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लड़कियां कर रही कानून का मिस यूज, लीव इन रिलेशन में रहती हैं और फिर लगा देती है रेप का आरोप : दहिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2016 01:30 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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लड़कियां कानून का मिस यूज कर रही हैं। बड़े शहरों में नौकरी करने के दौरान लड़कों के साथ साल-दो साल लिव इन रिलेशनशिप में रहती हैं और विवाद होने पर रेप के आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे में लिव इन रिलेशनशिप कानून में बदलाव की जरूरत है।
यह कहना है महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया का। उन्होंने महिला थाने की जांच की और सुनवाई के लिए 10 केसों का चयन किया। बृहस्पतिवार को 10 केसों की सुनवाई एसपी कार्यालय में होगी। बुधवार को लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से रूबरू होते हुए महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने कहा कि आयोग दोबारा से महिलाओं के घर द्वार पर ही उनकी समस्याओं की सुनवाई करने के लिए तत्पर है। भिवानी के 10 विवाद महिला थाने की जांच करने के बाद सुनवाई के लिए रखे गए है। इनके अलावा कोई भी महिला सीधे रूप से उनके समक्ष पेश होकर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। ऐसे मामलों की भी सुनवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों संबंधी मामलों में दोनों पक्षों को शामिल करके सुनवाई की जाएगी। तत्पश्चात ही उन समस्याओं का निवारण सुनिश्चित किया जाएगा।
दहिया ने कहा कि महिलाओं की शिकायतें केवल फाइल बनकर न रह जाए उनकी सुनवाई समय पर सुनिश्चित करने के लिए आयोग प्रतिदिन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। जिला स्तर पर महिला थानों की स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाना है। लेकिन जिला स्तर पर केवल एक महिला थाना पूर्ण रूप से सार्थक नही हो रहा क्योंकि महिलाओं की संख्या भी पुरुषों के बराबर है। इसलिए इन थानों में प्रतिदिन आने वाली शिकायतों का सही निपटान समय पर नही हो रहा।
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उपाध्यक्ष ने कहा कई बार झूठे मुकदमों की शिकायतें आती है। आयोग ऐसी शिकायतों पर पूर्ण संज्ञान लेगा कि जांच व कार्रवाई के बाद ही शिकायत को सच्चा या झुठा साबित किया जा सकता है। उन्होंने निरन्तर बढ़ रहे रेप के मामलों में कहा कि बचपन से ही युवाओं की मानसिक सोच में बदलाव करना चाहिए। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति इस तरह के कार्यो को अंजाम नहीं देता और वह जीवनभर महिलाओं का मान-सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि लीव एंड रिलेशनशिप के मामलों में कानून में बदलाव करने की आवश्यकता है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सख्त कानून बनाया जाए। उन्होंने बताया कि भिवानी जिले में महिला थाना की स्थापना उपरांत गत वर्ष 11 विवाद तथा इस वर्ष अब तक 28 मामले महिलाओं के दर्ज किए गए है। इस मौके पर सीडब्ल्यूसी चेयरमैन राजबाला श्योराण, सरोज बाला आदि मौजूद रही।
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यह कहना है महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया का। उन्होंने महिला थाने की जांच की और सुनवाई के लिए 10 केसों का चयन किया। बृहस्पतिवार को 10 केसों की सुनवाई एसपी कार्यालय में होगी। बुधवार को लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से रूबरू होते हुए महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने कहा कि आयोग दोबारा से महिलाओं के घर द्वार पर ही उनकी समस्याओं की सुनवाई करने के लिए तत्पर है। भिवानी के 10 विवाद महिला थाने की जांच करने के बाद सुनवाई के लिए रखे गए है। इनके अलावा कोई भी महिला सीधे रूप से उनके समक्ष पेश होकर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। ऐसे मामलों की भी सुनवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों संबंधी मामलों में दोनों पक्षों को शामिल करके सुनवाई की जाएगी। तत्पश्चात ही उन समस्याओं का निवारण सुनिश्चित किया जाएगा।
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दहिया ने कहा कि महिलाओं की शिकायतें केवल फाइल बनकर न रह जाए उनकी सुनवाई समय पर सुनिश्चित करने के लिए आयोग प्रतिदिन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। जिला स्तर पर महिला थानों की स्थापना करने का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाना है। लेकिन जिला स्तर पर केवल एक महिला थाना पूर्ण रूप से सार्थक नही हो रहा क्योंकि महिलाओं की संख्या भी पुरुषों के बराबर है। इसलिए इन थानों में प्रतिदिन आने वाली शिकायतों का सही निपटान समय पर नही हो रहा।
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उपाध्यक्ष ने कहा कई बार झूठे मुकदमों की शिकायतें आती है। आयोग ऐसी शिकायतों पर पूर्ण संज्ञान लेगा कि जांच व कार्रवाई के बाद ही शिकायत को सच्चा या झुठा साबित किया जा सकता है। उन्होंने निरन्तर बढ़ रहे रेप के मामलों में कहा कि बचपन से ही युवाओं की मानसिक सोच में बदलाव करना चाहिए। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति इस तरह के कार्यो को अंजाम नहीं देता और वह जीवनभर महिलाओं का मान-सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि लीव एंड रिलेशनशिप के मामलों में कानून में बदलाव करने की आवश्यकता है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सख्त कानून बनाया जाए। उन्होंने बताया कि भिवानी जिले में महिला थाना की स्थापना उपरांत गत वर्ष 11 विवाद तथा इस वर्ष अब तक 28 मामले महिलाओं के दर्ज किए गए है। इस मौके पर सीडब्ल्यूसी चेयरमैन राजबाला श्योराण, सरोज बाला आदि मौजूद रही।