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दिव्यांग को सबलता प्रदान करने में अभिभावकों की सजगता सबसे जरूरी : पूनम श्योराण
Tue, 14 Jan 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 14 Jan 2025 11:38 PM IST
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लोहारू में जगरूकता शिविर के दूसरे दिन कार्यक्रम को संबोधित करतीं प्राचार्या पूनम श्योराण।
लोहारू। राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय आयोजित दो दिवसीय दिव्यांग छात्र अभिभावक जागरूकता कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हो गया। प्राचार्य पूनम श्योराण ने बताया कि शिक्षा विभाग प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में दिव्यांग छात्रों के आने वाली समस्याओं के निदान एवं विभिन्न स्कीमों की जानकारी प्रदान करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है।
उन्होंने बताया कि खंड स्तर के इस कार्यक्रम में मुखियाओं व अभिभावकों की उपस्थिति सराहनीय रही। दिव्यांग व्यक्ति को सबलता प्रदान करने में अभिभावकों की सजगता सबसे जरूरी है। सुरेंद्र वर्मा सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक ने कहा कि दिव्यांग होना अब कोई अभिशाप नहीं है, माता-पिता व अध्यापक मिलकर बच्चे की प्रतिभा पहचान कर उसे समाज की मुख्यधारा में शामिल कर सकते हैं।
डॉ. सुरेश भारद्वाज ब्लॉक कोऑर्डिनेटर लीगल ने कहा कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को विद्यालय परिवेश में उचित वातावरण प्रदान करने का दायित्व अध्यापकों पर होता है। वे ऐसे विद्यार्थियों के साथ सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करें व अन्य विद्यार्थियों को भी इस बारे में प्रोत्साहित करें ताकि दिव्यांग बच्चे के आत्मविश्वास और मनोबल में कोई कमी न आएं।
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सतीश मेचू जिला काउंसलर रेडक्राॅस ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया से अभिभावकों को अवगत कराया। पूर्व प्राचार्य सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि दिव्यांग बच्चे में कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा छुपी हुई होती है। जिसको पहचान कर उसमें दक्ष बनाने की जिम्मेदारी माता-पिता और अध्यापक पर होती है। समापन कार्यक्रम में बीईओ विजय प्रभा शामिल हुई। इस मौके पर राजीव वत्स, अनिल कटारिया आईडी ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, दौलतराम सोलंकी पूर्व नगर पालिका प्रधान, संजय खंडेलवाल सचिव व्यापार मंडल, बलदेव एचटी उपस्थित रहे।
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उन्होंने बताया कि खंड स्तर के इस कार्यक्रम में मुखियाओं व अभिभावकों की उपस्थिति सराहनीय रही। दिव्यांग व्यक्ति को सबलता प्रदान करने में अभिभावकों की सजगता सबसे जरूरी है। सुरेंद्र वर्मा सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक ने कहा कि दिव्यांग होना अब कोई अभिशाप नहीं है, माता-पिता व अध्यापक मिलकर बच्चे की प्रतिभा पहचान कर उसे समाज की मुख्यधारा में शामिल कर सकते हैं।
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डॉ. सुरेश भारद्वाज ब्लॉक कोऑर्डिनेटर लीगल ने कहा कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को विद्यालय परिवेश में उचित वातावरण प्रदान करने का दायित्व अध्यापकों पर होता है। वे ऐसे विद्यार्थियों के साथ सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करें व अन्य विद्यार्थियों को भी इस बारे में प्रोत्साहित करें ताकि दिव्यांग बच्चे के आत्मविश्वास और मनोबल में कोई कमी न आएं।
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सतीश मेचू जिला काउंसलर रेडक्राॅस ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया से अभिभावकों को अवगत कराया। पूर्व प्राचार्य सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि दिव्यांग बच्चे में कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा छुपी हुई होती है। जिसको पहचान कर उसमें दक्ष बनाने की जिम्मेदारी माता-पिता और अध्यापक पर होती है। समापन कार्यक्रम में बीईओ विजय प्रभा शामिल हुई। इस मौके पर राजीव वत्स, अनिल कटारिया आईडी ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, दौलतराम सोलंकी पूर्व नगर पालिका प्रधान, संजय खंडेलवाल सचिव व्यापार मंडल, बलदेव एचटी उपस्थित रहे।