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घुटने लगा दम, 500 पहुंचा एक्यूआई
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53 फोटो स्मॉग की चद्दर में लिपटा भिवानी शहर ।
- फोटो : Bhiwani
प्रदूषण का बढ़ा स्तर बेहद खतरनाक हो गया है। शनिवार को लोग सांस लेने में तकलीफ की समस्या से दिनभर जूझते रहे। वहीं आंखों में जलन, गले में इंफेक्शन की समस्या भी रही। लोग यही कहते रहे कि आज तो उनका दम घुट रहा है। दिनभर स्मॉग की चादर छाई रही और धूप भी नहीं निकली। प्रदूषण का स्तर 500 एक्यूआई दर्ज किया गया। पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा 500 पार रही।
दिवाली के बाद बढ़ा प्रदूषण अब बेहद खतरनाक बन गया है। अब तक जहां आसमान में स्मॉग और आंखों में हलकी जलन तक प्रदूषण सीमित था मगर शनिवार को यह खतरनाक नजर आया। लोगों को आंख में तेज जलन के अलावा सांस में तकलीफ के साथ-साथ दम घुटने जैसी समस्या से जूझना पड़ा। इस कारण अनेक लोग अस्पताल पहुंचे। सांस के मरीजों और बच्चों को अधिक परेशानी हुई। इससे बचने के लिए लोगों को दिनभर मुंह पर मास्क, रूमाल व कपड़े लगाए देखा गया। वहीं कोहरे के बीच दोपहर के समय भी वाहन चालकों को लाइटें जलाकर वाहन चलाकर जाते देखा गया।
पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 500 पार, पीएम 10 भी हुआ 468
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। लगातार दूसरे दिन पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्र लगातार दूसरे दिन 500 के पार रही। शनिवार को पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा 500-500 दर्ज की गई। शुक्रवार को भी पीएम 2.5 की मात्रा 500 और पीएम 10 की मात्रा 468 दर्ज की गई थी। यह बेहद खतरनाक स्तर है।
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ओपीडी के बाद इमरजेंसी में भी भीड़ : प्रदूषण के बीच मरीजों की संख्या में अचानक ही काफी बढ़ोतरी हो गई है। सामान्य अस्पताल में आंखों से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या करीब 25 फीसदी तक बढ़ गई है। औसतन 160 से 170 बच्चे उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिनमें 70 फीसदी तक ऐसे हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। सांस संबंधित बीमारी को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले बुुजुर्गों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। हालात ये है कि ओपीडी के बाद मरीज इमरजेंसी में भी इलाज के लिए पहुंच रहे है।
शाम के समय हुई बूंदाबंादी : शाम के समय हालांकि शहर और आसपास के गांवों में हलकी बूंदाबांदी हुई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगर थोड़ी अच्छी बारिश हो जाए तो प्रदूषण की समस्या से निजात मिल जाएगी।
प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक है। जहां तक संभव हो लोग अपने घरों से बाहर न निकले। बच्चे घर में ही रहे। अगर बाहर निकलना भी पड़े तो मास्क पहनकर निकले। आंखों पर चश्मा लगाकर ही बाहर निकले।
- डॉ. कृष्ण कुमार, सर्जन, सामान्य अस्पताल
प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है। बारिश के बाद ही राहत की उम्मीद है। प्रदूषण बढ़ने के कई कारण है। पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे पार्टिकल का बढ़ना चिंताजनक है।
- हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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दिवाली के बाद बढ़ा प्रदूषण अब बेहद खतरनाक बन गया है। अब तक जहां आसमान में स्मॉग और आंखों में हलकी जलन तक प्रदूषण सीमित था मगर शनिवार को यह खतरनाक नजर आया। लोगों को आंख में तेज जलन के अलावा सांस में तकलीफ के साथ-साथ दम घुटने जैसी समस्या से जूझना पड़ा। इस कारण अनेक लोग अस्पताल पहुंचे। सांस के मरीजों और बच्चों को अधिक परेशानी हुई। इससे बचने के लिए लोगों को दिनभर मुंह पर मास्क, रूमाल व कपड़े लगाए देखा गया। वहीं कोहरे के बीच दोपहर के समय भी वाहन चालकों को लाइटें जलाकर वाहन चलाकर जाते देखा गया।
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पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 500 पार, पीएम 10 भी हुआ 468
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। लगातार दूसरे दिन पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्र लगातार दूसरे दिन 500 के पार रही। शनिवार को पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा 500-500 दर्ज की गई। शुक्रवार को भी पीएम 2.5 की मात्रा 500 और पीएम 10 की मात्रा 468 दर्ज की गई थी। यह बेहद खतरनाक स्तर है।
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ओपीडी के बाद इमरजेंसी में भी भीड़ : प्रदूषण के बीच मरीजों की संख्या में अचानक ही काफी बढ़ोतरी हो गई है। सामान्य अस्पताल में आंखों से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या करीब 25 फीसदी तक बढ़ गई है। औसतन 160 से 170 बच्चे उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिनमें 70 फीसदी तक ऐसे हैं, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। सांस संबंधित बीमारी को लेकर अस्पताल पहुंचने वाले बुुजुर्गों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। हालात ये है कि ओपीडी के बाद मरीज इमरजेंसी में भी इलाज के लिए पहुंच रहे है।
शाम के समय हुई बूंदाबंादी : शाम के समय हालांकि शहर और आसपास के गांवों में हलकी बूंदाबांदी हुई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगर थोड़ी अच्छी बारिश हो जाए तो प्रदूषण की समस्या से निजात मिल जाएगी।
प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक है। जहां तक संभव हो लोग अपने घरों से बाहर न निकले। बच्चे घर में ही रहे। अगर बाहर निकलना भी पड़े तो मास्क पहनकर निकले। आंखों पर चश्मा लगाकर ही बाहर निकले।
- डॉ. कृष्ण कुमार, सर्जन, सामान्य अस्पताल
प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है। बारिश के बाद ही राहत की उम्मीद है। प्रदूषण बढ़ने के कई कारण है। पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे पार्टिकल का बढ़ना चिंताजनक है।
- हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड