से घंटे-दो घंटे पहले ही लोग कतार में दिखाई दिए। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, पीएनबी, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, यूको बैंक आदि के बाहर सबसे ज्यादा मारामारी रही। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के बाहर लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा हो गई, जिससे यातायात प्रभावित होने लगा। बाद में लोगों की कतार बगल के रास्ते में लगवानी पड़ी। विजया बैंक में दोपहर बाद कैश खत्म होने की आशंका हुई तो लोगों को ढाई हजार के बजाय दो हजार रुपये वितरित किए गए।
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एटीएम निसंदेह आज ज्यादा संख्या में चलते मिले। लेकिन, पैसा चाहने वालों की संख्या ज्यादा होने की वजह से दिनभर लंबी-लंबी कतार लगी रहीं।
नोट बंदी के साइड इफेक्ट
नोट बंदी के कारण आम आदमी की मुश्किलें कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। बैंकों के बाहर जहां लंबी-लबी कतारें कम होने का नाम नहीं ले रही है वहीं अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और रोजमर्रा की चीजों के लिए आम आदमी परेशान है। 100-50 के नोट ना होने से लगातार दिक्कतें उत्पन्न हो रही है। वे लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं, जिनके यहां शादी की तारीख तय है, लेकिन कैश नहीं है।
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केस : एक
हाथ में फ्रेक्चर के बाद जिला अस्पताल मेें एक्स-रे कराने पहुंचे सूई गांववासी कुलदीप को पापड़ बेलने पड़े। सामान्य अस्पताल में एक्स-रे कराने को 100 रुपये की सरकारी फीस अदा करनी होती है। कुलदीप ने बताया कि 500 के नोट को देखकर सभी भौंहे सिकोड़ लेते हैं। मेरे पास 120 रुपये खुल्ले थे, तब कहीं पर्ची कटी है। अब मुझे कुछ और चीज चाहिए तो मुझे वो चीज नहीं मिल पाएगी क्योंकि खुल्ले है ही नहीं। नोटबंदी ने आम आदमी को बुरी मार मारी है।
कुलदीप
केस : दो
शहर के जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने आए शक्ति को भी बकाया राशि का त्याग करना पड़ा। बकाया छोड़कर ही जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए पर्ची कटानी पड़ी। शक्ति ने बताया कि 50 रुपये खुले देने के बाद भी बकाया रुपये छोड़कर पर्ची कटाई है। अब आम आदमी कितने और कहां से खुले रुपये लेकर आएगा। नोटबंदी ने आम आदमी को आफत ज्यादा दी है।
शक्ति
केस नंबर : तीन
सुधीवास गांव के राजेंद्र के घर में दो लड़कियों की आठ दिसंबर की शादी है। तीन बार लाइन में सुबह से शाम तक लग चुका हूं। कैश नहीं मिला। किसी सामान की खरीददारी नहीं हो सकी है। घर का एक एक सदस्य शादी की तैयारियों को लेकर टेंशन में है। समझ नहीं आता कि क्या करें और क्या न करें। आज भी सुबह घर से केवल चाय पीकर सात बजे लाइन में लगा था। शाम को चार बजे नंबर आया तो बैंक कर्मचारी बोले कि कैश खत्म हो गया है। कैश नहीं मिला तो शादी की डेट के बारे में फिर से विचार करना पड़ेगा।
राजेन्द्र, सुधीवास।
केस नंबर : चार
देवराला के आजाद सिंह की पत्नी बीमार है। उनकी परेशानी यह है कि पत्नी की देखभाल करें या फिर सुबह से शाम तक बैंक की लाइन में लगे। कुछ समझ नहीं आ रहा है, आखिर कब तक पैसे हाथ आएंगे। आजाद ने बताया कि सुबह से पंजाब नेशनल बैंक की लाइन में लगा हूं। कोई प्रशासनिक कंट्रोल नहीं है। लाइन में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे खड़े रह जाते हैं जबकि जवान लड़के धक्कामुक्की करके आगे चले जाते हैं। टीवी में समाचार होता है कि एक बार में 24000 रुपये की विड्रॉल हो सकती है, पर यहां तो केवल 2000 रुपये की दिए जा रहे हैं।
आजाद सिंह, देवराला।