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स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ी फिर भी इलाज को तरस रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Oct 2016 11:58 PM IST
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भिवानी।
जिले के गठन के बाद स्वास्थ्य सेवाएं तो बढ़ी, मगर चिकित्सकों की कमी और बदइंतजामी की वजह से मरीज बेहाल हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज महंगा है तो सरकारी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते सभी को इलाज मिलता नहीं। यही कारण है कि इतने वर्षों बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में जिला पिछड़ा नजर आ रहा है। अब तो मेडिकल कॉलेज बनने पर ही बेहतर सुविधाएं मिलने की आस है।
जिले के गठन के समय सामान्य अस्पताल को छोड़ गांवों में उपचार की कोई ज्यादा अच्छी सुविधा नहीं थी। कुछ नीम-हकीम थे तो कुछ झोलाछाप डाक्टर। प्राइवेट अस्पताल भी नाममात्र के थे। अब इतने वर्षों बाद सुविधाएं बढ़ी। आज जिला अस्पताल के अलावा चार सब अस्पताल दादरी, सिवानी, बवानीखेड़ा, देवराला में है तो नौ सीएचसी और 35 पीएचसी है। यह तो सरकारी व्यवस्था है। इनके अलावा शहर में करीब 50 प्राइवेट अस्पताल है। जिलेभर में इनकी संख्या करीब दो सौ है। इनमें कुछ तो बड़े अस्पतालों की तर्ज पर सभी ऑपरेशन व अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं दे रहे है।
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रोजाना के 14 सौ मरीज, चिकित्सक 17, जरूरत 80 की
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की जाए तो सबसे बड़े जिला अस्पताल में प्रतिदिन 12 सौ से 14 सौ मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे है। यहां चिकित्सकों के 55 पद स्वीकृत है। कार्यरत है महज 17। इनमें भी कुछ डाक्टर कोर्ट एविडेंस और ऑपरेशन थियरेटर में व्यस्त रहते है। ऐसे में मरीज इलाज के लिए चिकित्सकों का इंतजार ही करते रह जाते हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। हाल यह है कि ईएनटी स्पेशलिस्ट तक नहीं है। अस्पताल में न स्किन रोगों का कोई डाक्टर है तो न ही मनोरोग का। बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन एक-एक है तो महिला रोग विशेषज्ञ भी महज तीन है। अल्ट्रासाउंड करने के लिए एक ही रेडियोलॉजिस्ट है जो अक्सर कोर्ट एविडेंस पर रहते है। लैब बिना पैथालॉजिस्ट के चल रही है। ऐसे में मरीजों को अक्सर प्राइवेट अस्पतालों या फिर पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है।
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सीएचसी, पीएचसी पर नहीं मिलता इलाज
ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए नौ सीएचसी, 35 पीएचसी और चार सब अस्पताल बनाए गए है। मगर यहां भी स्टाफ की कमी की मार है। सीएचसी, पीएचसी पर स्वीकृत पदों से 50 प्रतिशत तक ही कार्यरत है। ऐसे में कैसा इलाज मिलता होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अक्सर पीएचसी पर डाक्टर नहीं मिलता तो मरीजों को सामान्य अस्पताल की ओर दौड़ लगानी पड़ती है।
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मेडिकल कॉलेज से ही आस
जिले के लोगों को बेहतर इलाज के लिए अब मेडिकल कॉलेज से ही आस है। भिवानी में मेडिकल कॉलेज की घोषणा हो चुकी है। पिछले दिनों ही केंद्र सरकार की ओर से सामान्य अस्पताल भिवानी को मेडिकल अपग्रेड करने की घोषणा की गई है। जिसके तहत करोड़ों रुपयों से अस्पताल को अपग्रेड कर बेहतर व्यवस्थाएं की जाएंगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी।
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स्वास्थ्य सेवाएं एक नजर
सामान्य अस्पताल 01
सब अस्पताल 04
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 09
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 35
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जिले के गठन के बाद स्वास्थ्य सेवाएं तो बढ़ी, मगर चिकित्सकों की कमी और बदइंतजामी की वजह से मरीज बेहाल हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इलाज महंगा है तो सरकारी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते सभी को इलाज मिलता नहीं। यही कारण है कि इतने वर्षों बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में जिला पिछड़ा नजर आ रहा है। अब तो मेडिकल कॉलेज बनने पर ही बेहतर सुविधाएं मिलने की आस है।
जिले के गठन के समय सामान्य अस्पताल को छोड़ गांवों में उपचार की कोई ज्यादा अच्छी सुविधा नहीं थी। कुछ नीम-हकीम थे तो कुछ झोलाछाप डाक्टर। प्राइवेट अस्पताल भी नाममात्र के थे। अब इतने वर्षों बाद सुविधाएं बढ़ी। आज जिला अस्पताल के अलावा चार सब अस्पताल दादरी, सिवानी, बवानीखेड़ा, देवराला में है तो नौ सीएचसी और 35 पीएचसी है। यह तो सरकारी व्यवस्था है। इनके अलावा शहर में करीब 50 प्राइवेट अस्पताल है। जिलेभर में इनकी संख्या करीब दो सौ है। इनमें कुछ तो बड़े अस्पतालों की तर्ज पर सभी ऑपरेशन व अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं दे रहे है।
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रोजाना के 14 सौ मरीज, चिकित्सक 17, जरूरत 80 की
स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की जाए तो सबसे बड़े जिला अस्पताल में प्रतिदिन 12 सौ से 14 सौ मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे है। यहां चिकित्सकों के 55 पद स्वीकृत है। कार्यरत है महज 17। इनमें भी कुछ डाक्टर कोर्ट एविडेंस और ऑपरेशन थियरेटर में व्यस्त रहते है। ऐसे में मरीज इलाज के लिए चिकित्सकों का इंतजार ही करते रह जाते हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। हाल यह है कि ईएनटी स्पेशलिस्ट तक नहीं है। अस्पताल में न स्किन रोगों का कोई डाक्टर है तो न ही मनोरोग का। बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन एक-एक है तो महिला रोग विशेषज्ञ भी महज तीन है। अल्ट्रासाउंड करने के लिए एक ही रेडियोलॉजिस्ट है जो अक्सर कोर्ट एविडेंस पर रहते है। लैब बिना पैथालॉजिस्ट के चल रही है। ऐसे में मरीजों को अक्सर प्राइवेट अस्पतालों या फिर पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है।
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सीएचसी, पीएचसी पर नहीं मिलता इलाज
ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए नौ सीएचसी, 35 पीएचसी और चार सब अस्पताल बनाए गए है। मगर यहां भी स्टाफ की कमी की मार है। सीएचसी, पीएचसी पर स्वीकृत पदों से 50 प्रतिशत तक ही कार्यरत है। ऐसे में कैसा इलाज मिलता होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अक्सर पीएचसी पर डाक्टर नहीं मिलता तो मरीजों को सामान्य अस्पताल की ओर दौड़ लगानी पड़ती है।
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मेडिकल कॉलेज से ही आस
जिले के लोगों को बेहतर इलाज के लिए अब मेडिकल कॉलेज से ही आस है। भिवानी में मेडिकल कॉलेज की घोषणा हो चुकी है। पिछले दिनों ही केंद्र सरकार की ओर से सामान्य अस्पताल भिवानी को मेडिकल अपग्रेड करने की घोषणा की गई है। जिसके तहत करोड़ों रुपयों से अस्पताल को अपग्रेड कर बेहतर व्यवस्थाएं की जाएंगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी।
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स्वास्थ्य सेवाएं एक नजर
सामान्य अस्पताल 01
सब अस्पताल 04
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 09
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 35
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