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सौ-सौ के नोट हैं तो इलाज है
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2016 01:01 AM IST
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नोटबंदी की मार से आम आदमी परेशान है। घंटों बैंकों के बाहर लाइन में खडे़ होकर भी निराशा हाथ लग रही है । बात केवल यहीं तक ही सीमित नहीं है, अब अस्पतालों में इलाज कराने को पहुंचे मरीज और तीमारदार भी परेशान हैं। मरीज-तीमारदारों के पास सौ-सौ, पचास-पचास के नोट है तो दवा है। अन्यथा ना है। ज्यादा दिक्कत दवा की खरीददारी में आ रही है।
केस : एक
रक्त में कमी और पेट में दिक्कत के बाद कविता को उसके परिजन शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। कंसल्टेंसी फीस ढाई सौ रुपये मांगी गई। उसके पास ढाई सौ खुल्ले नहीं थे। कविता के पति संदीप ने बताया कि उन्होंने ऑन लाइन पेमेंट करने की बात भी कही, लेकिन अस्पताल प्रशासन के इसके लिए तैयार नहीं हुआ। मान-मनौव्वल नहीं चली तो उसने जैसे-तैसे सौ-सौ के नोट का इंतजाम किया, तब कहीं जाकर इलाज शुरू हो पाया। दवा की खरीददारी के वक्त भी ऐसी ही समस्या से जूझना पड़ा।
केस : दो
शहर के निजी अस्पताल में भर्ती प्रवीण को दवा विक्रेता के रवैये से शिकायत है। प्रवीण की माताने बताया कि दवा का बिल करीब आठ सौ रुपये बना, उसने हजार का नोट दिया। उसे दवा तो मिल गई, लेकिन बकाया नहीं मिला। बकाया मांगा तो दवा विक्रेता ने दो-टूक कहा कि सौ-सौ के खुल्ले नोट ले आओ और फिर दवा ले जाना। चूंकि, उसे दवा की सख्त जरूरत थी, इसलिए उसने हजार का नोट देकर आठ सौ रुपये की दवा खरीदनी पड़ी। दवा लेने के कुछ देर बाद बकाया लेने गए, तो भी उसे बकाया नहीं मिला। जवाब मिला, बाद में लेना।
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केस : एक
रक्त में कमी और पेट में दिक्कत के बाद कविता को उसके परिजन शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। कंसल्टेंसी फीस ढाई सौ रुपये मांगी गई। उसके पास ढाई सौ खुल्ले नहीं थे। कविता के पति संदीप ने बताया कि उन्होंने ऑन लाइन पेमेंट करने की बात भी कही, लेकिन अस्पताल प्रशासन के इसके लिए तैयार नहीं हुआ। मान-मनौव्वल नहीं चली तो उसने जैसे-तैसे सौ-सौ के नोट का इंतजाम किया, तब कहीं जाकर इलाज शुरू हो पाया। दवा की खरीददारी के वक्त भी ऐसी ही समस्या से जूझना पड़ा।
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केस : दो
शहर के निजी अस्पताल में भर्ती प्रवीण को दवा विक्रेता के रवैये से शिकायत है। प्रवीण की माताने बताया कि दवा का बिल करीब आठ सौ रुपये बना, उसने हजार का नोट दिया। उसे दवा तो मिल गई, लेकिन बकाया नहीं मिला। बकाया मांगा तो दवा विक्रेता ने दो-टूक कहा कि सौ-सौ के खुल्ले नोट ले आओ और फिर दवा ले जाना। चूंकि, उसे दवा की सख्त जरूरत थी, इसलिए उसने हजार का नोट देकर आठ सौ रुपये की दवा खरीदनी पड़ी। दवा लेने के कुछ देर बाद बकाया लेने गए, तो भी उसे बकाया नहीं मिला। जवाब मिला, बाद में लेना।
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